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Basti News: सावधान...ब्रांडेड के नाम पर बाजार में नकली सामानों की भरमार

Thu, 11 Dec 2025 02:01 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 11 Dec 2025 02:01 AM IST
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Beware...the market is flooded with fake goods in the name of branded goods.
बस्ती। ब्रांडेड के नाम पर बाजार में नकली सामानों की भरमार हो गई है। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले साबून, सर्फ, रिफाइंड व सरसों का तेल और कॉफी हर चीज बाजार में डुप्लीकेट उपलब्ध है। लोग समझ नहीं पा रहे हैं वे क्या खाएं और क्या न खाएं। सोमवार की रात रुधौली में पकड़ी गई फॉर्च्यून ब्रांड की नकली रिफाइंड तेल की खेप के बाद हड़कंप मचा हुआ है। इसके बावजूद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग इस पर रोक लगाने में नाकाम है।
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सूत्र बताते हैं कि खुदरा बाजार से लेकर थोक मंडी तक धंधेबाजों का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। यह ब्रांडेड कंपनियों के डीलरों के समानांतर नकली सामग्रियों का भी धंधा संचालित करने में सफल है। शहर की थोक मंडी पांडेय बाजार और सुर्तीहट्टा इसका हब बताया जाता है। जहां कच्चे मॉल से रिफाइंड व सरसों के तेल तक तैयार किए जा रहे हैं। कुछ धंधेबाजों की सेटिंग गोरखपुर के साहबगंज मंडी के नकली उत्पादकों से हैं। वहां से थोक में ब्रांडेड पैकेट बंद डुप्लीकेट सरसों तेल और रिफाइंड मंगाए जा रहे हैं। जिसे फुटकर दुकानदारों के यहां सस्ते दर पर असली बताकर सप्लाई कर दिया जा रहा है।
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सबसे ज्यादा झोल टीम बंद रिफाइंड, डालडा और सरसों तेल में है। ब्रांडेड कंपनियों के मोहर, डिजाइन में ही डुप्लीकेट मॉल टीन में सील पैक करके पहुंचाया जा रहा है। जिसके डुप्लीकेट होने की पहचान आसानी से नहीं की जा सकती है। चकमा देने के लिए इसमें कुछ ब्रांडेड कंपनियों के असली टीन के डिब्बे भी मिला दिए जाते हैं। इसी तरह साबून, सर्फ, ठंडा तेल, नमकीन आदि भी ब्रांडेड कंपनियों का डुप्लीकेट तैयार कर दिया जा रहा है।
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जानकार बताते हैं कि धंधेबाज ब्रांडेड कंपनियों का पैकेट, रैपर और बार कोड कानपुर से बल्क में मंगवा लेते हैं। मिलावटी सामग्री तैयार करने के बाद उसे ब्रांड के पैकेट में पैक करके खुदरा बाजार में सप्लाई कर दी जा रही है। जानकारों के अनुसार इसमें विभागीय मिलीभगत भी रहती है। इसीलिए थोक बाजार के गोदामों में चेकिंग की कार्रवाई नहीं होती है।
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बेसन, मैदा, मिठाई भी पहुंचाया जा रहा डुप्लीकेट
कानपुर, दिल्ली से बेसन, मैदा, सूखी मिठाई सोन पापड़ी, बेसन लड्डू भी ब्रांडेड कंपनियों के नाम पैकेट बंद आकर्षक लिफाफों में पैक करके बल्क में मंगाया जा रहा है। आम दुकानदार इसकी पहचान किए गए बगैर छूट के प्रलोभन में आकर इसे खरीदकर ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं। इसी तरह डुप्लीकेट पोहा, चायपत्ती, माइक्रोनी, नूडल्स आदि भी ब्रांडेड कंपनियों के रैपर में पैक करके बाजार में बड़ी मात्रा में खपा दिए जा रहे हैं। बड़े शॉपिंग मॉल में यह खेल दूसरे तरह से संचालित किया जा रहा है। ग्राहक साधना बताती है कि पिछले दिनों उन्होंने एक मॉल से नूडल्स और पोहा छूट के ऑफर पर खरीदकर घर लाया। बनाने उसका स्वाद बिगड़ा हुआ था। लिफाफे पर ध्यान से देखा तो एक्सपायरी डेट मिटा दिया गया था। एक्सपायरी होने की वजह से ही ऐसे सामग्रियों पर छूट का प्रलोभन देकर आम ग्राहकों के हाथ उसे बेच दिया जा रहा है।
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कप्तानगंज में पकड़ा गया था नकली टॉयलेट क्लीनर हार्पिक
पिछले दिनों कप्तानगंज में नकली हार्पिक की बड़ी खेप पकड़ी गई थी। जांच पड़ताल में पता चला कि धंधेबाज इसका खाली डिब्बा कानपुर शहर से बनवाकर मंगाते हैं। फिर इसमें डिटर्जेंट, शैंपू और रंगों का इस्तेमाल करके नकली लिक्विड तैयार करते हैं। जिसे हारपिक के डिब्बे में पैक करके सस्ते दर पर बेचते थे। इस धंधे के खुलासे के बाद आम लोग सजग हो गए। अब छोटी एवं अपरिचित दुकानों से इसकी खरीदारी नहीं करते हैं। पिकौरा शिवगुलाम की रहने वाली सोनी बताती है कि नकली हार्पिक से वाशरूम की सफाई करने पर सफेदी की जगह कालापन आ जाता है। यह हार्पिक के नकली होने की सबसे बड़ी पहचान है।
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कंपनी के अधिकृत डीलरों की सक्रियता से पकड़ में आता है मामला
डुप्लीकेट सामग्रियों की धरपकड़ करने में खाद्य सुरक्षा की टीम हर बार फेल हो जाती है। बाजार में जब इसकी भनक कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि या डीलर को लगती है तो वह सक्रिय होते हैं। उन्हीं की सक्रियता से डुप्लीकेट सामग्रियों की खेप बाजार या गोदाम से पकड़ी जाती है। एक दिन पहले रुधौली में फार्च्यून रिफाइंड की धर पकड़ अधिकृत डीलर की सक्रियता की वजह से हुई। इसी तरह कप्तानगंज में नकली हार्पिक की खेप भी कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि की सक्रियता की वजह से हुई थी। इसी तरह बाजार में फिनॉयल, नील, टीनोपॉल, कॉस्मेटिक सामग्री में शुमार क्रीम, ठंडा तेल भी डुप्लीकेट तैयार करके बड़े पैमाने पर खपाया जा रहा है।

कोट
डुप्लीकेट सामग्रियों को बाजार में खपाए जाने की सटीक जानकारी होने पर छापेमारी की जाती है। सूचना सही होने पर कार्रवाई भी होती है। ऐसे पता लगाना कठिन होता है। यदि आम ग्राहक को कहीं डुप्लीकेट सामग्री मिलने की आशंका हो तो वह तत्काल विभाग को अवगत कराए।
-चितरंजन कुमार, अभिहित अधिकारी।
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