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Basti News: बनेगी सपनों की लैब, रोबोट बनाने में दक्ष होंगे विद्यार्थी, उड़ाएंगे ड्रोन
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बस्ती। जीआईसी समेत तीन राजकीय विद्यालयों में जल्द ही ड्रीम लैब विकसित की जाएगी। यहां विद्यार्थी रोबोट बनाने और ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण लेने के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रयोग की तकनीकी जानकारी हासिल करेंगे।
विद्यार्थियों को 3-डी मॉडल तैयार करने और 3-डी प्रिंटर से मॉडल बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे उनमें वैज्ञानिक सोच और तकनीकी कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी। मंडल स्तर पर शिक्षा विभाग और एक निजी कंपनी की ओर से यह पहल की जा रही है। कुछ उपकरण विद्यालयों में पहुंच चुके हैं, जबकि शेष उपकरण भी जल्द उपलब्ध होने की उम्मीद है। जीआईसी परिसर में ड्रीम लैब का हब बनाया जाएगा। अन्य दो विद्यालयों में छोटे लैब स्थापित किए जाएंगे।
ड्रीम लैब के नोडल और जीआईसी के प्रवक्ता यशवीर श्रीवास्तव ने बताया कि विद्यालय के छह कमरों में लैब के उपकरण लगाए जाएंगे। इसके लिए विद्यालय प्रबंधन की ओर से कमरे उपलब्ध कराए जाएंगे। करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से लैब को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तैयार करने और उनके प्रयोग का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। लैब के कुछ उपकरण जून में ही विद्यालय पहुंच चुके हैं।
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नए वर्ष में शुरू होने की उम्मीद
नोडल ने बताया कि ड्रीम लैब के नए वर्ष में संचालित होने की उम्मीद है। यहां कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। रोबोट बनाने और अन्य तकनीकी प्रयोगों में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को प्रशिक्षण और उपकरण उपलब्ध होंगे, जिससे उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिलेगा।
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दो प्रशिक्षक देंगे प्रशिक्षण
लैब के संचालन के बाद निजी कंपनी की ओर से दो प्रशिक्षक दो वर्ष के लिए तैनात किए जाएंगे। वे शिक्षकों और विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देंगे। एआई के प्रयोग, ड्रोन निर्माण और उसे उड़ाने का कौशल भी सिखाया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे।
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दो विद्यालयों में छोटे ड्रीम लैब
पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज श्रृंगीनारी और राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कलवारी में छोटे ड्रीम लैब स्थापित किए जाएंगे। दोनों विद्यालयों में दो-दो कमरों में करीब 40-40 लाख रुपये की लागत से लैब विकसित होगी। इन विद्यालयों में भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पहुंच चुके हैं।
कोट
ड्रीम लैब की स्थापना के लिए परिषद की ओर से छह कमरे उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ उपकरण विद्यालय में आ चुके हैं और शेष उपकरण भी जल्द मिलने की जानकारी है। इससे विद्यार्थियों के तकनीकी ज्ञान का स्तर बढ़ेगा।
-विजय प्रकाश वर्मा, प्रधानाचार्य, जीआईसी
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विद्यार्थियों को 3-डी मॉडल तैयार करने और 3-डी प्रिंटर से मॉडल बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे उनमें वैज्ञानिक सोच और तकनीकी कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी। मंडल स्तर पर शिक्षा विभाग और एक निजी कंपनी की ओर से यह पहल की जा रही है। कुछ उपकरण विद्यालयों में पहुंच चुके हैं, जबकि शेष उपकरण भी जल्द उपलब्ध होने की उम्मीद है। जीआईसी परिसर में ड्रीम लैब का हब बनाया जाएगा। अन्य दो विद्यालयों में छोटे लैब स्थापित किए जाएंगे।
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ड्रीम लैब के नोडल और जीआईसी के प्रवक्ता यशवीर श्रीवास्तव ने बताया कि विद्यालय के छह कमरों में लैब के उपकरण लगाए जाएंगे। इसके लिए विद्यालय प्रबंधन की ओर से कमरे उपलब्ध कराए जाएंगे। करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से लैब को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तैयार करने और उनके प्रयोग का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। लैब के कुछ उपकरण जून में ही विद्यालय पहुंच चुके हैं।
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नए वर्ष में शुरू होने की उम्मीद
नोडल ने बताया कि ड्रीम लैब के नए वर्ष में संचालित होने की उम्मीद है। यहां कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। रोबोट बनाने और अन्य तकनीकी प्रयोगों में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को प्रशिक्षण और उपकरण उपलब्ध होंगे, जिससे उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिलेगा।
दो प्रशिक्षक देंगे प्रशिक्षण
लैब के संचालन के बाद निजी कंपनी की ओर से दो प्रशिक्षक दो वर्ष के लिए तैनात किए जाएंगे। वे शिक्षकों और विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देंगे। एआई के प्रयोग, ड्रोन निर्माण और उसे उड़ाने का कौशल भी सिखाया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे।
दो विद्यालयों में छोटे ड्रीम लैब
पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज श्रृंगीनारी और राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कलवारी में छोटे ड्रीम लैब स्थापित किए जाएंगे। दोनों विद्यालयों में दो-दो कमरों में करीब 40-40 लाख रुपये की लागत से लैब विकसित होगी। इन विद्यालयों में भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पहुंच चुके हैं।
कोट
ड्रीम लैब की स्थापना के लिए परिषद की ओर से छह कमरे उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ उपकरण विद्यालय में आ चुके हैं और शेष उपकरण भी जल्द मिलने की जानकारी है। इससे विद्यार्थियों के तकनीकी ज्ञान का स्तर बढ़ेगा।
-विजय प्रकाश वर्मा, प्रधानाचार्य, जीआईसी