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पूर्व प्रधान व सचिव से वसूला जाएगा गबन का 77 लाख रुपये
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पूर्व प्रधान व सचिव से वसूला जाएगा 77 लाख
बस्ती। सदर ब्लॉक के गनेशपुर ग्राम पंचायत में करीब 77 लाख के गबन का मामला प्रकाश में आया है। शिकायत पर हुई जांच में इसकी पुष्टि हुई है। डीएम आशुतोष निरंजन ने पूर्व प्रधान अशर्फी लाल साहू व तत्कालीन सचिव शैलेंद्र मणि त्रिपाठी को कारण बताओ नोटिस भेजकर साक्ष्य सहित 15 दिन में जवाब मांगा है।
गनेशपुर ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर 2014 से 2016 तक भारी वित्तीय अनियमितता पाई गई है। ग्राम पंचायत में खड़जा, नाली, पथ-प्रकाश आदि काम कराने के लिए बिना टेंडर के भारी मात्रा में ईंट, पाइप, बालू आदि की खरीदारी बिना वैट दिए की गई। जांच में ज्यादातर भुगतान अज्ञात आपूर्तिकर्ता को किए जाने की पुष्टि हुई। उक्त कृत्यों से अप्रैल 2014 से मार्च 2015 तक तकरीबन 77.03 लाख रुपये की भुगतान ग्राम निधि से किया गया। दूसरी ओर पूर्व प्रधान व सचिव ने बेयरर चेक से करीब 5.88 लाख रुपये का भुगतान अप्रैल 2015 से अक्टूबर 2016 के बीच लिया। जबकि नियमानुसार प्रधान स्वयं के मानदेय के अलावा अन्य कोई भुगतान बेयरर चेक से नहीं कर सकते। जांच में विकास कार्यों के अभिलेख तक नहीं पाए गए। दिए गए अभिलेख भी मनगढ़ंत पाए गए। लेखा परीक्षा अधिकारी इलाहाबाद की आख्या के अनुसार डीएम आशुतोष निरंजन ने बताया कि अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी की गई है। दोषियों के विरुद्ध पंचायत राज अधिनियम की धारा-27(2) के तहत गबन की गई धनराशि भू-राजस्व बकाए की भांति वसूल की जाएगी।
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बस्ती। सदर ब्लॉक के गनेशपुर ग्राम पंचायत में करीब 77 लाख के गबन का मामला प्रकाश में आया है। शिकायत पर हुई जांच में इसकी पुष्टि हुई है। डीएम आशुतोष निरंजन ने पूर्व प्रधान अशर्फी लाल साहू व तत्कालीन सचिव शैलेंद्र मणि त्रिपाठी को कारण बताओ नोटिस भेजकर साक्ष्य सहित 15 दिन में जवाब मांगा है।
गनेशपुर ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर 2014 से 2016 तक भारी वित्तीय अनियमितता पाई गई है। ग्राम पंचायत में खड़जा, नाली, पथ-प्रकाश आदि काम कराने के लिए बिना टेंडर के भारी मात्रा में ईंट, पाइप, बालू आदि की खरीदारी बिना वैट दिए की गई। जांच में ज्यादातर भुगतान अज्ञात आपूर्तिकर्ता को किए जाने की पुष्टि हुई। उक्त कृत्यों से अप्रैल 2014 से मार्च 2015 तक तकरीबन 77.03 लाख रुपये की भुगतान ग्राम निधि से किया गया। दूसरी ओर पूर्व प्रधान व सचिव ने बेयरर चेक से करीब 5.88 लाख रुपये का भुगतान अप्रैल 2015 से अक्टूबर 2016 के बीच लिया। जबकि नियमानुसार प्रधान स्वयं के मानदेय के अलावा अन्य कोई भुगतान बेयरर चेक से नहीं कर सकते। जांच में विकास कार्यों के अभिलेख तक नहीं पाए गए। दिए गए अभिलेख भी मनगढ़ंत पाए गए। लेखा परीक्षा अधिकारी इलाहाबाद की आख्या के अनुसार डीएम आशुतोष निरंजन ने बताया कि अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी की गई है। दोषियों के विरुद्ध पंचायत राज अधिनियम की धारा-27(2) के तहत गबन की गई धनराशि भू-राजस्व बकाए की भांति वसूल की जाएगी।
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