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बुखार से पीड़ित किशोर की जान गई
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Sun, 22 Jan 2017 11:08 PM IST
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वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के मृतक शेषनाथ। फाइल फोटो।
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मझौवा बाबा गांव की विधवा दुर्गावती पर एक बार फिर विपत्तियों का पहाड़ टूूटा है। दो साल पहले कैंसर से पति की मौत के बाद अब बुखार पीड़ित मझला बेटा भी साथ छोड़ गया। रविवार भोर लखनऊ में इलाज के दौरान मेडिकल कॉलेज में उसकी मौत हो गई।
घरवालों के मुताबिक करीब 15 दिन पहले शेषनाथ को बुखार की शिकायत हुई थी। गरीब परिवार ने स्थानीय डॉक्टरों से इलाज कराया। कोई फायदा नहीं होते देखकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सल्टौआ ले गए। पीएचसी से भी स्वास्थ्य में सुधार न हुआ तो डॉक्टरों ने जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया। यहां भी इलाज में बुखार नहीं गया और तबीयत बिगड़ती गई तो डॉक्टरों ने मेडिकल कालेज लखनऊ रेफर कर दिया। रविवार को शेष नाथ के मौत की खबर घर पहुंची तो कोहराम मच गया। मां दुर्गावती, बड़ा भाई गिरजेश, छोटा भाई भोले नाथ दहाड़े मार कर रोने लगे। गांव के लोग भी जुटे लेकिन हालात देख खुद लोग रोने लगे। रिश्तेदारों ने ढांढस बंधाया। खेतीबाड़ी और मेहनत मजदूरी से बच्चों का पालन पोषण करने वाली दुर्गावती बेसुध जैसी हालात में रही। शेषनाथ कक्षा आठ में पढ़ता था। बड़ा भाई गिरजेश भी अभी नाबालिग है। दुर्गावती की कच्ची गृहस्थी टूटते देख हर कोई किस्मत को दोष देता रहा। लोगों का कहना था कि कैंसर से पति की मौत और अब यह हादसा दुर्गावती पर विपत्तियों का पहाड़ टूट गया है।
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घरवालों के मुताबिक करीब 15 दिन पहले शेषनाथ को बुखार की शिकायत हुई थी। गरीब परिवार ने स्थानीय डॉक्टरों से इलाज कराया। कोई फायदा नहीं होते देखकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सल्टौआ ले गए। पीएचसी से भी स्वास्थ्य में सुधार न हुआ तो डॉक्टरों ने जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया। यहां भी इलाज में बुखार नहीं गया और तबीयत बिगड़ती गई तो डॉक्टरों ने मेडिकल कालेज लखनऊ रेफर कर दिया। रविवार को शेष नाथ के मौत की खबर घर पहुंची तो कोहराम मच गया। मां दुर्गावती, बड़ा भाई गिरजेश, छोटा भाई भोले नाथ दहाड़े मार कर रोने लगे। गांव के लोग भी जुटे लेकिन हालात देख खुद लोग रोने लगे। रिश्तेदारों ने ढांढस बंधाया। खेतीबाड़ी और मेहनत मजदूरी से बच्चों का पालन पोषण करने वाली दुर्गावती बेसुध जैसी हालात में रही। शेषनाथ कक्षा आठ में पढ़ता था। बड़ा भाई गिरजेश भी अभी नाबालिग है। दुर्गावती की कच्ची गृहस्थी टूटते देख हर कोई किस्मत को दोष देता रहा। लोगों का कहना था कि कैंसर से पति की मौत और अब यह हादसा दुर्गावती पर विपत्तियों का पहाड़ टूट गया है।
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