{"_id":"9824a5028b5f2a5e134f5868b82b8948","slug":"committed-to-cow-development-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"यज्ञ कर गौ रक्षा संवर्धन का संकल्प लिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यज्ञ कर गौ रक्षा संवर्धन का संकल्प लिया
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Dec 2015 12:15 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बस्ती। श्री गौशाला कठार जंगल में मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर गौरक्षा संवर्धन
विज्ञापन
के लिए हवन किया गया। गौ संवर्द्धन के लिए वेद मंत्रों से आहुतियां दी गईं।
यज्ञ के बाद ओम प्रकाश आर्य ने विधि विधान से गौ पूजन किया। गाय को घास
खिलाते हुए कहा कि हम सबको गौ माता की सेवा तन मन धन से करनी चाहिए तभी हम
खुशहाल होंगे। गाय के बचने से ही गांव और कृषि बच सकेगी।
देवव्रत आर्य ने कहा कि गाय भारत की श्रद्धा है, इसीलिए इसे माता व देवता कहते हैं। क्षेत्रवासियों से उन्होंने सहयोग की अपील की। सुल्तानपुर से आए भजनोपदेशक राममगन आर्य ने भजनों के माध्यम से गाय के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक सभी विषयों पर चर्चा की।
उन्होने कहा कि हमारे धर्मग्रंथों के साथ गोरक्षा को भारत के सभी महापुरुषों ने श्रेष्ठ एवं सर्वोत्तम बताया है। गोरक्षा एवं गो पालन करना मनुष्य मात्र का कर्त्तव्य है। मुख्य वक्ता रवीन्द्र आर्य ने बताया कि इसके दूध, घी, मूत्र तथा गोवर से प्रजा का पालन होता है तथा संतान से कृषि कार्य होता है। गाय के घी से देवता पितर सब तृप्त होते हैं।
गाय का दूध व घी शीतकाल में अमृत तुल्य है अर्थराइटिस, गठिया, अरुचि, विषम ज्वर, मोटापा, बवासीर, सूजन, खॉसी आदि रोगों को दूर करने में समर्थ है। गाय के दूध में केरोटीन नामक पीला पदार्थ होता है जो स्वर्ण अंश माना जाना है और ऑखों की रोशनी बढ़ाता है।
गोघृत जलाने से निकलने वाली गैसे अशुद्ध वायु को अपनी ओर खींचकर शुद्ध करती है। कर्नल केसी मिश्र ने गाय रक्षा से कृषि रक्षा का उपाय बताया। गाय का गोबर और गोमूत्र रासायनिक खादों का बेहतर विकल्प है इसका उपयोग करके अधिकाधिक उत्पादन भी किया जा सकता है।
संचालन करते हुए गरुणध्वज पाण्डेय ने बताया कि देशी नस्ल की गाय का दूध रोगनाशक है। जबकि विदेशी गाय का दूध रोगकारक है यह विद्वानों के अध्ययन से स्पष्ट हो चुका है। प्रधान न्यासी सुधीर कुमार अग्रवाल व चंद्रशेखर मिश्र ने सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में आरसी त्रिपाठी, हरिशंकर त्रिपाठी, श्रवण कुमार, नवल किशोर चौधरी, त्रियुगी नारायण चौधरी, गणेश आर्य, विश्वनाथ, रवि प्रकाश, सत्य नारायण, झिनकान चौधरी आदि मौजूद रहे।
देवव्रत आर्य ने कहा कि गाय भारत की श्रद्धा है, इसीलिए इसे माता व देवता कहते हैं। क्षेत्रवासियों से उन्होंने सहयोग की अपील की। सुल्तानपुर से आए भजनोपदेशक राममगन आर्य ने भजनों के माध्यम से गाय के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक सभी विषयों पर चर्चा की।
उन्होने कहा कि हमारे धर्मग्रंथों के साथ गोरक्षा को भारत के सभी महापुरुषों ने श्रेष्ठ एवं सर्वोत्तम बताया है। गोरक्षा एवं गो पालन करना मनुष्य मात्र का कर्त्तव्य है। मुख्य वक्ता रवीन्द्र आर्य ने बताया कि इसके दूध, घी, मूत्र तथा गोवर से प्रजा का पालन होता है तथा संतान से कृषि कार्य होता है। गाय के घी से देवता पितर सब तृप्त होते हैं।
गाय का दूध व घी शीतकाल में अमृत तुल्य है अर्थराइटिस, गठिया, अरुचि, विषम ज्वर, मोटापा, बवासीर, सूजन, खॉसी आदि रोगों को दूर करने में समर्थ है। गाय के दूध में केरोटीन नामक पीला पदार्थ होता है जो स्वर्ण अंश माना जाना है और ऑखों की रोशनी बढ़ाता है।
गोघृत जलाने से निकलने वाली गैसे अशुद्ध वायु को अपनी ओर खींचकर शुद्ध करती है। कर्नल केसी मिश्र ने गाय रक्षा से कृषि रक्षा का उपाय बताया। गाय का गोबर और गोमूत्र रासायनिक खादों का बेहतर विकल्प है इसका उपयोग करके अधिकाधिक उत्पादन भी किया जा सकता है।
संचालन करते हुए गरुणध्वज पाण्डेय ने बताया कि देशी नस्ल की गाय का दूध रोगनाशक है। जबकि विदेशी गाय का दूध रोगकारक है यह विद्वानों के अध्ययन से स्पष्ट हो चुका है। प्रधान न्यासी सुधीर कुमार अग्रवाल व चंद्रशेखर मिश्र ने सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में आरसी त्रिपाठी, हरिशंकर त्रिपाठी, श्रवण कुमार, नवल किशोर चौधरी, त्रियुगी नारायण चौधरी, गणेश आर्य, विश्वनाथ, रवि प्रकाश, सत्य नारायण, झिनकान चौधरी आदि मौजूद रहे।