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Basti News: मुआवजे की प्रक्रिया तेज, किसानों की जमीन का जुटाया जा रहा ब्योरा
Thu, 02 Jan 2025 12:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 02 Jan 2025 12:04 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। श्रीराम की नगरी अयोध्या से जोड़ने वाले 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर पड़ने वाले गांवों के किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। जिन गांवों के किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका है, वहां भूमि आधिपत्य और हाईवे अथॉरिटी की टीम नवैयत देखने पहुंची।
मंगलवार को संसारपुर और दुफेड़ी बुधवार को मजगवां पाठक और नेदुला गांव के किसानों से टीम ने बातचीत की। मौके पर अधिग्रहित की जाने वाली भूमि की नवैयत देखी गई। ग्रामीणों से टीम के सदस्यों ने बताया कि जल्द मुआवजे की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
असल में मुआवजे में कई तरह की दुश्वारियां हैं। किसी का मुआवजा बनाने में छूट गया है तो किसी को सही जानकारी न होने से भागदौड़ करनी पड़ रही है। खासकर थ्री-ए की प्रक्रिया से छूटे किसानों को सबसे ज्यादा समस्या झेलनी पड़ रही है।
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क्योंकि मुआवजा बनाने की प्रक्रिया काफी उलझाऊ है। ग्राम मजगवां पाठक के सूर्य प्रकाश बताते हैं कि उनका गांव प्रथम चरण के गजट में छूट गया था। किसी तरह से गजट हो गया। मगर, उसके बाद की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है। इससे मुआवजे में काफी देरी हो रही है।
दुखेड़ी गांव के पारस नाथ का कहना कि जिनकी जमीन तन्हा है, उन्हें मुआवजा मिल रहा है। जबकि, संयुक्त खाताधारकों को दौड़ाया जा है। उनका कहना है कि लेखपाल सभी को एक साथ आने की बात कहते हैं।
इसमें समस्या यह है कि गांव में सभी का आपस में इतना अच्छा तालमेल नहीं होता है कि वे एक साथ एकत्र हो जाएं। एक घर में यदि तीन-चार भाइयों के नाम से जमीन है तो उनका मुआवजा भी फंसा हुआ है। बरसांव गांव के संतोष पांडेय बताते हैं कि कई विसंगतियां अभी भी बरकरार हैं।
संसारपुर निवासी प्रहलाद तिवारी और परमानंद तिवारी ने बताया कि उनकी जमीन पर डेढ़ बीघा मे सागौन का पेड़ लगा हुआ है।
उसी प्लाट से होकर परिक्रमा मार्ग बनना है। टीम आई थी तो उनसे पूछा गया। मगर, किस तरह पेड़ों का मुआवजा मिलेगा, इसकी जानकारी नहीं दी।
परमानंद तिवारी का कहना है कि उनके पेड़ों की लंबाई तीन-चार फीट हो चुकी है। आठ-दस साल में इन पेड़ों की अच्छी कीमत मिलती। मगर, सड़क के लिए क्या मुआवजा
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बस्ती। श्रीराम की नगरी अयोध्या से जोड़ने वाले 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर पड़ने वाले गांवों के किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। जिन गांवों के किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका है, वहां भूमि आधिपत्य और हाईवे अथॉरिटी की टीम नवैयत देखने पहुंची।
मंगलवार को संसारपुर और दुफेड़ी बुधवार को मजगवां पाठक और नेदुला गांव के किसानों से टीम ने बातचीत की। मौके पर अधिग्रहित की जाने वाली भूमि की नवैयत देखी गई। ग्रामीणों से टीम के सदस्यों ने बताया कि जल्द मुआवजे की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
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असल में मुआवजे में कई तरह की दुश्वारियां हैं। किसी का मुआवजा बनाने में छूट गया है तो किसी को सही जानकारी न होने से भागदौड़ करनी पड़ रही है। खासकर थ्री-ए की प्रक्रिया से छूटे किसानों को सबसे ज्यादा समस्या झेलनी पड़ रही है।
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क्योंकि मुआवजा बनाने की प्रक्रिया काफी उलझाऊ है। ग्राम मजगवां पाठक के सूर्य प्रकाश बताते हैं कि उनका गांव प्रथम चरण के गजट में छूट गया था। किसी तरह से गजट हो गया। मगर, उसके बाद की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है। इससे मुआवजे में काफी देरी हो रही है।
दुखेड़ी गांव के पारस नाथ का कहना कि जिनकी जमीन तन्हा है, उन्हें मुआवजा मिल रहा है। जबकि, संयुक्त खाताधारकों को दौड़ाया जा है। उनका कहना है कि लेखपाल सभी को एक साथ आने की बात कहते हैं।
इसमें समस्या यह है कि गांव में सभी का आपस में इतना अच्छा तालमेल नहीं होता है कि वे एक साथ एकत्र हो जाएं। एक घर में यदि तीन-चार भाइयों के नाम से जमीन है तो उनका मुआवजा भी फंसा हुआ है। बरसांव गांव के संतोष पांडेय बताते हैं कि कई विसंगतियां अभी भी बरकरार हैं।
संसारपुर निवासी प्रहलाद तिवारी और परमानंद तिवारी ने बताया कि उनकी जमीन पर डेढ़ बीघा मे सागौन का पेड़ लगा हुआ है।
उसी प्लाट से होकर परिक्रमा मार्ग बनना है। टीम आई थी तो उनसे पूछा गया। मगर, किस तरह पेड़ों का मुआवजा मिलेगा, इसकी जानकारी नहीं दी।
परमानंद तिवारी का कहना है कि उनके पेड़ों की लंबाई तीन-चार फीट हो चुकी है। आठ-दस साल में इन पेड़ों की अच्छी कीमत मिलती। मगर, सड़क के लिए क्या मुआवजा