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Basti News: मेडिकल कॉलेज में रात में बढ़ी भीड़, मरीजों को हो रही परेशानी

Wed, 01 Jan 2025 11:38 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Wed, 01 Jan 2025 11:38 PM IST
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Crowd increased in medical college at night, patients are facing problems
शाम ढलने के बाद जिला अस्पताल की इमरजेंसी में शुरू हो जाता है रेफर का खेल
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। आजकल मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। रात में अक्सर यहां इमरजेंसी वार्ड मरीजों से भर जाता है। मरीज और तीमारदारों की भीड़ में कई बार अफरातफरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो जा रही है।
इसके पीछे मुख्य वजह जिला अस्पताल की इमरजेंसी से मरीजों का रेफर होना बताया जा रहा है। प्रतिदिन यहां से औसतन 15 से 20 मरीज मेडिकल कॉलेज रेफर किए जा रहे हैं। इसका सीधा फायदा दलाल उठा रहे हैं। वह तीमारदारों को गुमराह कर निजी अस्पतालों में ले जाते हैं।
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मेडिकल कॉलेज की स्थापना का यह उद्देश्य नहीं था कि जिला, तहसील एवं ब्लॉक स्तरीय अस्पतालों में इलाज करने से हाथ खड़े कर दिए जाएं। अलबत्ता गंभीर स्थिति में रोगियों को गोरखपुर और लखनऊ तक की दौड़ न लगानी पड़े, उन्हें अपने जिले में उच्च स्तरीय सुविधा के अस्पताल मुहैया हो जाए। मगर, जिले में इसका उलटा हो गया है। यहां पीएचसी, सीएचसी की बात छोड़िए जिला अस्पताल में भी मरीजों को भर्ती करने में आनाकानी की जा रही है।
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खासकर शाम ढलने के बाद यहां आने वाले मरीजों के साथ रेफर का खेल शुरू हो जाता है। तीमारदारों का आरोप है कि कुछ मरीज बिना दाखिल किए ही लौटा दिए जा रहे हैं। पेट दर्द, उल्टी-दस्त, तेज बुखार के अलावा दुर्घटनाग्रस्त होकर आने वाले मरीजों को गंभीर बताकर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन शाम ढलने के बाद 15 से 20 की संख्या में जिला अस्पताल से रेफर होने वाले मरीज आकर भर्ती हो रहे हैं।
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अक्सर फुल हो जाते हैं बेड
जिला अस्पताल में 40 और मेडिकल कॉलेज में 36 बेड का इमरजेंसी वार्ड है। जिला अस्पताल में 10 से 15 बेड अक्सर खाली रहते हैं। क्योंकि रात में यहां भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या औसतन 5 से 6 रहती है। इसके बाद मरीज रेफर कर दिए जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में 36 बेड हैं। मगर, रात में ये भर जाते हैं। कभी-कभी मरीज बढ़ने पर पहले से भर्ती मरीजों को वार्ड में शिफ्ट करना पड़ जाता है।

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कोट
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में आने वाले सभी मरीजों का उपचार किया जा रहा है। 24 घंटे इमरजेंसी में चिकित्सक मौजूद रहते हैं। उनके कॉल पर अन्य चिकित्सक भी पहुंचते हैं। गंभीर मरीज को ही रेफर किया जा रहा है। दलालों पर नजर रखी जा रही है।
-डॉ. बीके सोनकर, एसआईसी, जिला अस्पताल
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