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छात्रा की मौत, पुलिसिया कार्रवाई का दर्द चेहरे पर
Updated Sat, 09 Sep 2017 11:32 PM IST
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भेजे थे बेटे को पढ़ने, पहुंच गया जेल
बस्ती।
पॉलीटेक्निक छात्रा निशा चौधरी की हादसे में मौत होने के बाद बड़ा बवाल हुआ। इसकी वजह से पांच दिन तक कॉलेज बंद रहा, जो डीएम के निर्देश पर शनिवार को खुला, लेकिन कॉलेज में चहल-पहल नहीं दिखी। यहां तक कि एक भी छात्र कॉलेज नहीं पहुंचे। कॉलेज परिसर और हॉस्टल सूना रहा। वर्कशाप में मशीनों की खटपटर भी सन्नाटे की आगोश में रही। इधर, अज्ञात में दर्ज मुकदमे में कब कौन फंस जाए, यह दहशत भी लोगों के बीच कायम है। वहीं, दूसरी तरफ जो छात्र आरोपी बनाए गए और जेल में बंद हैं, उनके परिजनों की पीड़ा भी छलक उठी।
चार सितंबर की सुबह पॉलीटेक्निक चौराहे पर संतकबीरनगर के दरुआ जप्ती की रहने वाली छात्रा निशा चौधरी की मौत हादसे में हो गई थी। इसके बाद प्रशासन ने स्कूल बंद करा दिया। पुलिस ने इस मामले में 33 नामजद और 500 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। इनमें 35 छात्रों को पुलिस जेल भेज चुकी है। शनिवार को प्रशासन ने फिर से स्कूल खोलने की सहमति दे दी, मगर प्रधानाचार्य मोहम्मद मलिक सलीम अवकाश पर चले गए। प्रभारी प्रधानाचार्य आरबी सिंह की देखरेख में स्कूल का ताला खुला, जरूर लेकिन कॉलेज परिसर में हर तरफ सिर्फ सन्नाटा दिखा। स्कूल के कुछ कर्मचारी पहुंचे, लेकिन ज्यादा द्वितीय शनिवार के अवकाश के चलते छुट्टी पर ही रहे। विद्यालय प्रशासन को यकीन था कि कुछ बच्चे जरूर आएंगे, मगर एक भी छात्र नहीं आए।
छिटपुट पहुंचे कर्मचारी इस बात को लेकर भयभीत हैं कि आखिर पुलिस अज्ञात में किसको दोषी करार देगी ? दबी जुबान कर्मचारी कहते हैं कि पुलिसिया भय के चलते बच्चे स्कूल नहीं आए। छात्रावास पर ताला लटक रहा था। इनके चेहरे पर भी उन बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता की रेखाएं साफ नजर आ रही थीं कि पढ़ने वाले यह छात्र आखिर जेल में अपराधियों के बीच कैसे रात काट रहे हैं? क्योंकि यह छात्र हैं न कि अपराधी।
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घटना के एक आरोपी छात्र चंदौली निवासी अभिषेक के पिता बाबू लाल बेहद आहत थे। घटना के बारे में बताए कि कॉलेज की ओर से उन्हें बेटे के आरोपी बनाए जाने की सूचना मिली थी। उनका बेटा अभिषेक टॉपर है। हादसे के बाद उग्र हुए बच्चों पर लाठी चार्ज कर पुलिस ने उन्हें पीटा भी और गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया। बच्चा अपराधी नहीं है। बेटे के भविष्य के साथ खिलवाड़ ही कहा जाएगा।
बस्ती के निवासी पॉलीटेक्निक छात्र और आरोपी बनाए शैलेंद्र के पिता राम पलटन बताते है कि उनका बेटा निर्दोष है। बेटे को आरोपी बनाया जाना, बेटे के भविष्य के साथ मजाक है। कपड़ा सिलाई कर परिवार पालने वाले वाराणसी के अखिलेश बताते हैं कि उनके बेटे राजन राजभर को पुलिस ने बेवजह आरोपी बनाया है। वह तो कोचिंग से लौट रहा था और रास्ते में ही उसे उठा लिया गया। आगे बताया कि राजन से परिवार को बहुत उम्मीदें हैं, मगर पुलिस है कि उसे अपराधी बनाने पर आमादा है। बच्चों के साथ अन्याय किया जा रहा है। प्रधानाचार्य आरबी सिंह ने कहा कि बच्चों पर आपराधिक मामलों का मुकदमा दर्ज किया जाना ठीक नहीं है। पुलिस और प्रशासन को चाहिए कि वे पहल कर इस मामले को समाप्त करें, जिससे बच्चों का भविष्य बर्बाद न हो। एसपी संकल्प शर्मा ने बताया कि हादसे में छात्रा की मौत के बाद पुलिस थोड़ी ही देर में पहुंच गई थी। पुलिस ने उग्र छात्रों को पहले बहुत समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र नहीं माने और पथराव शुरू कर दिए। उसके बाद पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा, तब जाकर स्थिति नियंत्रण में आई। दर्ज मुकदमे में निष्पक्ष तरीके से विवेचना होगी।
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बस्ती।
पॉलीटेक्निक छात्रा निशा चौधरी की हादसे में मौत होने के बाद बड़ा बवाल हुआ। इसकी वजह से पांच दिन तक कॉलेज बंद रहा, जो डीएम के निर्देश पर शनिवार को खुला, लेकिन कॉलेज में चहल-पहल नहीं दिखी। यहां तक कि एक भी छात्र कॉलेज नहीं पहुंचे। कॉलेज परिसर और हॉस्टल सूना रहा। वर्कशाप में मशीनों की खटपटर भी सन्नाटे की आगोश में रही। इधर, अज्ञात में दर्ज मुकदमे में कब कौन फंस जाए, यह दहशत भी लोगों के बीच कायम है। वहीं, दूसरी तरफ जो छात्र आरोपी बनाए गए और जेल में बंद हैं, उनके परिजनों की पीड़ा भी छलक उठी।
चार सितंबर की सुबह पॉलीटेक्निक चौराहे पर संतकबीरनगर के दरुआ जप्ती की रहने वाली छात्रा निशा चौधरी की मौत हादसे में हो गई थी। इसके बाद प्रशासन ने स्कूल बंद करा दिया। पुलिस ने इस मामले में 33 नामजद और 500 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। इनमें 35 छात्रों को पुलिस जेल भेज चुकी है। शनिवार को प्रशासन ने फिर से स्कूल खोलने की सहमति दे दी, मगर प्रधानाचार्य मोहम्मद मलिक सलीम अवकाश पर चले गए। प्रभारी प्रधानाचार्य आरबी सिंह की देखरेख में स्कूल का ताला खुला, जरूर लेकिन कॉलेज परिसर में हर तरफ सिर्फ सन्नाटा दिखा। स्कूल के कुछ कर्मचारी पहुंचे, लेकिन ज्यादा द्वितीय शनिवार के अवकाश के चलते छुट्टी पर ही रहे। विद्यालय प्रशासन को यकीन था कि कुछ बच्चे जरूर आएंगे, मगर एक भी छात्र नहीं आए।
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छिटपुट पहुंचे कर्मचारी इस बात को लेकर भयभीत हैं कि आखिर पुलिस अज्ञात में किसको दोषी करार देगी ? दबी जुबान कर्मचारी कहते हैं कि पुलिसिया भय के चलते बच्चे स्कूल नहीं आए। छात्रावास पर ताला लटक रहा था। इनके चेहरे पर भी उन बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता की रेखाएं साफ नजर आ रही थीं कि पढ़ने वाले यह छात्र आखिर जेल में अपराधियों के बीच कैसे रात काट रहे हैं? क्योंकि यह छात्र हैं न कि अपराधी।
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घटना के एक आरोपी छात्र चंदौली निवासी अभिषेक के पिता बाबू लाल बेहद आहत थे। घटना के बारे में बताए कि कॉलेज की ओर से उन्हें बेटे के आरोपी बनाए जाने की सूचना मिली थी। उनका बेटा अभिषेक टॉपर है। हादसे के बाद उग्र हुए बच्चों पर लाठी चार्ज कर पुलिस ने उन्हें पीटा भी और गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया। बच्चा अपराधी नहीं है। बेटे के भविष्य के साथ खिलवाड़ ही कहा जाएगा।
बस्ती के निवासी पॉलीटेक्निक छात्र और आरोपी बनाए शैलेंद्र के पिता राम पलटन बताते है कि उनका बेटा निर्दोष है। बेटे को आरोपी बनाया जाना, बेटे के भविष्य के साथ मजाक है। कपड़ा सिलाई कर परिवार पालने वाले वाराणसी के अखिलेश बताते हैं कि उनके बेटे राजन राजभर को पुलिस ने बेवजह आरोपी बनाया है। वह तो कोचिंग से लौट रहा था और रास्ते में ही उसे उठा लिया गया। आगे बताया कि राजन से परिवार को बहुत उम्मीदें हैं, मगर पुलिस है कि उसे अपराधी बनाने पर आमादा है। बच्चों के साथ अन्याय किया जा रहा है। प्रधानाचार्य आरबी सिंह ने कहा कि बच्चों पर आपराधिक मामलों का मुकदमा दर्ज किया जाना ठीक नहीं है। पुलिस और प्रशासन को चाहिए कि वे पहल कर इस मामले को समाप्त करें, जिससे बच्चों का भविष्य बर्बाद न हो। एसपी संकल्प शर्मा ने बताया कि हादसे में छात्रा की मौत के बाद पुलिस थोड़ी ही देर में पहुंच गई थी। पुलिस ने उग्र छात्रों को पहले बहुत समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र नहीं माने और पथराव शुरू कर दिए। उसके बाद पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा, तब जाकर स्थिति नियंत्रण में आई। दर्ज मुकदमे में निष्पक्ष तरीके से विवेचना होगी।