फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   aparajita in ggic

शिक्षित नारी से ही विकसित राष्ट्र की परिकल्पना

Tue, 09 Jul 2019 11:00 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jul 2019 11:00 PM IST
विज्ञापन
aparajita in ggic
जीजीआईसी में अपराजिता कार्यक्रम में छात्राओ को शपथ दिलाती नीलम सिंह। - फोटो : BASTI
फोटो
विज्ञापन

शिक्षित नारी से ही विकसित राष्ट्र की परिकल्पना
अपराजिता मुहिम के तहत आयोजित संगोष्ठी में अतिथियों ने कहा
अमर उजाला फाउंडेनशन की ओर से जीजीआईसी में कार्यक्रम
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। एक शिक्षित नारी दो परिवारों को ही नहीं संवारती बल्कि समाज की सोच बदलने में योगदान करती है। शिक्षित नारी से ही एक विकसित राष्ट्र की परिकल्पना संभव है। यह कहना है प्रधानाचार्य नीलम सिंह का। वह अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित महिला शिक्षा संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।
राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ने कहा कि 21वीं सदी में उस हर क्षेत्र में महिलाएं पहुंच चुकी हैं जो पुरुषों के लिए माना जाता था। अंतरिक्ष हो या हवाई जहाज चलाना अथवा फोर्स ज्वाइन कर बॉर्डर पर सीमा की रखवाली करना हर क्षेत्र में महिलाएं सक्रिय हैं। राजनीति में भारत में महिलाओं का पराक्रम किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में हर परिवार अपने बेटे के समान ही बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाएं। ताकि परिवार, समाज और राष्ट्र विकास की ऊचांइयों को छू सके। जीजीआईसी में हिंदी की शिक्षक डॉ. कविता ने कहा कि पौराणिक काल से ही नारियों की सबलता के प्रमाण मिलते हैं। किन्हीं परिस्थितियों बस स्थिति में गिरावट आई। इसके बाद कवियों ने नारी तुम केवल श्रद्धा हो, अबला आदि शब्दों से संबोधित किया लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है। नारी शक्ति की प्रतीक है। घर से लेकर राष्ट्र तक अपना परचम लहरा चुकी है। सिर्फ जागरूक होने की आवश्यकता है।
विज्ञापन

जागरूकता से आगे बढ़ेगी नारी: मांडवी
जीजीआईसी में शिक्षक मांडवी सिंह कहती हैं कि नारी शिक्षा के प्रति जागरूकता जरूरी है। क्योंकि जागरूकता के चलते हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। यह जागरूकता माता-पिता से शुरू होता है। जो बगैर भेदभाव बेटियों को भी उच्च तालीम दिलाएं। आगे बढ़ने में मदद करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

वैदिक काल से ही नारी सबला : पूर्णिमा
नारियों की स्थिति वैदिक काल से ही मजबूत रही है। आज भी सशस्त्र सेना से लेकर फाइटर प्लेन तक चलाने में सक्षम है। जरूरत है सिर्फ प्रारंभिक सहयोग देने की। यह कहना है शिक्षिका पूर्णिमा श्रीवास्तव का। अमर उजाला का यह कार्यक्रम महिलाओं के लिए विशेष सहयोगी है।
भेदभाव से पिछड़ती हैं लड़कियां: अंजू
प्रकृति जब भेदभाव नहीं करती तो हम लोगों को भी अधिकार नहीं है कि बेटे और बेटी में फर्क रखें। विशेषकर शिक्षा के क्षेत्र में परिवार की ओर से भेदभाव महिलाओं के पिछड़ेपन का कारण बनता है। यह कहना है अंजू अफसा का। कहती हैं कि ऐसे भेदभाव वाली सोच को बदलना होगा।

ऐसे कार्यक्रम से बढ़ेगा आत्मविश्वास: डॉ. सबीहा
जीजीआईसी की शिक्षिका डॉ. सबीहा मुमताज कहती हैं कि अपराजिता मुहिम अमर उजाला की सराहनीय पहल है। महिलाओं के लिए चलाया जा रहे इस अभियान से निश्चित ही जागरूकता आएगी। ऐसे कार्यक्रमों से मनोबल बढ़ता है। समाज में महिलाओं के प्रति अपराधों पर अंकुश लगेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed