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सिस्टम से हारी महिला की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 05 Sep 2016 12:31 AM IST
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गर्भवती महिला की माौत
- फोटो : अमर उजाला
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कुदरहा।सिस्टम से हारकर एक गर्भवती की जान चली गई। परिवार के लोग सरकारी अस्पताल से प्राइवेट अस्पताल तक चक्कर लगाते रहे। जिम्मेदार लोग टरकाते रहे। 108 नंबर एंबुलेंस भी नहीं मिली। नर्सेंज हड़ताल के बहाने महिला अस्पताल में भर्ती करने से इन्कार कर दिया गया। मामला कुदरहा क्षेत्र के कोलपुरा उर्फ चैनपुरा गांव का है।
गोपाल यादव की पत्नी गायत्री देवी (35 वर्ष) को दो दिन पहले शुक्रवार को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवार के लोग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुदरहा ले गए। वहां के डॉक्टर ने तत्काल जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। इसके लिए 108 नंबर एंबुलेंस को फोन किया गया। लेकिन एंबुलेंस नहीं मिली। घर वाले प्राइवेट वाहन से महिला अस्पताल लाए तो नर्सों ने भर्ती करने से इन्कार कर दिया।
घर वालों ने काफी मान मनौवल भी की लेकिन तड़प रही गर्भवती पर नर्सों ने कोई ध्यान नहीं दिया। मुफ्त में सलाह जरूर दी कि किसी दूसरे अस्पताल में ले जाएं। इस दौरान गर्भवती की हालत और खराब होने लगी। थक-हार कर परिवार वाले शहर के एक प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराए। नर्सिंगहोम में रात भर भर्ती रखने के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ। वहां के डॉक्टरों ने बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। परिवार के लोग शहर के अन्य नर्सिंग होम से संपर्क किया, लेकिन कोई महिला को भर्ती करने के लिए राजी नहीं हुआ। थक-हार कर परिवार के लोग दोबारा जिला महिला अस्पताल ले आए।
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नर्सों की हड़ताल के कारण उसे अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। परेशान परिवार के लोग गर्भवती को लेकर घर जाने लगे। पकाड़डाड़ के पास महिला ने देरशाम दम तोड़ दिया। गायत्री के तीन बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया। घटना से परिवार के लोग सदमे में हैं। वहीं यह घटना सरकार की तरफ से चलाई जा रही तमाम योजनाओं की पोल खोलती है। जो महिलाओं के सुरक्षा व रक्षा के लिए किया जा रहा है। जननी सुरक्षा, मातृत्व लाभ, हौसला पोषण योजना से महिलाओं को लाभ दिखाई नहीं दे रहा है।
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गोपाल यादव की पत्नी गायत्री देवी (35 वर्ष) को दो दिन पहले शुक्रवार को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवार के लोग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुदरहा ले गए। वहां के डॉक्टर ने तत्काल जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। इसके लिए 108 नंबर एंबुलेंस को फोन किया गया। लेकिन एंबुलेंस नहीं मिली। घर वाले प्राइवेट वाहन से महिला अस्पताल लाए तो नर्सों ने भर्ती करने से इन्कार कर दिया।
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घर वालों ने काफी मान मनौवल भी की लेकिन तड़प रही गर्भवती पर नर्सों ने कोई ध्यान नहीं दिया। मुफ्त में सलाह जरूर दी कि किसी दूसरे अस्पताल में ले जाएं। इस दौरान गर्भवती की हालत और खराब होने लगी। थक-हार कर परिवार वाले शहर के एक प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराए। नर्सिंगहोम में रात भर भर्ती रखने के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ। वहां के डॉक्टरों ने बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। परिवार के लोग शहर के अन्य नर्सिंग होम से संपर्क किया, लेकिन कोई महिला को भर्ती करने के लिए राजी नहीं हुआ। थक-हार कर परिवार के लोग दोबारा जिला महिला अस्पताल ले आए।
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नर्सों की हड़ताल के कारण उसे अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। परेशान परिवार के लोग गर्भवती को लेकर घर जाने लगे। पकाड़डाड़ के पास महिला ने देरशाम दम तोड़ दिया। गायत्री के तीन बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया। घटना से परिवार के लोग सदमे में हैं। वहीं यह घटना सरकार की तरफ से चलाई जा रही तमाम योजनाओं की पोल खोलती है। जो महिलाओं के सुरक्षा व रक्षा के लिए किया जा रहा है। जननी सुरक्षा, मातृत्व लाभ, हौसला पोषण योजना से महिलाओं को लाभ दिखाई नहीं दे रहा है।