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Basti News: गबन के 39 साल पुराने मामले में आरोपी को 7 वर्ष की सजा
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बस्ती। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम उमेश यादव की अदालत ने 39 साल पहले साधन सहकारी समिति लिमिटेड दुबौलिया में गबन करने के मामले के आरोपी तत्कालीन सचिव ध्रुवचन्द्र त्रिपाठी को सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने 6 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर 3 माह 15 दिन की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी ।
अभियोजन अधिकारी सुधीर कुमार व पंकज गौतम ने अदालत को बताया कि 4 दिसंबर 1984 को में ब्लाक के सहायक विकास अधिकारी एमपी वर्मा ने दुबौलिया थाना में तहरीर दिया। उसमें कहा कि ध्रुवचंद्र त्रिपाठी निवासी ग्राम माली मेनहा, थाना डुमरियागंज, जिला सिद्धार्थनगर 12 दिसंबर 1983 तक साधन सहकारी समिति दुबौलिया बाजार के सचिव थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सरकारी धन का गबन किया है कई किसानों के नाम से धन को आहरित करते हुए 9460 रुपये का गबन कर लिया है।
सहायक विकास अधिकारी की शिकायत पर 5 दिसंबर 1984 को मुकदमा पंजीकृत किया गया। विवेचना के बाद प्रथम दृष्टया आरोप सही पाते हुए पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। लंबे समय तक पत्रावली सुनवाई में चलती रही वर्तमान अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुराना मामला होने के आधार पर तेजी से कार्रवाई करते हुए मामले की सुनवाई किया। सुनवाई के बाद आरोपी सचिव ध्रुवचंद्र त्रिपाठी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
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अभियोजन अधिकारी सुधीर कुमार व पंकज गौतम ने अदालत को बताया कि 4 दिसंबर 1984 को में ब्लाक के सहायक विकास अधिकारी एमपी वर्मा ने दुबौलिया थाना में तहरीर दिया। उसमें कहा कि ध्रुवचंद्र त्रिपाठी निवासी ग्राम माली मेनहा, थाना डुमरियागंज, जिला सिद्धार्थनगर 12 दिसंबर 1983 तक साधन सहकारी समिति दुबौलिया बाजार के सचिव थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सरकारी धन का गबन किया है कई किसानों के नाम से धन को आहरित करते हुए 9460 रुपये का गबन कर लिया है।
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सहायक विकास अधिकारी की शिकायत पर 5 दिसंबर 1984 को मुकदमा पंजीकृत किया गया। विवेचना के बाद प्रथम दृष्टया आरोप सही पाते हुए पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। लंबे समय तक पत्रावली सुनवाई में चलती रही वर्तमान अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुराना मामला होने के आधार पर तेजी से कार्रवाई करते हुए मामले की सुनवाई किया। सुनवाई के बाद आरोपी सचिव ध्रुवचंद्र त्रिपाठी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
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