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एक केंद्र व्यवस्थापक बदले गए, दो नकलची पकड़े

Sun, 28 Feb 2016 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 28 Feb 2016 12:24 AM IST
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बस्ती।
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बोर्ड की परीक्षा में शनिवार को हाई स्कूल के प्रथम पाली में रंजनकला की परीक्षा में डीआईओएस राजेश आर्य ने राम आसरे सिंइ इंटर कालेज सुमही गौर में दो नकलची छात्रांओं को पकड़ा। बस्ती में पहली पाली की परीक्षा में 253 छात्र और छात्राओं ने परीक्षा छोड़ा है। वहीं पर जेडीई अनिल भूषण चतुर्वेदी ने जनपद सिद्घार्थनगर के अच्युदानंद इंटर कालेज बेडाड़ी बुजुर्ग के केंद्र व्यवस्थापक को गड़बड़ी करने के आरोप में बदल दिया है।

जिले में बोर्ड परीक्षा की शुचिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। परीक्षा केंद्रों के भीतर नकल के सारे रिकॉर्ड टूट रहे हैं, तो केंद्रों के बाहर नकल माफियाओं पर नकेल कसने के दावे किए जा रहे हैं। शहर को छोड़ देहात के अधिकांश परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों के तय रकम देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। रुपये न देने पर एन केन प्रकरण उनका मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है।

जिले में बोर्ड परीक्षा के 176 केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 90 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। बोर्ड परीक्षा शुरू होने से पहले महकमा नकल विहीन परीक्षा के दावे कर रहा था। मगर उसी समय दबी जुबान में यह भी चर्चा हो रही थी कि केंद्रों के निर्धारण में धन उगाही के चलते इस बार परीक्षा केंद्रों पर नकल विहीन परीक्षा कराना आसान नहीं होगा। व्यवस्था के तहत 17 सेक्टर मजिस्ट्रेट बनाए गए।

सभी एसडीएम को जोनल मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नकल रोकने के लिए पांच सचल दस्तों का भी गठन किया गया। जेडीई के सचल दल भी परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए गठित है। नकल रोकने के नाम पर किए गए सारे इंतजामात बोर्ड परीक्षा शुरू होने के बाद ढ़ीले पड़ते नजर आ रहे हैं। सेक्टर मजिस्ट्रेटों ने परीक्षा केंद्रों पर जाना मुनासिब नहीं समझा।

परीक्षा केंद्रों पर नकल के रेट तय होने के बाद साइलेंट नकल कराई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में परीक्षा दे रहे परीक्षार्थियों से नकल की सुविधा के लिए धन की मांग की जा रही है। न देने पर उन्हे अलग कमरे में बैठाने से लेकर फेल कराने तक की धमकी दी जा रही है।

सेक्टर मजिस्ट्रेट बने उदासीन
बोर्ड परीक्षा में नकल रोकने के लिए लगाए गए सेक्टर मजिस्ट्रेट परीक्षा केंद्रों पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। 17 अधिकारी को सेक्टर मजिस्ट्रेट बनाया गया था। मगर इनमें आधे से अधिक ने परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण करने में कोई रुचि नहीं दिखाई है। सेक्टर मजिस्ट्रेट अभी भी बोर्ड परीक्षा को लेकर उदासीन बने हुए है। कुछ ने केंद्रों की सही जानकारी न होने  की बात कही है। ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि इनकी तैनाती का क्या फायदा।

शिकायतों पर हो रही कार्रवाई:डीआईओएस
डीआईओएस राजेश कुमार आर्य ने कहा कि जो भी शिकायतें मिल रहीं है, उन पर कार्रवाई की जा रही है। परीक्षा केंद्र पर वसूली के शिकायत मिली तो जांच कराई जाएगी। उन्होंने परीक्षार्थियों से कहा कि यदि कोई भी उनसे पैसा मांगता है तो वह उसकी जानकारी उन्हें दें।
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