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क्लीनिकों पर बैठाए मुखबिर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 03 May 2016 12:29 AM IST
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पुलिस रेड
- फोटो : amar ujala
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बस्ती। जिला अस्पताल से पुलिस को चकमा देकर फरार अपराधी कमलेश मांझी का अब तक पुलिस सुराग नहीं लगा पाई है। पुलिस टीमें उसके संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है। कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर चुकी है। फिर भी उसका पता नहीं चल पाया है। उसके पैर में गोली फंसी होने के कारण पुलिस को लगता है कि वह किसी न किसी डाक्टर के पास गोली निकलवाने जरूर जाएगा। ऐसे में डाक्टरों की क्लीनिकों पर मुखबिर लगा दिए हैं।
जिले के छावनी थाना क्षेत्र के गौरिया नैन गांव में 27 अप्रैल को क्राइम ब्रांच की स्वाट टीम और छावनी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गोंडा जिले के नवाबगंज थाने का हिस्ट्रीशीटर अपराधी रामकुमार यादव निवासी दुर्गागंज माझा मारा गया था। जबकि बदमाश धर्मेंद्र गुप्ता पुत्र भगवानदास निवासी लजघटा थाना छावनी बस्ती, कमलेश मांझी पुत्र सूरज पाल निवासी कौशिल्या घाट थाना रामजन्म भूमि, फैजाबाद और राजकुमार पुत्र रामसंवारे निवासी मधुकरपुर थाना परशुरामपुर मौके पर से गिरफ्तार किए गए थे। इनमें कमलेश मांझी को पैर में गोली लगी थी। उसे कोर्ट में प्रस्तुत करने के बाद पुलिस हिरासत में जिला अस्पताल भेज दिया गया। उसे डाक्टर ने मेडिकल कालेज लखनऊ रेफर कर दिया था। पुलिस उसे मेडिकल कालेज भेजने की तैयारी में थी, इसी बीच 30 अप्रैल की सुबह पुलिस को चकमा देकर वह भाग निकला। इस मामले में दो सिपाही निलंबित कर गिरफ्तार भी किए जा चुके हैं।
फरार अपराधी कमलेश मांझी को पकड़ने के लिए पुलिस जी-तोड़ प्रयास कर रही है, लेकिन उसका सुराग नहीं मिल पा रहा है। छावनी थाना क्षेत्र के मांझा में पुलिस ने कुछ लोगों हिरासत में लेकर पूछताछ भी की मगर कमलेश का कोई क्लू नहीं मिल सका। पुलिस का मानना है कि कमलेश के पैर में जो गोली लगी है, उससे प्वायजनिंग का खतरा नहीं है, उसे कुछ दिन बाद भी निकाला जा सकता है। ऐसे में कमलेश कुछ दिन तक लुका-छिपी का खेल खेल सकता है। गोली निकलवाने के लिए उसे किसी न किसी अस्पताल या चिकित्सक के पास जाना पड़ेगा। ऐसे में पुलिस की निगाहें चिकित्सकों के क्लीनिक पर भी है।
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जिले के छावनी थाना क्षेत्र के गौरिया नैन गांव में 27 अप्रैल को क्राइम ब्रांच की स्वाट टीम और छावनी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गोंडा जिले के नवाबगंज थाने का हिस्ट्रीशीटर अपराधी रामकुमार यादव निवासी दुर्गागंज माझा मारा गया था। जबकि बदमाश धर्मेंद्र गुप्ता पुत्र भगवानदास निवासी लजघटा थाना छावनी बस्ती, कमलेश मांझी पुत्र सूरज पाल निवासी कौशिल्या घाट थाना रामजन्म भूमि, फैजाबाद और राजकुमार पुत्र रामसंवारे निवासी मधुकरपुर थाना परशुरामपुर मौके पर से गिरफ्तार किए गए थे। इनमें कमलेश मांझी को पैर में गोली लगी थी। उसे कोर्ट में प्रस्तुत करने के बाद पुलिस हिरासत में जिला अस्पताल भेज दिया गया। उसे डाक्टर ने मेडिकल कालेज लखनऊ रेफर कर दिया था। पुलिस उसे मेडिकल कालेज भेजने की तैयारी में थी, इसी बीच 30 अप्रैल की सुबह पुलिस को चकमा देकर वह भाग निकला। इस मामले में दो सिपाही निलंबित कर गिरफ्तार भी किए जा चुके हैं।
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फरार अपराधी कमलेश मांझी को पकड़ने के लिए पुलिस जी-तोड़ प्रयास कर रही है, लेकिन उसका सुराग नहीं मिल पा रहा है। छावनी थाना क्षेत्र के मांझा में पुलिस ने कुछ लोगों हिरासत में लेकर पूछताछ भी की मगर कमलेश का कोई क्लू नहीं मिल सका। पुलिस का मानना है कि कमलेश के पैर में जो गोली लगी है, उससे प्वायजनिंग का खतरा नहीं है, उसे कुछ दिन बाद भी निकाला जा सकता है। ऐसे में कमलेश कुछ दिन तक लुका-छिपी का खेल खेल सकता है। गोली निकलवाने के लिए उसे किसी न किसी अस्पताल या चिकित्सक के पास जाना पड़ेगा। ऐसे में पुलिस की निगाहें चिकित्सकों के क्लीनिक पर भी है।
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