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पोल्ट्री फॉर्म पर संदिग्ध हालात में श्रमिक की मौत

Fri, 25 Mar 2016 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 25 Mar 2016 11:44 PM IST
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dead in suspicious circumstances
बाबूराम(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
बस्ती। नगर थाने के महुरइया पोखरा गांव के निकट पोल्ट्री फॉर्म पर काम कर रहे मजदूर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मजदूर के शरीर पर कई जगह चोट के निशान पाए गए हैं। परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। गांव के लोगों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। दो घंटे बाद पहुंची पुलिस ने शव को पीएम के लिए भेज दिया है। घटना से पूरे गांव में मातम का माहौल है। 
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नगर थाने के पोखरा गांव निवासी बाबूराम (40) पुत्र मग्गू बगल के महुरइया गांव के उत्तर तरफ पोल्ट्री फॉर्म पर कई महीनों से मजदूरी करता था। वह रात में भी वहीं पर रहता था। परिवारीजनों के मुताबिक, बुधवार की रात वह घर से खाना खाने के बाद पोल्ट्री फॉर्म पर सोने चला गया। रात 12 बजे उसकी पत्नी शीला के मोबाइल पर उसके साथ रह रहे संजय का फोन आया कि उसकी तबीयत खराब हो गई है। यह सुनकर गांव के और लोगों के साथ शीला महुरइया पोल्ट्री फॉर्म पर पहुंची तो वहां बाबूराम मृत अवस्था में मिला। बाद में लोग उसे जिला अस्पताल ले गए तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शव लेकर परिवार के लोग घर चले आए। 
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सुबह बाबूराम की मौत की बात पूरे गांव में फैल गई और बड़ी संख्या में लोग उसके घर पहुंच गए। उसके शरीर में गले और मुंह में चोट के निशान पाए गए और मुंह से खून आ रहा था। पत्नी शीला ने बाबूराम की हत्या का आरोप लगाया है। उसने किसी से भी दुश्मनी न होने की भी बात कही है। 
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हालांकि बाबूराम की मौत किसी के गले नहीं उतर रही है। गांव के लोगों का कहना है कि वह बेहद गरीब और सरल स्वभाव का व्यक्ति था। वह मजदूरी कर ही अपने परिवार का गुजारा करता था। शव को देखने के बाद गांव के लोगों ने घटना की सूचना सुबह 06.30 बजे गांव के लोगों ने पुलिस को दी। उसके बाद भी पुलिस दो घंटे तक घटना स्थल पर नहीं पहुंची। बाद में नगर थाने की पुलिस ने शव को पीएम के लिए भेज दिया। एसओ नगर केडी सिंह ने बताया कि शव का पीएम कराया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मामला स्पष्ट हो पाएगा।

बाबूराम की मौत से उसका परिवार टूट गया है। वही परिवार का कमाऊ सदस्य था। उसके पास खेती के नाम पर एक बिस्सा भी जमीन नहीं है।  मजदूरी करके ही वह अपने परिवार का पालन पोषण करता था। वह अपने परिवार में अकेला था। माता-पिता की मौत पहले ही हो चुकी है। वह दिन-रात मजदूरी कर किसी तरह से पेट पालता था।


उसके परिवार में पत्नी शीला जहां पति की मौत के बाद बेसहारा हो गई है। वहीं उसके पांच बच्चों का अब कोई सहारा नहीं रह गया है। उसके बच्चों में सबसे बड़ा बेटा पंकज (15), अक्षय (12) और बेटियों में मधू (10), काजल (6), मुस्कान (02) के सिर से बाप का साया हमेशा के लिए उठ गया। पत्नी और बच्चे शव से लिपटकर रो रहे थे। गांव के हर किसी के जुबान पर यही चर्चा थी कि बच्चों का अब रोटी कैसे मिलेगी।

 
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