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Basti News: बोगी में घुसने में दुश्वारी.. फिर सीट के लिए मारामारी

Thu, 19 Dec 2024 12:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Thu, 19 Dec 2024 12:00 AM IST
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Difficulty in entering the bogie.. then fight for the seat.
बस्ती रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ने को लेकर जद्दोजहद करते यात्री-
संवाद न्यूज एजेंसी
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बस्ती। त्योहार और लगन के बाद ट्रेनों में एक-एक सीट की छीनाझपटी शुरू हो जाती है। इस मुगालते में न रहिए कि आपका टिकट कंफर्म है तो सीट आसानी से मिल जाएगी। क्योंकि स्टेशन पर आपके साथ खेल भी हो सकता है। अचानक प्लेटफार्म बदलने की सूचना प्रसारित कर दी जाती है।
जब तक आप इस प्लेटफार्म से उस प्लेटफार्म पर जाएंगे, तब आपकी ट्रेन छूट भी सकती है। यदि ट्रेन सामने आकर खड़ी हो गई तो भीड़ को चीरकर बोगी में घुसना आसान नहीं है। सामान्य एवं आरक्षण श्रेणी की बोगियों के प्रवेश द्वार पर सामान का ढेर रख दिए जा रहे हैं, जिसे फांदकर निकलना सभी यात्रियों के बस की बात नहीं है। सीट हथियाने के लिए एसी कोच तक के गेट बंद मिल रहे हैं।
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सहालग समाप्त होते ही ट्रेनों में सीट को लेकर मारामारी शुरू हो गई है। पूरब से पश्चिम और दक्षिण को जाने वाले अधिकतर एक्सप्रेस एवं सुपरफास्ट ट्रेनों में इन दिनों जबरदस्त भीड़ है। इसकी आड़ में यात्रियों की आरक्षित सीटें हड़प ली जा रही हैं। मंगलवार को इस तरह का खेल सैकड़ों यात्रियों के साथ हो चुका है।
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बस्ती रेलवे स्टेशन पर गोरखपुर से मुंबई जा रही अंत्योदय एक्सप्रेस का सुबह 9:59 बजे प्लेटफार्म नंबर एक पर ठहराव हुआ। यहां से करीब सौ से अधिक यात्रियों को इस ट्रेन में सफर करना था। मगर, बहुत मुश्किल से गिनती के ही यात्री बोगियों में चढ़ पाए।
अधिकतर एसी और स्लीपर बोगी के गेट बंद मिले। जनरल डिब्बों के गेट खुले थे। मगर, उसमें प्रवेश द्वार पर ही सामान का ढेर लगा था।
ऊपर से यात्रियों की भीड़ थी। अकेले हल्के सामान के साथ सफर करने वाले शारीरिक रूप से मजबूत यात्री किसी तरह कूद-फांदकर ट्रेन में चढ़ गए। मगर, महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग यात्री इस दुर्गति में जूझने से अच्छा दूर हो गए। अधिकतर यात्री प्लेटफार्म पर समय से पहुंचने के बाद भी ट्रेन में सवार नहीं हो पाए।
ट्रेन जाने के घंटों बाद तक यात्रियों का हंगामा होता रहा। कुछ जानकार यात्रियों ने अपने तर्क से रेलवे व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया। रुधौली से आए दिनेश कुमार ने कहा कि एसी एवं स्लीपर बोगी की सीट हड़पने के लिए यह सब खेल चलती ट्रेनों में अक्सर होता है। इसमें जिम्मेदारों की मिलीभगत रहती है। बिहार से गोरखपुर तक आते-आते जैसी ही यात्रियों की संख्या ट्रेन में बढ़ती है लोग सीट के लिए जिम्मेदारों तक दौड़भाग शुरू कर देते हैं।
एसी में बिना कंफर्म टिकट के यात्रा करने की अनुमति नहीं है। मगर, इसमें भी पहले आए वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को खाली सीट पर बैठने का इशारा कर दिया जाता है। गोरखपुर एवं इससे आगे बढ़ने पर भीड़ गेट तक बटोर ली जाती है।

गेट भी बंद कर दिए जाते हैं। जबकि ट्रेन में टीटीई, आरपीएफ के जवान भी रहते हैं। फिर भी उन्हें अगले स्टेशन पर यात्रियों को चढ़ाने की चिंता नहीं रहती है। जानकार बताते हैं कि ज्यों- ज्यों स्टेशन पर लोगों की ट्रेन छूटती हैं उनकी सीटें मुंहमांगे कीमत पर बिक जाती है।
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