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Basti News: जमीन बेचकर मिले रुपये बैंक खाते में फंसे, दंपती के क्रिया-कर्म मे दिक्कत
Mon, 02 Oct 2023 12:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 02 Oct 2023 12:35 AM IST
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बैंक खाते में फंसे जमीन बेचकर मिले रुपये, दंपती के क्रियाकर्म के लाले
- ब्रम्हभोज के लिए सरकारी सहायता की राह ताक रहे परिवार वाले
- कागजी औपचारिकताओं को पूरा हुए बिना योजनाओं का नहीं मिलेगा लाभ
- एसबीआई के खाते में मृतक के नाम जमा हैं जमीन बेचकर मिले पांच लाख रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
रुधौली/ बस्ती। दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों में खुदकुशी करने वाले रुधौली नगर पंचायत के दंपती के क्रिया कर्म के लाले पड़ गये हैं। परिवार वालों के पास इतने भी रुपये नहीं हैं कि वे दंपती की आत्मा की शांति के लिए सामाजिक परंपरा का निर्वाह कर पाएं। मृतक के भाई का कहना है कि उसका परिवार फिलहाल क्रियाकर्म व ब्रम्हभोज में आने वाला खर्च उठाने की स्थिति में नहीं है। थाने में केस दर्ज कराने वाले मृतक के भाई ने बताया कि जब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिल जाती, तब तक वे लोग क्रियाकर्म करने में असमर्थ हैं।
मृतक के खाते में जमीन बेचकर मिले पांच लाख रुपये जमा हैं लेकिन उसे विधिक प्रक्रिया पूरी हुए बिना निकाला नहीं जा सकता है। इसके लिए पहले तहसील प्रशासन की तरफ से मृतक का वारिस तय कराना पड़ेगा। परिवार रजिस्टर और तहसील के अभिलेख में भी वारिस का नाम दर्ज कराना पड़ेगा। तहसील से वारिस प्रमाणपत्र जारी होने के बाद ही रुपये निकाले जा सकेंगे। चूंकि मृतक का मौजूदा वारिस उसका नाबालिग बेटा है, इसलिए नाबालिग के संरक्षक या अधिकृत अभिभावक ही उस रकम को निकाल सकेगा। बैंक अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है। हालांकि मृतक दंपति के परिजनों व बच्चों को कई तरह की योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन औपचारिकताओं के पूरा न हो पाने की वजह से उनके हाथ में किसी भी योजना की रकम अभी नहीं पहुंची है। एसडीएम गिरीश कुमार झा ने बताया कि तहसील की तरफ से वह जल्दी से जल्दी सभी औपचारिकताओं को पूरी कराने की कोशिश कर रहे हैं।
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26 सितंबर को होना चाहिए था क्रियाकर्म
मृतक की सामाजिक परंपराओं के अनुसार वैसे तो अंतिम संस्कार के 16वें दिन क्रियाकर्म-ब्रम्हभोज किया जाता है। मृतक के भाई ने बताया कि चूंकि दंपती का शव जलाने के बजाए जमीन में दफन किया गया था,इसालिए उनमें त्रिरात्रि किए जाने की परंपरा है। यानी तीन रात्रि के बाद ब्रम्हभोज आदि करते हैं। दंपती के शव को 23 सितंबर को दफन किया गया था। इस तरह से 26 सितंबर को ही क्रियाकर्म आदि कर देना चाहिए था। पर मजबूरी में वे लोग ऐसा नहीं कर पाए।
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सहायता का इंतजार
तहसील प्रशासन की तरफ से मृतक के परिवार को मुख्यमंत्री विवेकाधीन सहायता कोष से लाभान्वित करने के लिए संस्तुति की गई है। इसके अलावा समाज कल्याण की ओर से राष्ट्रीय पारिवारिक योजना का लाभ दिया जाना है। रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत 10 लाख तक का मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है, जिसे पुलिस के न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल करने के बाद जारी किया जाएगा। दोनों के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने के बाद जिला समाज कल्याण की ओर से दोनों बच्चों को ढाई हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलेगा।
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घर में लगा ताला, मंझले बेटे के संरक्षण में पिता
दंपती की मौत के बाद से उसके घर में ताला लग गया है। उसके दोनों नाबालिग बेटे और वृद्ध पिता मंझले बेटे के पास चले गए हैं। वैसे तो दोनों बच्चों के संरक्षण और पालन-पोषण का जिम्मा उसके सबसे बड़े भाई ने उठाने का निर्णय लिया है। मगर मौजूदा समय में दोनों बच्चे अपने मंझले चाचा के पास हैं।
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- ब्रम्हभोज के लिए सरकारी सहायता की राह ताक रहे परिवार वाले
- कागजी औपचारिकताओं को पूरा हुए बिना योजनाओं का नहीं मिलेगा लाभ
- एसबीआई के खाते में मृतक के नाम जमा हैं जमीन बेचकर मिले पांच लाख रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
रुधौली/ बस्ती। दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों में खुदकुशी करने वाले रुधौली नगर पंचायत के दंपती के क्रिया कर्म के लाले पड़ गये हैं। परिवार वालों के पास इतने भी रुपये नहीं हैं कि वे दंपती की आत्मा की शांति के लिए सामाजिक परंपरा का निर्वाह कर पाएं। मृतक के भाई का कहना है कि उसका परिवार फिलहाल क्रियाकर्म व ब्रम्हभोज में आने वाला खर्च उठाने की स्थिति में नहीं है। थाने में केस दर्ज कराने वाले मृतक के भाई ने बताया कि जब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिल जाती, तब तक वे लोग क्रियाकर्म करने में असमर्थ हैं।
मृतक के खाते में जमीन बेचकर मिले पांच लाख रुपये जमा हैं लेकिन उसे विधिक प्रक्रिया पूरी हुए बिना निकाला नहीं जा सकता है। इसके लिए पहले तहसील प्रशासन की तरफ से मृतक का वारिस तय कराना पड़ेगा। परिवार रजिस्टर और तहसील के अभिलेख में भी वारिस का नाम दर्ज कराना पड़ेगा। तहसील से वारिस प्रमाणपत्र जारी होने के बाद ही रुपये निकाले जा सकेंगे। चूंकि मृतक का मौजूदा वारिस उसका नाबालिग बेटा है, इसलिए नाबालिग के संरक्षक या अधिकृत अभिभावक ही उस रकम को निकाल सकेगा। बैंक अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है। हालांकि मृतक दंपति के परिजनों व बच्चों को कई तरह की योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन औपचारिकताओं के पूरा न हो पाने की वजह से उनके हाथ में किसी भी योजना की रकम अभी नहीं पहुंची है। एसडीएम गिरीश कुमार झा ने बताया कि तहसील की तरफ से वह जल्दी से जल्दी सभी औपचारिकताओं को पूरी कराने की कोशिश कर रहे हैं।
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26 सितंबर को होना चाहिए था क्रियाकर्म
मृतक की सामाजिक परंपराओं के अनुसार वैसे तो अंतिम संस्कार के 16वें दिन क्रियाकर्म-ब्रम्हभोज किया जाता है। मृतक के भाई ने बताया कि चूंकि दंपती का शव जलाने के बजाए जमीन में दफन किया गया था,इसालिए उनमें त्रिरात्रि किए जाने की परंपरा है। यानी तीन रात्रि के बाद ब्रम्हभोज आदि करते हैं। दंपती के शव को 23 सितंबर को दफन किया गया था। इस तरह से 26 सितंबर को ही क्रियाकर्म आदि कर देना चाहिए था। पर मजबूरी में वे लोग ऐसा नहीं कर पाए।
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सहायता का इंतजार
तहसील प्रशासन की तरफ से मृतक के परिवार को मुख्यमंत्री विवेकाधीन सहायता कोष से लाभान्वित करने के लिए संस्तुति की गई है। इसके अलावा समाज कल्याण की ओर से राष्ट्रीय पारिवारिक योजना का लाभ दिया जाना है। रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत 10 लाख तक का मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है, जिसे पुलिस के न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल करने के बाद जारी किया जाएगा। दोनों के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने के बाद जिला समाज कल्याण की ओर से दोनों बच्चों को ढाई हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलेगा।
घर में लगा ताला, मंझले बेटे के संरक्षण में पिता
दंपती की मौत के बाद से उसके घर में ताला लग गया है। उसके दोनों नाबालिग बेटे और वृद्ध पिता मंझले बेटे के पास चले गए हैं। वैसे तो दोनों बच्चों के संरक्षण और पालन-पोषण का जिम्मा उसके सबसे बड़े भाई ने उठाने का निर्णय लिया है। मगर मौजूदा समय में दोनों बच्चे अपने मंझले चाचा के पास हैं।