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उपभोक्ता से हर जगह ठगी : रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 11 Jan 2016 12:35 AM IST
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बस्ती। जिले का उपभोक्ता हर दिन और हर जगह ठगी का शिकार हो रहा है। कहीं
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उसे सोना चांदी वाले घटतौली कर ठग रहे तो कहीं पेट्रोल पंप वाले कम तेल
देकर चूना लगा रहे हैं। उपभोक्ता सबसे अधिक रोज मर्रा के सामानों की खरीद
में ठगा जा रहा है।
उपभोक्ताओं को ठगी से बचाने के लिए सरकार और विभाग के पास कोई कारगर योजना नहीं है। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी संसाधनों और सुरक्षा न मिलने का रोना रो रहे हैं। जिसका लाभ घटतौली करने वाले उठा रहे हैं। उपभोक्ताओं के ठगे जाने का खुलासा बाट-माप विभाग की रिपोर्ट से हुआ। दिसंबर में ही घटतौली के मामले में 42 कोटेदार, गन्ना क्रय केंद्र, आटा चक्की, सर्राफ, कपड़ा व्यवसायी, मिठाई और पेट्रोल पंप वाले पकड़े गए।
जुर्माने के रूप में इन व्यवसायियों से 45 हजार की रकम वसूली गई। वैसे पिछले नौ महीने में ठगी के 384 मामले पकड़े गए। उसमें पांच लाख 46 हजार रुपये से अधिक की रकम अर्थ दंड के रूप में वसूली की गई।
जिले के 24 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को घटतौली से बचाने के लिए सरकार ने माप बाट विभाग की स्थापना की है। मगर यह विभाग उपभोक्ताओं को ठगी से बचाने के बजाए संसाधनों और सुरक्षा न मिलने का रोना रो रहा है। बस्ती में प्रवर्तन दल के रूप में एक वरिष्ठ निरीक्षक विधिक माप और एक सहायक के रूप में कार्यरत है। इन दोनों को जब कभी कार्रवाई करनी होती है तो दोनों एक ही मोटर साइकिल से निकल जाते हैं।
वाहन के नाम पर इस विभाग में कोई सरकारी वाहन नहीं है। इस कमी का भरपूर लाभ ठगी करने वाले उठा रहे हैं। हाल ही में जब कमिश्नर ने इस विभाग के अधिकारियों से कहा कि टोल नाका पर लगे धर्मकांटा की जांच करे, तक जाकर गोरखपुर और बस्ती के लोंगो ने कार्रवाई की। धर्मकांटे के माप में कमी पाई गई, जिसके चलते पांच हजार जुर्माना और 18 हजार रुपये कांटा सही करने के रूप में कुल 23 हजार वसूला गया। आवास विकास कालोनी के उपभोक्ता मनीष श्रीवास्तव, पुरानी बस्ती के महेश चंद्र, गांधीनगर के राजेंद्र मोदी और रोहन का कहना है कि माप बाट विभाग की लापरवाही और कार्रवाई न करने के कारण के उपभोक्ता रोज ठगे जा रहे हैं। ठगी का शिकार राहगीर से लेकर चार पहिया वाले शिकार हो रहे हैं।
नियमित कार्रवाई की जा रही : शाही
वरिष्ठ निरीक्षक विधिक माप अरुण कुमार शाही ने बताया कि घटतौली के मामले में नियमित कार्रवाई की जा रही है। पिछले वर्ष से अधिक राजस्व की वसूली इसका सबूत है। बताया कि 51.70 लाख लक्ष्य के सापेक्ष दिसंबर तक 34.61 लाख रुपये की वसूली हो चुकी है, जो कि पिछले वर्ष के सापेक्ष दो लाख रुपये से अधिक है। बताया कि अगर संसाधन और सुरक्षा की व्यवस्था हो जाए तो काफी हद तक उपभोक्ताओं को ठगी से बचाया जा सकता है।
उपभोक्ताओं को ठगी से बचाने के लिए सरकार और विभाग के पास कोई कारगर योजना नहीं है। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी संसाधनों और सुरक्षा न मिलने का रोना रो रहे हैं। जिसका लाभ घटतौली करने वाले उठा रहे हैं। उपभोक्ताओं के ठगे जाने का खुलासा बाट-माप विभाग की रिपोर्ट से हुआ। दिसंबर में ही घटतौली के मामले में 42 कोटेदार, गन्ना क्रय केंद्र, आटा चक्की, सर्राफ, कपड़ा व्यवसायी, मिठाई और पेट्रोल पंप वाले पकड़े गए।
जुर्माने के रूप में इन व्यवसायियों से 45 हजार की रकम वसूली गई। वैसे पिछले नौ महीने में ठगी के 384 मामले पकड़े गए। उसमें पांच लाख 46 हजार रुपये से अधिक की रकम अर्थ दंड के रूप में वसूली की गई।
जिले के 24 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को घटतौली से बचाने के लिए सरकार ने माप बाट विभाग की स्थापना की है। मगर यह विभाग उपभोक्ताओं को ठगी से बचाने के बजाए संसाधनों और सुरक्षा न मिलने का रोना रो रहा है। बस्ती में प्रवर्तन दल के रूप में एक वरिष्ठ निरीक्षक विधिक माप और एक सहायक के रूप में कार्यरत है। इन दोनों को जब कभी कार्रवाई करनी होती है तो दोनों एक ही मोटर साइकिल से निकल जाते हैं।
वाहन के नाम पर इस विभाग में कोई सरकारी वाहन नहीं है। इस कमी का भरपूर लाभ ठगी करने वाले उठा रहे हैं। हाल ही में जब कमिश्नर ने इस विभाग के अधिकारियों से कहा कि टोल नाका पर लगे धर्मकांटा की जांच करे, तक जाकर गोरखपुर और बस्ती के लोंगो ने कार्रवाई की। धर्मकांटे के माप में कमी पाई गई, जिसके चलते पांच हजार जुर्माना और 18 हजार रुपये कांटा सही करने के रूप में कुल 23 हजार वसूला गया। आवास विकास कालोनी के उपभोक्ता मनीष श्रीवास्तव, पुरानी बस्ती के महेश चंद्र, गांधीनगर के राजेंद्र मोदी और रोहन का कहना है कि माप बाट विभाग की लापरवाही और कार्रवाई न करने के कारण के उपभोक्ता रोज ठगे जा रहे हैं। ठगी का शिकार राहगीर से लेकर चार पहिया वाले शिकार हो रहे हैं।
नियमित कार्रवाई की जा रही : शाही
वरिष्ठ निरीक्षक विधिक माप अरुण कुमार शाही ने बताया कि घटतौली के मामले में नियमित कार्रवाई की जा रही है। पिछले वर्ष से अधिक राजस्व की वसूली इसका सबूत है। बताया कि 51.70 लाख लक्ष्य के सापेक्ष दिसंबर तक 34.61 लाख रुपये की वसूली हो चुकी है, जो कि पिछले वर्ष के सापेक्ष दो लाख रुपये से अधिक है। बताया कि अगर संसाधन और सुरक्षा की व्यवस्था हो जाए तो काफी हद तक उपभोक्ताओं को ठगी से बचाया जा सकता है।