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हाथ खाली, कैसे हो बेटी की शादी
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Tue, 22 Nov 2016 11:12 PM IST
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राघवराम यादव।
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नोटबंदी के कारण आम लोगों को किन परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है, इसका अंदाजा एक पिता को देखकर सहज ही लगाया जा सकता है, जो अपनी बेटी की शादी में बैंक से रुपये निकालने के लिए दर दर भटक रहा है।
नए नोट के लिए लाचार पिता ने कमिश्नर और डीएम से भी रुपये निकलवाने में मदद की गुहार लगाई। अधिकारियों ने बैंक को जरूरत के मुताबिक नये नोट देने का भी निर्देश दिए लेकिन बैंक के जिम्मेदारों ने नियमों का हवाला देकर हाथ खड़ा कर दिया। काफी मशक्कत के बाद महज दस हजार मिल सके हैं। जबकि मांग एक लाख गए थे।
कृषि विभाग में कामदार के पद से सेवा निवृत्त हुए राघवराम यादव के सामने बेटी की शादी करना कठिन हो रहा है। बताया कि आज बेटी की शादी है चेक से भी भुगतान करने का प्रयास किया मगर, हलवाई, बढ़ाई और टेंट वालों ने उसे भी लेने से इंकार कर दिया। बताया कि उनकी दिली तमन्ना बेटी की शादी बड़ी धूमधाम से करने की थी, इसके लिए वह काफी दिनों से तैयारी कर रहे हैं। दहेज और विदाई के समय में क्या क्या देना है, और इन पर कितना व्यय आएगा उसका पहले से ही इंतजाम कर लिया गया था। मगर नोटबंदी के कारण सारी इच्छाओं पर पानी फिर गया। अब तो किसी तरह शादी हो जाए इसे लेकर चिंता सता रही है। कई दोस्तों और नाते रिश्तेदारों से नये नोट की मांग कर चुका हूं, मगर सफलता बहुत कम ही मिली। हालांकि परेशानियों के बाद भी राघवराम ने नोटबंदी के निर्णय को सही ठहराया और कहा कि आगे चलकर इसका फायदा आम लोगों को ही मिलेगा।
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नए नोट के लिए लाचार पिता ने कमिश्नर और डीएम से भी रुपये निकलवाने में मदद की गुहार लगाई। अधिकारियों ने बैंक को जरूरत के मुताबिक नये नोट देने का भी निर्देश दिए लेकिन बैंक के जिम्मेदारों ने नियमों का हवाला देकर हाथ खड़ा कर दिया। काफी मशक्कत के बाद महज दस हजार मिल सके हैं। जबकि मांग एक लाख गए थे।
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कृषि विभाग में कामदार के पद से सेवा निवृत्त हुए राघवराम यादव के सामने बेटी की शादी करना कठिन हो रहा है। बताया कि आज बेटी की शादी है चेक से भी भुगतान करने का प्रयास किया मगर, हलवाई, बढ़ाई और टेंट वालों ने उसे भी लेने से इंकार कर दिया। बताया कि उनकी दिली तमन्ना बेटी की शादी बड़ी धूमधाम से करने की थी, इसके लिए वह काफी दिनों से तैयारी कर रहे हैं। दहेज और विदाई के समय में क्या क्या देना है, और इन पर कितना व्यय आएगा उसका पहले से ही इंतजाम कर लिया गया था। मगर नोटबंदी के कारण सारी इच्छाओं पर पानी फिर गया। अब तो किसी तरह शादी हो जाए इसे लेकर चिंता सता रही है। कई दोस्तों और नाते रिश्तेदारों से नये नोट की मांग कर चुका हूं, मगर सफलता बहुत कम ही मिली। हालांकि परेशानियों के बाद भी राघवराम ने नोटबंदी के निर्णय को सही ठहराया और कहा कि आगे चलकर इसका फायदा आम लोगों को ही मिलेगा।
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