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महिला सशक्तिकरण के लिए सोच में बदलाव जरूरी
Fri, 08 Mar 2019 12:11 AM IST
राकेश पांडेय
basti
basti
Published by: राकेश पांडेय
Updated Fri, 08 Mar 2019 12:11 AM IST
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अपराजिता कार्यक्रम के तहत शपथ लेतीं महिलाएं।
- फोटो : amar ujala
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बस्ती। महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव तो हो रहा है लेकिन सामाजिक सोच उस अनुपात में नहीं बदल रही। जिस दिन महिलाएं हर काम में सहभागी बन जाएंगी, उस दिन परिवार ही नहीं राष्ट्र का विकास कोई रोक नहीं सकता। जरूरत है सिर्फ सामाजिक सोच में बदलाव लाने की।
ये विचार सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सरोज त्रिपाठी ने व्यक्त किए। वह अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर अपराजिता के तहत स्वामी दयानंद सरस्वती विद्यालय सुर्तीहट्टा परिसर में आयोजित संगोष्ठी में बोल रही थीं। मुख्य वक्ता प्रधानाचार्य नीलम मिश्रा ने कहा कि वैदिक काल से ही महिलाएं सशक्त थीं। आज भी हैं लेकिन बीच के दौर में परिस्थितियां बदलने से आत्मविश्वास दब गया है। उन्होंने कहा कि महिलाएं बॉर्डर पर राइफल चलाने से लेकर अंतरिक्ष में अनुसंधान तक के लिए जा रही हैं। महिलाओं का नेतृत्व पूरे विश्व ने देखा है। विश्वास के साथ आप आगे बढे़ं, पूरा जहां आप का है। पुष्पा ने कहा कि परिवार को लड़कियों को लड़कों के समान उच्च शिक्षा दिलानी चाहिए। छात्रा मानसी वर्मा ने कहा कि अरुणिमा दिव्यांगता को मात देते हुए एवरेस्ट पर पहुंच सकती हैं तो अन्य महिलाएं क्यों नहीं आगे बढ़ सकतीं। शिक्षक गरुणध्वज पांडेय ने कहा कि जनजागरूकता से ही समाज की सोच बदलेगी। संगोष्ठी में योग शिक्षक कामना पांडेय, बीना वर्मा और दुर्गावती यादव ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर 70 महिलाओं ने शपथ पत्र भरकर अपराजिता मुहिम से जुड़ने का संकल्प लिया। शुरुआत विद्यालय की छात्राओं की वैदिक प्रार्थना से हुई।
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ये विचार सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सरोज त्रिपाठी ने व्यक्त किए। वह अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर अपराजिता के तहत स्वामी दयानंद सरस्वती विद्यालय सुर्तीहट्टा परिसर में आयोजित संगोष्ठी में बोल रही थीं। मुख्य वक्ता प्रधानाचार्य नीलम मिश्रा ने कहा कि वैदिक काल से ही महिलाएं सशक्त थीं। आज भी हैं लेकिन बीच के दौर में परिस्थितियां बदलने से आत्मविश्वास दब गया है। उन्होंने कहा कि महिलाएं बॉर्डर पर राइफल चलाने से लेकर अंतरिक्ष में अनुसंधान तक के लिए जा रही हैं। महिलाओं का नेतृत्व पूरे विश्व ने देखा है। विश्वास के साथ आप आगे बढे़ं, पूरा जहां आप का है। पुष्पा ने कहा कि परिवार को लड़कियों को लड़कों के समान उच्च शिक्षा दिलानी चाहिए। छात्रा मानसी वर्मा ने कहा कि अरुणिमा दिव्यांगता को मात देते हुए एवरेस्ट पर पहुंच सकती हैं तो अन्य महिलाएं क्यों नहीं आगे बढ़ सकतीं। शिक्षक गरुणध्वज पांडेय ने कहा कि जनजागरूकता से ही समाज की सोच बदलेगी। संगोष्ठी में योग शिक्षक कामना पांडेय, बीना वर्मा और दुर्गावती यादव ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर 70 महिलाओं ने शपथ पत्र भरकर अपराजिता मुहिम से जुड़ने का संकल्प लिया। शुरुआत विद्यालय की छात्राओं की वैदिक प्रार्थना से हुई।
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