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16 महीने बाद भी लगा रहे सरकारी पिस्टल का सुराग

Mon, 19 Jun 2017 06:51 PM IST
Updated Mon, 19 Jun 2017 06:51 PM IST
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16 महीने बाद भी लगा रहे सरकारी पिस्टल का सुराग
नेताओं की गाय-भैंस तक ढूंढ निकालने वाली पुलिस खुद की गायब हुई पिस्टल नहीं ढूंढ सकी। 16 महीने पहले पैकोलिया थाने पर तैनात दरोगा के हाथ से गायब हुई सरकारी पिस्टल के चक्कर में तीन थानेदारों को कुर्सी गंवानी पड़ी। अमानत में खयानत का मुकदमा दर्ज हुआ और दरोगा को दो महीने जेल में गुजारना पड़ा। जमानत मिली थी तो पीलीभीत तबादला कर दिया गया। थाने के दीवान कई महीने निलंबित रहे। इतना कुछ होने के बावजूद पुलिस के ‘सूरमा’ पिस्टल नहीं ढूंढ सके। इस केस के चौथे विवेचक/थानेदार राम अशीष यादव भी पूर्ववर्तियों की तरह घिसा-पिटा ‘सुराग-पतारशी’ करने वाला बयान बयां कर रहे हैं।
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10 फरवरी 2016 को पैकोलिया थाने से एक सरकारी पिस्टल नंबर -16460887 गायब होने की खबर से पुलिस महकमे में खलबली मच गई। तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ने दीवान पर जिम्मा ठेल दिया। दीवान ने बताया कि एचसीपी शेषनाथ यादव लालपुर सेंट्रल बैंक पर ड्यूटी करने जाते समय पिस्टल लेकर गए थे, मगर वापस जमा नहीं किया। उधर, नायब दरोगा ने दीवान पर आरोप मढ़ दिया कि पिस्टल पहले ही गायब थी उनको फंसाने के लिए कहानी गढ़ी गई है। अंतत: दरोगा शेषनाथ यादव और दीवान लवध्वज को लाइन हाजिर करते हुए दरोगा पर केस दर्ज हुआ। खुद को फंसता देख दरोगा थाने के आवास में रखी अपनी संदूक पर छुट्टी का प्रार्थनापत्र चस्पा करके लापता हो गया। अप्रैल 2016 में गिरफ्तार कर जेल गया। जिसमें जून में हाईकोर्ट से जमानत तो मिली लेकिन पिस्टल अब तक नहीं मिली।
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एक नजर में प्रकरण
मुकदमा नंबर-111/2016 धारा 409 आईपीसी
घटना 10 फरवरी 2016 की, 12 को एफआईआर
वादी - तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक शिव बरन यादव
आरोपी - एचसीपी (दरोगा) शेषनाथ यादव
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