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जानलेवा हमले में पांच वर्ष की सजा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2016 12:34 AM IST
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बस्ती। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ अजय कुमार शाही ने समाजवादी
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नेता महेंद्रनाथ यादव पर जानलेवा हमला करने के लिए दोषी पाए गए सिद्धार्थ
सिंह उर्फ मोनू को पांच वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ में दस
हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
इसे अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। तीन अन्य आरोपियों को न्यायालय में संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया है।
शासकीय अधिवक्ता अब्दुल समद के अनुसार, छात्र संघ के चुनाव को लेकर नगर थाना क्षेत्र के भेलवल निवासी सिद्धार्थ सिंह उर्फ मोनू सिंह और कलवारी थाना क्षेत्र के गांव कलवारी एहतमाली निवासी समाजवादी नेता महेंद्रनाथ यादव से अनबन हो गई थी।
वादी मुकदमा शिवकांत त्रिपाठी निवासी सिविल लाइंस की तहरीर के अनुसार, मोनू सिंह, मोहल्ला प्रहलाद कालोनी निवासी वीर बहादुर सिंह, आवास विकास कालोनी निवासी विवेक और नगर थाना क्षेत्र के श्यामेंद्र सिंह उर्फ श्यामू एक साथ कपिलगंगा की गली में खड़े थे।
महेंद्र यादव वादी मुकदमा शिवाकांत, विवेक शुक्ल व अब्दुल रहीम, विवेक शुक्ल के मामा के घर की तरफ 23 फरवरी 2004 को सायं साथ जा रहे थे। जैसे गली में पहुंचे, मुल्जिमानों ने घेर लिया और गालियां दी। मोनू सिंह ने तमंचे से महेंद्र यादव के सीने पर फायर कर दिया।
कोतवाली में मुकदमा दर्ज होने के पश्चात आरोप पत्र दाखिल हुआ। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने माना कि अन्य आरोपियों की भूमिका साबित नहीं पाई जाती है। केवल सिद्धार्थ सिंह उर्फ मोनू को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई।
इसे अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। तीन अन्य आरोपियों को न्यायालय में संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया है।
शासकीय अधिवक्ता अब्दुल समद के अनुसार, छात्र संघ के चुनाव को लेकर नगर थाना क्षेत्र के भेलवल निवासी सिद्धार्थ सिंह उर्फ मोनू सिंह और कलवारी थाना क्षेत्र के गांव कलवारी एहतमाली निवासी समाजवादी नेता महेंद्रनाथ यादव से अनबन हो गई थी।
वादी मुकदमा शिवकांत त्रिपाठी निवासी सिविल लाइंस की तहरीर के अनुसार, मोनू सिंह, मोहल्ला प्रहलाद कालोनी निवासी वीर बहादुर सिंह, आवास विकास कालोनी निवासी विवेक और नगर थाना क्षेत्र के श्यामेंद्र सिंह उर्फ श्यामू एक साथ कपिलगंगा की गली में खड़े थे।
महेंद्र यादव वादी मुकदमा शिवाकांत, विवेक शुक्ल व अब्दुल रहीम, विवेक शुक्ल के मामा के घर की तरफ 23 फरवरी 2004 को सायं साथ जा रहे थे। जैसे गली में पहुंचे, मुल्जिमानों ने घेर लिया और गालियां दी। मोनू सिंह ने तमंचे से महेंद्र यादव के सीने पर फायर कर दिया।
कोतवाली में मुकदमा दर्ज होने के पश्चात आरोप पत्र दाखिल हुआ। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने माना कि अन्य आरोपियों की भूमिका साबित नहीं पाई जाती है। केवल सिद्धार्थ सिंह उर्फ मोनू को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई।