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दिमाग से लेकर जुबान तक दौड़ी केमिकल रिएक्शन
basti
Updated Fri, 03 Nov 2017 11:51 PM IST
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घ्ाटना
- फोटो : amar ujala
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बस्ती। मुंडेरवा के गन्ना विकास इंटर कॉलेज की लैब में छात्र रंजन कुमार चौरसिया के बेहोश होने और इलाज की कोशिश के बीच जान जाने के मामले में वजह भले साफ नहीं है लेकिन घटना के बाद से रात तक इस मामले में तरह-तरह के कयास चर्चाओं में रहे।
कॉलेज के अन्य विद्यार्थियों के हवाले से किसी ने रंजन के सल्फर डाई ऑक्साइड के संपर्क में आकर बेहोश होने और दम तोड़ने की बात कही तो किसी ने दावा किया कि परखनली में खतरनाक रसायन लगा था। लैब में पानी न होने के कारण रंजन नल पर परखनली धो रहा था और वहीं अचेत होकर गिर पड़ा। रंजन के बेहोश होने की जानकारी के दौरान मुंडेरवा में कॉलेज तक पहुंचे तमाम लोगों ने कॉलेज स्टाफ पर लापरवाही के आरोप लगाए। हालांकि रसायन विज्ञान के जानकारों ने इस तरह की संभावनाओं को नकार दिया। रसायन के अध्यापकों का कहना है कि साल्ट हो या गैस सल्फर डाई ऑक्साइड जानलेवा नौबत तक नहीं पहुंचाती। गैस की मात्रा बहुत ज्यादा होने से दम घुटने पर ही जान जा सकती है, जिसका असर लैब में मौजूद अन्य विद्यार्थियों पर भी पड़ता। इसके अलावा परखनली में लगे किसी भी साल्ट को धोते वक्त रिएक्शन से बेहोशी की बात को भी वैज्ञानिक सोच वाले लोग खारिज कर रहे हैं।
बांसी में रतनसेन पीजी कॉलेज से सेवानिवृत्त रसायन विज्ञान के शिक्षक डा. एसपी सिंह के मुताबिक अमोनिया की तीखी गंध के बीच बहुत ज्यादा देर रहने से मूर्च्छा आ सकती है लेकिन सामान्य तौर पर कॉलेज लैब में अमोनिया बनाने की विधि भी डायग्राम के जरिए समझाई जाती है। गैस तैयार करने के उपकरण और लंबी केमिकल प्रक्रिया लायक समय और उपकरण मौजूद नहीं होते।
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डीआईओएस बृज भूषण मौर्य का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत का कारण समझने में मदद मिलेगी। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पहले घर वालों ने किया पोस्टमार्टम से इन्कार
छात्र की मौत की असलियत जानने के लिए प्रशासन शुरुआत से पोस्टमार्टम का पक्षधर था लेकिन परिवार के लोग बमुश्किल इसके लिए रजामंद हुए। घर वालों ने शाम तक बिना पोस्टमार्टम अंत्येष्टि करने की बात कही और शव की मांग करते रहे। प्रशासन के समझाने पर राजी हुए और शनिवार को पोस्टमार्टम कराने के लिहाज से शव मोर्चरी में रखा गया। मुंडेरवा थाने के एसओ सुधीर सिंह का कहना है कि रंजन के पिता ने इस मामले में तहरीर देने से भी इन्कार कर दिया।
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कॉलेज के अन्य विद्यार्थियों के हवाले से किसी ने रंजन के सल्फर डाई ऑक्साइड के संपर्क में आकर बेहोश होने और दम तोड़ने की बात कही तो किसी ने दावा किया कि परखनली में खतरनाक रसायन लगा था। लैब में पानी न होने के कारण रंजन नल पर परखनली धो रहा था और वहीं अचेत होकर गिर पड़ा। रंजन के बेहोश होने की जानकारी के दौरान मुंडेरवा में कॉलेज तक पहुंचे तमाम लोगों ने कॉलेज स्टाफ पर लापरवाही के आरोप लगाए। हालांकि रसायन विज्ञान के जानकारों ने इस तरह की संभावनाओं को नकार दिया। रसायन के अध्यापकों का कहना है कि साल्ट हो या गैस सल्फर डाई ऑक्साइड जानलेवा नौबत तक नहीं पहुंचाती। गैस की मात्रा बहुत ज्यादा होने से दम घुटने पर ही जान जा सकती है, जिसका असर लैब में मौजूद अन्य विद्यार्थियों पर भी पड़ता। इसके अलावा परखनली में लगे किसी भी साल्ट को धोते वक्त रिएक्शन से बेहोशी की बात को भी वैज्ञानिक सोच वाले लोग खारिज कर रहे हैं।
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बांसी में रतनसेन पीजी कॉलेज से सेवानिवृत्त रसायन विज्ञान के शिक्षक डा. एसपी सिंह के मुताबिक अमोनिया की तीखी गंध के बीच बहुत ज्यादा देर रहने से मूर्च्छा आ सकती है लेकिन सामान्य तौर पर कॉलेज लैब में अमोनिया बनाने की विधि भी डायग्राम के जरिए समझाई जाती है। गैस तैयार करने के उपकरण और लंबी केमिकल प्रक्रिया लायक समय और उपकरण मौजूद नहीं होते।
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डीआईओएस बृज भूषण मौर्य का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत का कारण समझने में मदद मिलेगी। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पहले घर वालों ने किया पोस्टमार्टम से इन्कार
छात्र की मौत की असलियत जानने के लिए प्रशासन शुरुआत से पोस्टमार्टम का पक्षधर था लेकिन परिवार के लोग बमुश्किल इसके लिए रजामंद हुए। घर वालों ने शाम तक बिना पोस्टमार्टम अंत्येष्टि करने की बात कही और शव की मांग करते रहे। प्रशासन के समझाने पर राजी हुए और शनिवार को पोस्टमार्टम कराने के लिहाज से शव मोर्चरी में रखा गया। मुंडेरवा थाने के एसओ सुधीर सिंह का कहना है कि रंजन के पिता ने इस मामले में तहरीर देने से भी इन्कार कर दिया।