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अब नोटिस न मिलने का बहाना नहीं
basti
Updated Tue, 28 Mar 2017 11:26 PM IST
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पहली अप्रैल से व्यापारकर विभाग रजिस्टर्ड कारोबारियों को ऑनलाइन नोटिस भेजने की तैयारी को अंतिम रूप देने में जुटा है। नई व्यवस्था से व्यापारियों को कारोबार से संबधित नोटिस मोबाइल और ईमेल के जरिए भेजा जाएगा। इस व्यवस्था को विधिक मान्यता दी भी दी गई।
असिस्टेंट कमिश्नर व्यापारकर आलोक तिवारी ने बताया कि अब कोई कारोबारी इस बात की चुनौती नहीं दे सकता कि उसे नोटिस नहीं मिला और विभाग ने एकतरफा निर्णय कर लिया। नई व्यवस्था के तहत लिए गए निर्णय को किसी भी न्यायालय में चुनौती भी नहीं दी जा सकती है। बताया कि अगर कोई कारोबारी प्रचलित मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी विभाग में फीड नहीं कराया है, तो 31 मार्च से पहले करा लें। अन्यथा उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। व्यापारकर विभाग ने नोटिस भेजने की उस पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर दिया है, जिसमें विभाग को कोई कर्मचारी कारोबारी को खुद नोटिस प्राप्त कराने जाता था, कई बार तो नोटिस ही समय से नहीं मिलता था और विभाग एकतरफा निर्णय ले लेता था। इसके बाद में कारोबारी न्यायालय से इस बात का राहत ले लेता था कि उसे नोटिस ही नहीं मिला। इसे लेकर विभाग को कई बार कोर्ट का सामना भी करना पड़ता था। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने इलेक्ट्रॉनिकली नोटिस भेजने का सहारा लिया। सहायक आयुक्त ने बताया कि अब किसी भी व्यापारी को ऑनलाइन होना ही होगा। उसे मोबाइल और ईमेल को बराबर चेक करते रहना होगा। इसलिए आवश्यक है कि व्यापारी उसी मोबाइल और ईमेल को उपलब्ध कराए, जिसे वह प्रयोग कर रहा है।
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पहली अप्रैल से व्यापारकर विभाग रजिस्टर्ड कारोबारियों को ऑनलाइन नोटिस भेजने की तैयारी को अंतिम रूप देने में जुटा है। नई व्यवस्था से व्यापारियों को कारोबार से संबधित नोटिस मोबाइल और ईमेल के जरिए भेजा जाएगा। इस व्यवस्था को विधिक मान्यता दी भी दी गई।
असिस्टेंट कमिश्नर व्यापारकर आलोक तिवारी ने बताया कि अब कोई कारोबारी इस बात की चुनौती नहीं दे सकता कि उसे नोटिस नहीं मिला और विभाग ने एकतरफा निर्णय कर लिया। नई व्यवस्था के तहत लिए गए निर्णय को किसी भी न्यायालय में चुनौती भी नहीं दी जा सकती है। बताया कि अगर कोई कारोबारी प्रचलित मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी विभाग में फीड नहीं कराया है, तो 31 मार्च से पहले करा लें। अन्यथा उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। व्यापारकर विभाग ने नोटिस भेजने की उस पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर दिया है, जिसमें विभाग को कोई कर्मचारी कारोबारी को खुद नोटिस प्राप्त कराने जाता था, कई बार तो नोटिस ही समय से नहीं मिलता था और विभाग एकतरफा निर्णय ले लेता था। इसके बाद में कारोबारी न्यायालय से इस बात का राहत ले लेता था कि उसे नोटिस ही नहीं मिला। इसे लेकर विभाग को कई बार कोर्ट का सामना भी करना पड़ता था। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने इलेक्ट्रॉनिकली नोटिस भेजने का सहारा लिया। सहायक आयुक्त ने बताया कि अब किसी भी व्यापारी को ऑनलाइन होना ही होगा। उसे मोबाइल और ईमेल को बराबर चेक करते रहना होगा। इसलिए आवश्यक है कि व्यापारी उसी मोबाइल और ईमेल को उपलब्ध कराए, जिसे वह प्रयोग कर रहा है।
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