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बदला मौसम, सर्दी जुकाम के बढ़े मरीज
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बदला मौसम, सर्दी-जुकाम के बढ़े मरीज
सर्दी-जुकाम व निमोनिया के 30 से 40 मरीज रोज आ रहे जिला अस्पताल
बस्ती। अब दिन में मौसम गर्म व रात में ठंड बढ़ गई है। इसका असर सर्वाधिक बच्चों पर है। क्योंकि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे मौसम में बच्चों को वायरल डिजीज होने की आशंका बढ़ जाती है। जिला अस्पताल व महिला अस्पताल डॉक्टरों की मानें तो संक्रामक रोगों का समय समाप्त हो गया है। अब सर्दी जुकाम व खासी के मरीज अधिक आ रहे हैं।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सरफराज का कहना है कि इस मौसम में बीमारियां कम हो जाती हैं, लेकिन ठंड के चलते बच्चों पर प्रभाव अधिक होता है। उन्हें बचाकर नहीं रखा गया तो जुकाम सर्दी व निमोनिया की चपेट में आ सकते हैं। इन दिनों ज्यादातर इसी बीमारी से ग्रसित मरीज आ रहे हैं। इनकी संख्या 30 से 40 है। इनमें से 10-12 गंभीर होते हैं। फिजीशियन डॉ. रामजी सोनी कहते हैं कि यह मौसम सांस संबंधी बीमारियों वाले लोगों के लिए खासा कष्टकारी है। मौसम बदल रहा है। इसके चलते ऐसे लोग एहतियात बरतें। संक्रामक रोग के मरीज अब न के बराबर आ रहे हैं। वायरल फीवर के अलावा खांसी व सर्दी-जुकाम वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इस मौसम में हो सके तो लोग रात में पंखा आदि न चलाएं। यह मौसम संवेदनशील है।
महिला चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीके श्रीवास्तव ने बच्चों के लिए इस मौसम को खतरनाक बताया। कहा कि इस मौसम में बच्चों को बीमारी से बचाने के लिए खूब पानी पिलाएं, प्रोटीन युक्त भोजन दें। पानी अधिक पीने से शरीर की क्षमता के साथ गर्मी बनी रहती है। एसआईसी डॉ. आलोक कुमार वर्मा ने कहा कि मौसम को देखते हुए अस्पताल ने तैयारी पूरी कर रखी है। बुखार व सर्दी-जुकाम की भरपूर दवाएं उपलब्ध हैं। निमोनिया व अन्य सामान्य बीमारियों के लिए भी अस्पताल में दवाएं हैं। चिल्ड्रेन वार्ड में 25 से 30 मरीज ही भर्ती हो रहे हैं। उनकी देखरेख की पूरी व्यवस्था बनाई गई है।
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सर्दी-जुकाम व निमोनिया के 30 से 40 मरीज रोज आ रहे जिला अस्पताल
बस्ती। अब दिन में मौसम गर्म व रात में ठंड बढ़ गई है। इसका असर सर्वाधिक बच्चों पर है। क्योंकि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे मौसम में बच्चों को वायरल डिजीज होने की आशंका बढ़ जाती है। जिला अस्पताल व महिला अस्पताल डॉक्टरों की मानें तो संक्रामक रोगों का समय समाप्त हो गया है। अब सर्दी जुकाम व खासी के मरीज अधिक आ रहे हैं।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सरफराज का कहना है कि इस मौसम में बीमारियां कम हो जाती हैं, लेकिन ठंड के चलते बच्चों पर प्रभाव अधिक होता है। उन्हें बचाकर नहीं रखा गया तो जुकाम सर्दी व निमोनिया की चपेट में आ सकते हैं। इन दिनों ज्यादातर इसी बीमारी से ग्रसित मरीज आ रहे हैं। इनकी संख्या 30 से 40 है। इनमें से 10-12 गंभीर होते हैं। फिजीशियन डॉ. रामजी सोनी कहते हैं कि यह मौसम सांस संबंधी बीमारियों वाले लोगों के लिए खासा कष्टकारी है। मौसम बदल रहा है। इसके चलते ऐसे लोग एहतियात बरतें। संक्रामक रोग के मरीज अब न के बराबर आ रहे हैं। वायरल फीवर के अलावा खांसी व सर्दी-जुकाम वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इस मौसम में हो सके तो लोग रात में पंखा आदि न चलाएं। यह मौसम संवेदनशील है।
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महिला चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीके श्रीवास्तव ने बच्चों के लिए इस मौसम को खतरनाक बताया। कहा कि इस मौसम में बच्चों को बीमारी से बचाने के लिए खूब पानी पिलाएं, प्रोटीन युक्त भोजन दें। पानी अधिक पीने से शरीर की क्षमता के साथ गर्मी बनी रहती है। एसआईसी डॉ. आलोक कुमार वर्मा ने कहा कि मौसम को देखते हुए अस्पताल ने तैयारी पूरी कर रखी है। बुखार व सर्दी-जुकाम की भरपूर दवाएं उपलब्ध हैं। निमोनिया व अन्य सामान्य बीमारियों के लिए भी अस्पताल में दवाएं हैं। चिल्ड्रेन वार्ड में 25 से 30 मरीज ही भर्ती हो रहे हैं। उनकी देखरेख की पूरी व्यवस्था बनाई गई है।
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