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फोटो... ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्राली पलटी, दो युवकों की मौत
Updated Thu, 13 Dec 2018 11:57 PM IST
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बस्ती के गौर क्षेत्र में ठढिंयौना गांव के पास हुआ हादसा
शटरिंग का सामान लादकर गोंडा ले जा रहे थे
अमर उजाला ब्यूरो
गौर (बस्ती)। क्षेत्र के सेखुईया छितहा मार्ग मोड़ पर बृहस्पतिवार सुबह करीब नौ बजे छत की शटरिंग का सामान लादकर जा रही ट्रैक्टर-ट्राली पलटने से दो लोगों की मौत हो गई। आसपास के लोगों ने जेसीबी मंगाकर ट्राली के नीचे दबे चालक और एक युवक के शव बाहर निकाले। घटना से क्षेत्र में शोक व्याप्त है।
गौर थाना क्षेत्र के नरथरी गांव निवासी सर्वजीत चौधरी की ट्रैक्टर ट्राली पर मकान की छत लगाने के लिए शटरिंग का सामान लादकर बृहस्पतिवार सुबह गांव के धर्मेंद्र कुमार (22) गोंडा जिले के कुकनगर पहुंचाने के लिए निकले। उनके साथ चकचई गांव के विजय कुमार उर्फ पप्पू (30) भी थे। ठढ़ियौना मोड़ पर घूमते समय अचानक अनियंत्रित होकर ट्रैक्टर सड़क के किनारे खेत में पलट गया। आवाज सुनकर आसपास गांव के लोगों के अलावा क्षेत्र के तमाम लोगों की भीड़ जुट गई। किसी को अनुमान नहीं था कि नीचे कितने लोग दबे होंगे। ग्रामीणों की सूचना पर प्रभारी निरीक्षक गौर राम समुझ प्रभाकर साथियों के साथ दुर्घटनास्थल पर पहुंचे और दोनों शवों को बाहर निकलवाया। दुर्घटना की जानकारी होते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया।
ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट से युवक की मौत
सल्टौआ-मानिकचंद मार्ग पर ईंट भट्ठे के पास दुर्घटना
अमर उजाला ब्यूरो
मानिकचंद। वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के सल्टौआ-मानिकचंद मार्ग पर ईंट भट्ठे के पास दुर्घटना में युवक गंभीर घायल हो गया। अस्पताल में दम तोड़ दिया। ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में बाइक आने से दुर्घटना हुई है।
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बुधवार की देर रात बसडिलिया निवासी इरशाद अहमद (17) पुत्र मुर्शरफ बाइक से बनकसिया से लौट रहा था। सल्टौआ मानिकचन्द मार्ग से घर आने के दौरान ईंट भट्ठे के पास गन्ना लदी ट्रॉली से टकरा गया। हेलमेट नहीं होने के चलते सिर में भी गंभीर चोट लगी। हादसे के बाद उधर से गुजर रहे आसपास के लोगों ने सड़क से उठाकर किनारे किया और 108 एंबुलेंस और डॉयल 100 पुलिस को सूचना दी। घटना की जानकारी परिवार के लोगों को दी गई। थोड़ी ही देर में मौके पर पहुंची एंबुलेंस से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सल्टौआ पहुंचाया गया। जहां हालत गम्भीर देखकर डॉक्टर ने जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान इरशाद ने दम तोड़ दिया। शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिवार वालों को सौंप दिया गया। शाम की नमाज के बाद गांव के कब्रिस्तान में दफन कर दिया गया। घर वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। इरशाद तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। मिलनसार स्वाभाव होने के कारण पूरा गांव शोक संतृप्त है। 15 दिसंबर को मुंबई जाने के लिए टिकट बुक कराया था लेकिन दो दिन पहले दुर्घटना का शिकार हो गया।
ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आया बाइक चालक
बभनान-हलुवा मार्ग पर बेलवरिया के पास हादसा
जिला अस्पताल से लखनऊ ट्रामा सेंटर के लिए रेफर
अमर उजाला ब्यूरो
बभनान। हलुवा मार्ग स्थित बेलवरिया चौराहे के पास तेज रफ्तार बाइक चालक ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आ गया। हेलमेट नहीं होने से गंभीर घायल बाइक चालक को जिला अस्पताल से लखनऊ ट्रॉमा सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक कोमा में चला गया है।
दुर्घटना बुधवार रात बेलवरिया चौराहे के पास हुई। गौर थाना क्षेत्र के रानीपुर बाबू निवासी उमेश चौहान (16) पुत्र राम हिरन किसी काम से हलुवा किस तरफ जा रहा था। अभी वह बेलवरिया चौराहे के समीप गन्ना क्रय केंद्र के कुछ आगे पहुंचा ही था कि अचानक सामने से ट्रैक्टर ट्रॉली आ गई जिसमें वह टकरा गया। हेलमेट नहीं होने की वजह से युवक के सिर में गंभीर चोट लगी। घटनास्थल पर ही वह बेहोश हो गया। परिवार के लोगों ने आनन-फानन जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां से चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के साथ ही ट्रॉमा सेंटर मेडिकल कॉलेज लखनऊ के लिए रेफर कर दिया। भाई कमलेश चौहान ने बताया की उमेश एचएलबी इंटर कॉलेज हलुवा में कक्षा 10 में पढ़ाई करता है। तीन भाइयों में उमेश सबसे छोटा है। डॉक्टरों का कहना है की कोमा से बाहर आने में समय लग सकता है।
साइड स्टोरी
फोटो...
हड़बड़ी में हाथ से छूट रही जिंदगी की डोर
तरकीब से संभलती है लोड ट्रैक्टर-ट्रॉली
अक्सर इससे हो रहीं घटनाएं, नहीं ले रहे सबक
राम ललित यादव
गौर (बस्ती)। ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने की क्षेत्र की दो साल के भीतर यह तीसरी घटना है। मगर लोगों ने सबक नहीं लिया। दिन हो या रात, हाईवे पर चौतरफा ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली मौत बनकर दौड़ रही हैं। इन पर न रिफ्लेक्टर लगे होते हैं और न ही रेडियम। ज्यादातर ट्रैक्टर चालकों के पास लाइसेंस तक नहीं होता। किशोरों को भी इसकी स्टीयरिंग संभाले देखा जा सकता है। यही कारण है कि आएदिन दुर्घटनाएं होती हैं। इसके बावजूद यातायात विभाग अनदेखी करता रहता है।
बृहस्पतिवार को घटनास्थल पर जुटी भीड़ में इसे लेकर सबसे ज्यादा चर्चाएं सुनीं गईं। लोगों का कहना है कि खेत और पगडंडी सड़क पर चलने वाले ट्रैक्टर ट्रॉली को चमचमाती पिच सड़कों पर कार व बोलेरो की तरह फर्राटा भरने के चक्कर में जान गंवा दे रहे हैं तो कुछ लोगों का यह भी मानना है कि अधिकतर परिवार के लोग शौक में बच्चों को स्टीयरिंग पकड़ा देते हैं।
फिटनेस न डीएल
अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रॉली का फिटनेस कभी चेक नहीं होता। कोई कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले बुलंद हैं। कई वाहनों पर नंबर तक नहीं लिखे होते हैं। सुरक्षात्मक के मापदंड इनके लिए बेमानी हैं। इनमें बैक लाइट व हेडलाइट भी खराब रहती हैं। रिफ्लेक्टर, ट्रॉलियों में बैक लाइट जैसी सावधानी का मतलब तक नहीं जानते। रात में पीछे चलने वाले वाहन से हादसे की संभावना बनी रहती है।
स्पीकअप...
लोग बोले: हादसों से नहीं लेते सबक
गोनहा गांव के बुद्धिराम का कहना है कि ट्रैक्टर चालक न तो ठीक से ब्रेक लगाना जानते हैं और न ही मोड़ने का तरीका पता होता है। खासकर गन्ना ढोने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लापरवाही सबसे ज्यादा देखी जा रही है।
छितहा गांव के पवन कुमार कहते हैं कि लोग अपने कम उम्र के किशोरवय को ट्रैक्टर की स्टीयरिंग थमा देते हैं। उन्हें न तो यातायात नियम की जानकारी रहती है न ही अचानक संभालने की तरकीब पता होती है।
नजर मोहम्मद निवासी छितहा कहते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में शादी-विवाह के समय टेंट आदि ढोने में ओवरलोड सामान लादकर कम उम्र वाले वाहन चलाते देखे जाते हैं। इससे इस तरह के हादसे हो रहे हैं।
चंद्रशेखर मानते हैं कि खेतों की जुताई एवं मिट्टी कार्य करने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग किया जाता है। वही चालक मुख्य सड़कों पर जब वाहन लेकर पहुंचते हैं तो दूसरों के भी मुसीबत बन जाते हैं।
अनाड़ी को डीएल यानी बंदर के हाथ अस्तूरा
सिलेबस से उलट है मोटर स्कूल का प्रशिक्षण
क्लच-ब्रेक के तरीके बता कर देते हैं सर्टिफिकेट
वीरेंद्र पांडेय
बस्ती। वाहन चलाने की अच्छी ट्रेनिंग लेनी है तो यहां कोई स्कूल नहीं मिलेगा। जो स्कूल हैं भी उनके पास न तो ड्राइविंग में दक्ष बनाने के संसाधन हैं न ही फील्ड उपलब्ध है। मॉडिफाइड कारों पर क्लच-ब्रेक लगाने के तरीके सिखा कर प्रशिक्षण का सर्टिफिकेट दे देते हैं।
फोरलेन पर इमरजेंसी ब्रेक लगाने, डीपर की अहमियत बताए बिना प्रमाणपत्र मिल जाते हैं जबकि बाकायदा अधिनियम में सिलेबस निर्धारित है। मल्टी लग्जरी व हाईब्रिड कारों की स्टीयरिंग अनाड़ी ड्राइवर के हाथ होती है। 50-60 टन वजन लादकर 80-100 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से फर्राटा भरने वाली लारी (20-24 चक्का ट्रक) चलाने वाला भी अक्सर तकनीकी रूप से अनाड़ी होते हैं। इसका परिणाम दुर्घटना ही है। जिले में 80 किमी से अधिक फोर लेन व 60 किमी टूलेन हाईवे है। यहां हर हफ्ते औसतन तीन-चार मौतें और 30 से 35 मुसाफिरों के घायल होने का आंकड़ा सामान्य है। हाल के तीन वर्ष के बीच हुए हादसों में 154 मौत और पांच सौ से ज्यादा लोगों के घायल होने का आंकड़ा देखकर किसी को भी पसीना छूटने लगते हैं। डीएम डॉ. राजशेखर का कहना है कि नियमानुसार स्कूल का संचालन न करने को गंभीरता से लिया जाएगा। इसके लिए प्रशासन जल्द उपाय करेगा।
ऐसे होना है टेस्ट
फिजिकल ड्राइविंग टेस्ट में अप्वाइंटमेंट लेकर परिवहन विभाग ड्राइविंग टेस्ट देना पड़ता है। यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा से संबंधित 10 सवाल भी पूछे जाते हैं। इसमें छह का जवाब देना जरूरी है। लाइसेंस संबंधी फॉर्म-5 भरकर रजिस्टर्ड अथॉरिटी के पास जमा करेंगे। ड्राइविंग स्कूल में लिए गए दाखिले का रजिस्ट्रेशन नंबर, रजिस्ट्रेशन की तारीख, ट्रेनिंग की अवधि और प्रशिक्षण पूरा करने का सर्टिफिकेट भी देना होगा। पुराने डीएल का रिन्यू करवाने से पहले भी आवेदक को किसी ड्राइविंग स्कूल में दो दिन का प्रशिक्षण लेना है।
अपडेट हुए वाहन, चालक जस के तस
वाहन तकनीकी के जानकार दीपक सिंह बताते हैं कि सड़क हादसों के लिए ड्राइवरों को टेक्निकली अपडेट न करना सबसे बड़ी वजह है। एडवांस ब्रेक सिस्टम एबीएस, इमरजेंसी नोटिफिकेशन ही नहीं सेफ्टी टिप्स के बारे में अनभिज्ञ रहने की वजह से एकाएक सामने कोई खतरा आने पर ड्राइवर वाहन से नियंत्रण खो बैठता है। नतीजतन, जो हादसा टाला जा सकता था, उसमें भी जान-ओ-माल दोनों का नुकसान सहना पड़ रहा है।
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शटरिंग का सामान लादकर गोंडा ले जा रहे थे
अमर उजाला ब्यूरो
गौर (बस्ती)। क्षेत्र के सेखुईया छितहा मार्ग मोड़ पर बृहस्पतिवार सुबह करीब नौ बजे छत की शटरिंग का सामान लादकर जा रही ट्रैक्टर-ट्राली पलटने से दो लोगों की मौत हो गई। आसपास के लोगों ने जेसीबी मंगाकर ट्राली के नीचे दबे चालक और एक युवक के शव बाहर निकाले। घटना से क्षेत्र में शोक व्याप्त है।
गौर थाना क्षेत्र के नरथरी गांव निवासी सर्वजीत चौधरी की ट्रैक्टर ट्राली पर मकान की छत लगाने के लिए शटरिंग का सामान लादकर बृहस्पतिवार सुबह गांव के धर्मेंद्र कुमार (22) गोंडा जिले के कुकनगर पहुंचाने के लिए निकले। उनके साथ चकचई गांव के विजय कुमार उर्फ पप्पू (30) भी थे। ठढ़ियौना मोड़ पर घूमते समय अचानक अनियंत्रित होकर ट्रैक्टर सड़क के किनारे खेत में पलट गया। आवाज सुनकर आसपास गांव के लोगों के अलावा क्षेत्र के तमाम लोगों की भीड़ जुट गई। किसी को अनुमान नहीं था कि नीचे कितने लोग दबे होंगे। ग्रामीणों की सूचना पर प्रभारी निरीक्षक गौर राम समुझ प्रभाकर साथियों के साथ दुर्घटनास्थल पर पहुंचे और दोनों शवों को बाहर निकलवाया। दुर्घटना की जानकारी होते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया।
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ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट से युवक की मौत
सल्टौआ-मानिकचंद मार्ग पर ईंट भट्ठे के पास दुर्घटना
अमर उजाला ब्यूरो
मानिकचंद। वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के सल्टौआ-मानिकचंद मार्ग पर ईंट भट्ठे के पास दुर्घटना में युवक गंभीर घायल हो गया। अस्पताल में दम तोड़ दिया। ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में बाइक आने से दुर्घटना हुई है।
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बुधवार की देर रात बसडिलिया निवासी इरशाद अहमद (17) पुत्र मुर्शरफ बाइक से बनकसिया से लौट रहा था। सल्टौआ मानिकचन्द मार्ग से घर आने के दौरान ईंट भट्ठे के पास गन्ना लदी ट्रॉली से टकरा गया। हेलमेट नहीं होने के चलते सिर में भी गंभीर चोट लगी। हादसे के बाद उधर से गुजर रहे आसपास के लोगों ने सड़क से उठाकर किनारे किया और 108 एंबुलेंस और डॉयल 100 पुलिस को सूचना दी। घटना की जानकारी परिवार के लोगों को दी गई। थोड़ी ही देर में मौके पर पहुंची एंबुलेंस से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सल्टौआ पहुंचाया गया। जहां हालत गम्भीर देखकर डॉक्टर ने जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान इरशाद ने दम तोड़ दिया। शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिवार वालों को सौंप दिया गया। शाम की नमाज के बाद गांव के कब्रिस्तान में दफन कर दिया गया। घर वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। इरशाद तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। मिलनसार स्वाभाव होने के कारण पूरा गांव शोक संतृप्त है। 15 दिसंबर को मुंबई जाने के लिए टिकट बुक कराया था लेकिन दो दिन पहले दुर्घटना का शिकार हो गया।
ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आया बाइक चालक
बभनान-हलुवा मार्ग पर बेलवरिया के पास हादसा
जिला अस्पताल से लखनऊ ट्रामा सेंटर के लिए रेफर
अमर उजाला ब्यूरो
बभनान। हलुवा मार्ग स्थित बेलवरिया चौराहे के पास तेज रफ्तार बाइक चालक ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आ गया। हेलमेट नहीं होने से गंभीर घायल बाइक चालक को जिला अस्पताल से लखनऊ ट्रॉमा सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक कोमा में चला गया है।
दुर्घटना बुधवार रात बेलवरिया चौराहे के पास हुई। गौर थाना क्षेत्र के रानीपुर बाबू निवासी उमेश चौहान (16) पुत्र राम हिरन किसी काम से हलुवा किस तरफ जा रहा था। अभी वह बेलवरिया चौराहे के समीप गन्ना क्रय केंद्र के कुछ आगे पहुंचा ही था कि अचानक सामने से ट्रैक्टर ट्रॉली आ गई जिसमें वह टकरा गया। हेलमेट नहीं होने की वजह से युवक के सिर में गंभीर चोट लगी। घटनास्थल पर ही वह बेहोश हो गया। परिवार के लोगों ने आनन-फानन जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां से चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के साथ ही ट्रॉमा सेंटर मेडिकल कॉलेज लखनऊ के लिए रेफर कर दिया। भाई कमलेश चौहान ने बताया की उमेश एचएलबी इंटर कॉलेज हलुवा में कक्षा 10 में पढ़ाई करता है। तीन भाइयों में उमेश सबसे छोटा है। डॉक्टरों का कहना है की कोमा से बाहर आने में समय लग सकता है।
साइड स्टोरी
फोटो...
हड़बड़ी में हाथ से छूट रही जिंदगी की डोर
तरकीब से संभलती है लोड ट्रैक्टर-ट्रॉली
अक्सर इससे हो रहीं घटनाएं, नहीं ले रहे सबक
राम ललित यादव
गौर (बस्ती)। ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने की क्षेत्र की दो साल के भीतर यह तीसरी घटना है। मगर लोगों ने सबक नहीं लिया। दिन हो या रात, हाईवे पर चौतरफा ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली मौत बनकर दौड़ रही हैं। इन पर न रिफ्लेक्टर लगे होते हैं और न ही रेडियम। ज्यादातर ट्रैक्टर चालकों के पास लाइसेंस तक नहीं होता। किशोरों को भी इसकी स्टीयरिंग संभाले देखा जा सकता है। यही कारण है कि आएदिन दुर्घटनाएं होती हैं। इसके बावजूद यातायात विभाग अनदेखी करता रहता है।
बृहस्पतिवार को घटनास्थल पर जुटी भीड़ में इसे लेकर सबसे ज्यादा चर्चाएं सुनीं गईं। लोगों का कहना है कि खेत और पगडंडी सड़क पर चलने वाले ट्रैक्टर ट्रॉली को चमचमाती पिच सड़कों पर कार व बोलेरो की तरह फर्राटा भरने के चक्कर में जान गंवा दे रहे हैं तो कुछ लोगों का यह भी मानना है कि अधिकतर परिवार के लोग शौक में बच्चों को स्टीयरिंग पकड़ा देते हैं।
फिटनेस न डीएल
अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रॉली का फिटनेस कभी चेक नहीं होता। कोई कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले बुलंद हैं। कई वाहनों पर नंबर तक नहीं लिखे होते हैं। सुरक्षात्मक के मापदंड इनके लिए बेमानी हैं। इनमें बैक लाइट व हेडलाइट भी खराब रहती हैं। रिफ्लेक्टर, ट्रॉलियों में बैक लाइट जैसी सावधानी का मतलब तक नहीं जानते। रात में पीछे चलने वाले वाहन से हादसे की संभावना बनी रहती है।
स्पीकअप...
लोग बोले: हादसों से नहीं लेते सबक
गोनहा गांव के बुद्धिराम का कहना है कि ट्रैक्टर चालक न तो ठीक से ब्रेक लगाना जानते हैं और न ही मोड़ने का तरीका पता होता है। खासकर गन्ना ढोने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लापरवाही सबसे ज्यादा देखी जा रही है।
छितहा गांव के पवन कुमार कहते हैं कि लोग अपने कम उम्र के किशोरवय को ट्रैक्टर की स्टीयरिंग थमा देते हैं। उन्हें न तो यातायात नियम की जानकारी रहती है न ही अचानक संभालने की तरकीब पता होती है।
नजर मोहम्मद निवासी छितहा कहते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में शादी-विवाह के समय टेंट आदि ढोने में ओवरलोड सामान लादकर कम उम्र वाले वाहन चलाते देखे जाते हैं। इससे इस तरह के हादसे हो रहे हैं।
चंद्रशेखर मानते हैं कि खेतों की जुताई एवं मिट्टी कार्य करने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग किया जाता है। वही चालक मुख्य सड़कों पर जब वाहन लेकर पहुंचते हैं तो दूसरों के भी मुसीबत बन जाते हैं।
अनाड़ी को डीएल यानी बंदर के हाथ अस्तूरा
सिलेबस से उलट है मोटर स्कूल का प्रशिक्षण
क्लच-ब्रेक के तरीके बता कर देते हैं सर्टिफिकेट
वीरेंद्र पांडेय
बस्ती। वाहन चलाने की अच्छी ट्रेनिंग लेनी है तो यहां कोई स्कूल नहीं मिलेगा। जो स्कूल हैं भी उनके पास न तो ड्राइविंग में दक्ष बनाने के संसाधन हैं न ही फील्ड उपलब्ध है। मॉडिफाइड कारों पर क्लच-ब्रेक लगाने के तरीके सिखा कर प्रशिक्षण का सर्टिफिकेट दे देते हैं।
फोरलेन पर इमरजेंसी ब्रेक लगाने, डीपर की अहमियत बताए बिना प्रमाणपत्र मिल जाते हैं जबकि बाकायदा अधिनियम में सिलेबस निर्धारित है। मल्टी लग्जरी व हाईब्रिड कारों की स्टीयरिंग अनाड़ी ड्राइवर के हाथ होती है। 50-60 टन वजन लादकर 80-100 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से फर्राटा भरने वाली लारी (20-24 चक्का ट्रक) चलाने वाला भी अक्सर तकनीकी रूप से अनाड़ी होते हैं। इसका परिणाम दुर्घटना ही है। जिले में 80 किमी से अधिक फोर लेन व 60 किमी टूलेन हाईवे है। यहां हर हफ्ते औसतन तीन-चार मौतें और 30 से 35 मुसाफिरों के घायल होने का आंकड़ा सामान्य है। हाल के तीन वर्ष के बीच हुए हादसों में 154 मौत और पांच सौ से ज्यादा लोगों के घायल होने का आंकड़ा देखकर किसी को भी पसीना छूटने लगते हैं। डीएम डॉ. राजशेखर का कहना है कि नियमानुसार स्कूल का संचालन न करने को गंभीरता से लिया जाएगा। इसके लिए प्रशासन जल्द उपाय करेगा।
ऐसे होना है टेस्ट
फिजिकल ड्राइविंग टेस्ट में अप्वाइंटमेंट लेकर परिवहन विभाग ड्राइविंग टेस्ट देना पड़ता है। यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा से संबंधित 10 सवाल भी पूछे जाते हैं। इसमें छह का जवाब देना जरूरी है। लाइसेंस संबंधी फॉर्म-5 भरकर रजिस्टर्ड अथॉरिटी के पास जमा करेंगे। ड्राइविंग स्कूल में लिए गए दाखिले का रजिस्ट्रेशन नंबर, रजिस्ट्रेशन की तारीख, ट्रेनिंग की अवधि और प्रशिक्षण पूरा करने का सर्टिफिकेट भी देना होगा। पुराने डीएल का रिन्यू करवाने से पहले भी आवेदक को किसी ड्राइविंग स्कूल में दो दिन का प्रशिक्षण लेना है।
अपडेट हुए वाहन, चालक जस के तस
वाहन तकनीकी के जानकार दीपक सिंह बताते हैं कि सड़क हादसों के लिए ड्राइवरों को टेक्निकली अपडेट न करना सबसे बड़ी वजह है। एडवांस ब्रेक सिस्टम एबीएस, इमरजेंसी नोटिफिकेशन ही नहीं सेफ्टी टिप्स के बारे में अनभिज्ञ रहने की वजह से एकाएक सामने कोई खतरा आने पर ड्राइवर वाहन से नियंत्रण खो बैठता है। नतीजतन, जो हादसा टाला जा सकता था, उसमें भी जान-ओ-माल दोनों का नुकसान सहना पड़ रहा है।