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फिर लौटा अगिया रोग, चपेट में धान की फसल

Fri, 02 Oct 2020 11:58 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2020 11:58 PM IST
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फिर लौटा अगिया रोग, चपेट में धान की फसल
दो साल से बढ़ रहा है जिले में इस रोग का प्रकोप
उत्पादन और अनाज की गुणवत्ता पर विपरीत असर की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पिछले साल की भांति इस साल भी धान में हल्दिया (अगिया) रोग तेजी से लग रहा है। इससे अनाज के दाने खराब होने के साथ ही उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। इस रोग का प्रभावशाली इलाज अभी उपलब्ध नहीं है। हालांकि इसकी रोकथाम के उपाय किए जा सकते हैं।
कृषि विज्ञानी बताते हैं कि अगिया को अंग्रेजी मेें फाल्स स्मट कहते हैं। इसके फैलाव को लेकर तमाम वैज्ञानिक मत हैं। कुछ का मानना है कि यह बीज जनित रोग है। लेकिन कुछ इसे हवा और मिट्टी जनित भी मानते हैं। इसके लक्षण धान की बालियां फूटने की अवस्था में ही दिखने लगते हैं। शुरुआती दौर में यह पीला या धानी रंग का होता है। जो बाद में पाउडरनुमा काले रंग का हो जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. प्रेमशंकर बताते हैं कि यह रोग करीब 15 से 20 प्रतिशत तक उत्पादन पर असर डालता है। बताते हैं कि पिछले दो साल से यह जिले में अधिक मात्रा में फैल रहा है जिसका असर अनाज की गुणवत्ता और पैदावार पर साफ देखा जा सकता है। अगिया से प्रभावित अनाज को सरकारी क्रय केंद्र या व्यापारी खरीदने से पीछे हटते हैं।
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बीज शोधन से अगिया रोग लगने की संभावना कम
फसल सुुरक्षा वैज्ञानिक का कहना है कि यह धान का प्रमुख रोग है। किसान बीज भिगाते समय ही अगिया नियंत्रण का उपचार कर सकते हैं। इसके लिए 40 लीटर पानी में चार ग्राम स्ट्रेप्टो साइक्लिन या माइसिन व 100 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड मिलाकर बीज भिगाएं। बीज शोधन की यह प्रक्रिया पूरी कर लेने से अगिया लगने की संभावना कम हो जाती है।
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रोग का हो सकता है नियंत्रण
डॉ. प्रेमशंकर बताते हैं कि लगने के बाद अगिया रोग को पूर्णतया खत्म नहीं किया जा सकता है। लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है। किसान ग्रसित पौधों को सुबह के समय सावधानीपूर्वक खेत से निकलकर मिट्टी के नीचे दबा दें। इसके बाद नियंत्रण के लिए प्रॉपिकॉनाजोल दवा 200 मिली की मात्रा इतने ही पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। यह क्रम 15 दिन के बाद दोहराते रहें। ऐसा करने से अगिया रोग के फैलाव को नियंत्रित किया जा सकता है।
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