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फोटो कोच अटेंडेंट सहित चार धंधेबाज पकड़े  

Sun, 08 Jul 2018 11:27 PM IST
basti
basti Updated Sun, 08 Jul 2018 11:27 PM IST
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with coach attendent 4 held
पकड़े गए अवैध टिकट के धंधेबाज। - फोटो : amar ujala
 अमर उजाला ब्यूरो  बस्ती। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा,पंजाब, बंगाल तथा उत्तर प्रदेश के विभिन्न रेलवे स्टेशन के काउंटरों से टिकट लेकर अवैध रूप से लोगों को उपलब्ध कराने के मामले में आरपीएफ ने चार धंधेबाजों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से भारी मात्रा में रेलवे के टिकट के अलावा नकदी, मोबाइल बरामद हुई है। इन टिकटों के कोरियर का काम रेलवे कोच का एक अटेंडेंट करता था, जिसे भी पुलिस ने दबोच लिया है।   टिकट के धंधेबाज रेलवे को चूना लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। रेलवे व्यवस्था की आंख में झूल झोंककर बाहर के प्रदेशों से यहां के नेटवर्क के माध्यम से टिकट खरीद-फरोख्त का धंधा शुरू हो गया था। इसका खुलासा तब हुआ जब करीब तीन दिन पहले आरपीएफ थानेदार नरेंद्र यादव ने दो युवकों को तत्काल टिकट पर यात्रा करने से पहले दबोच लिया। इसके बाद यह तथ्य संज्ञान में आया कि जिले में यह कार्य बड़े पैमाने पर चल रहा है। इसमें शामिल कई के चेहरे बेनकाब हो गए। आरपीएफ इस रैकेट के खुलासे को लेकर लगातार प्रयास कर रही थी। रविवार की सुबह मुखबिर ने सूचना दी कि अवैध टिकट के सप्लायर ट्रेन से बस्ती आ रहे हैं। मुखबिर की निशानदेेही पर आरपीएफ ने बिहार के थाना कटिहार, ग्राम लड़कनिया निवासी कोच अटेंडेंट गुलफान, पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के रसूल नगर निवासी अजय साहू, संतकबीर नगर जिले के थाना दुधारा ग्राम कथकपुरवा निवासी जैनुल आबदीन व बाघनगर निवासी मो. हलीम को आरपीएफ टीम ने दबोचा है। इनके पास से आरपीएफ ने 102 रेल काउंटर टिकट, जिसमें 100 टिकट तत्काल श्रेणी के, जिनकी कीमत 4.08 लाख है। यह सभी टिकट महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब बंगाल तथा उत्तर प्रदेश के विभिन्न काउंटरों से निकाले गए थे। इसमें ज्यादातर टिकट बस्ती या गोरखपुर से मुंबई के लिए कुशीनगर एक्सप्रेस और एलटीटी एक्सप्रेस के हैं। इन टिकटों को ये लोग गैंग के सदस्यों को देते हैं। इसके अलावा पुलिस ने सात मोबाइल, दो बाइक व 15 हजार रुपये नकद भी बरामद किया है। पूछताछ में इन धंधेबाजों ने तीन और नाम बताए हैं, जिनकी तलाश में टीम जुटी है।  मुंबई से बंगाल तक फैला है नेटवर्क क्राइम इंटेलीजेंस ब्यूरो भी सक्रिय        काउंटर टिकट से धंधे का खेल तीन साल से  नीरज श्रीवास्तव  बस्ती। रेलवे के तत्काल टिकटों में खेल पुराना है। हैकर्स पर रेलवे की तीखी नजर के चलते अब वे अपना ट्रेंड बदल लिए। अब वे तत्काल टिकट को सीधे काउंटर से खरीद अपने नेटवर्क तक पहुंचा रहे हैं। जालसाजों का यह नेटवर्क मुंबई से बंगाल तक फैला है। इसमें कुछेक रेलवे कर्मियों व अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है।   रविवार को आरपीएफ की धर पकड़ के बाद पूछताछ में यह सब कुछ खुला है, मगर अभी इस पूरे धंधे का मास्टर माइंड पर्दे के पीछे है। आरपीएफ उसकी तलाश में जुटी है। इस तलाश में उसकी मदद क्राइम इंटेलीजेंस ब्यूरो के मुकेश कुमार भी कर रहे हैं। इनकी टीम सक्रिय हो गई है। पहली बार यह मामला आरपीएफ के चार दिन पहले तब आया जब टीम ने बस्ती से मुंबई जाने के लिए एमपी व हरियाणा से बनाए गए दो तत्काल टिकट के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया। इनसे पूछताछ में जो तथ्य सामने आए वे काफी चौंकाने वाले थे। पता चला कि इस कारोबार में दूर-दराज से आने वाले ट्रेनों के कई कोच अटेंडेंट भी शामिल हैं। इन दोनों से जो तथ्य आरपीएफ इंसपेक्टर नरेंद्र कुमार यादव को मिले उसी कड़ी को जोड़ कर रविवार को कार्रवाई हुई है। इन चार धंधेबाजों ने जो राज उगला है, उससे साफ हो गया है कि जालसाजों का यह धंधा मुंबई से लेकर बिहार, बंगाल, मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली व अन्य महानगरों तक फैला है। नेटवर्क के सदस्य टिकट चाहने वालों से मुंहमांगी कीमत लेकर 24 घंटे में ही उसे उपलब्ध करा देते हैं। टिकट पर लिखे स्थान के नाम से ही आरपीएफ इसकी पहचान करती है, क्योंकि हरियाणा से कोई भी स्वयं 24 घंटे में टिकट लेकर बस्ती अथवा गोरखपुर नहीं पहुंच सकता। इन तथ्यों के आधार की छानबीन अभी आरपीएफ इंसपेक्टर यादव के अलावा खलीलाबाद के निरीक्षक श्याम राज कर रहे हैं। खबर है कि इस बरामदगी से रेलवे के आला अफसरों की नींद उड़ गई है। ऐसे में इसके मास्टरमाइंड की तलाश में क्राइम इंटेलीजेंस ब्यूरो को भी लगा दिया गया है। आरपीएफ के थानेदार नरेंद्र यादव ने कहा कि यह रैकेट मुंबई से लेकर बिहार, पश्चिम बंगाल तक अपना नेटवर्क फैला रखा है। इस गैंग के सरगना व मास्टर माइंड का सुराग भी लग गया है। शीघ्र ही उसे दबोच लिया जाएगा।
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