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ईसाई धर्म प्रचारक समेत आठ पर मुकदमा का आदेश
Basti
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:30 AM IST
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बस्ती। ईसाई धर्म प्रचारक की टीम में गा-बजाकर धर्म का प्रचार-प्रसार करने वाले एक युवक की मौत के मामले में पेच फंस गया है। न्यायालय ने कोतवाली पुलिस को युवक की मौत को गंभीरता से लेते हुए आठ लोगाें के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर मामले की विवेचना का आदेश दिया है।
खबर के अनुसार, कांशीराम शहरी आवास योजना डारीडीहा की लीलावती पत्नी हीरालाल क ा पुत्र राजन ईसाई धर्म प्रचारक अनुराग फास्टर के साथ रहता था। ये लोग ईसाई धर्म का प्रचार प्रसार करते थे। राजन को बदले में हर महीने तीन हजार रुपये मिलते थे। उनकी टीम में ओमप्रकाश, प्रेम, गोलू, स्वाती गौड़, सोनी गौड़, अंकित पांडेय भी थे। ये लोग गांव-गांव जाकर गीत-संगीत के माध्यम से लोगों को प्रभु यीशु के बारे में बताते थे। लीलावती ने कोर्ट में अर्जी देकर कहा कि उसे 21 जुलाई 2013 को अनुराग फास्टर ने फोन पर बताया कि उनके बेटे को काफी चोटें आई हैं और वह जिला अस्पताल में भर्ती है। कुछ घंटे के बाद राजन की मौत हो गई। लीलावती ने बताया कि उसे उसके बेटे की मौत की वाजिब वजह नहीं बताई गई। इतना ही नहीं, इमरजेंसी के डॉक्टर की मिलीभगत से राजन की लाश को दफना दिया गया। उसे बीमे का लालच दिया गया और एक सादे कागज पर दस्तखत करा लिए गए। बाद में कोतवाली में दुर्घटना का मुकदमा पंजीकृत करा दिया गया। लीलावती ने कहा कि इमरजेंसी के तत्कालीन प्रभारी ने या फिर टीम के किसी सदस्य ने पोस्टमार्टम कराने की बात नहीं कही। कोर्ट में अर्जी के बाद इस मामले में जज ने सुनवाई शुरू की। तथ्यों के आधार पर मामले को गंभीर मानते हुए सीजेएम अशोक कुमार ने क ोतवाली पुलिस को सभी के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना का आदेश दिया है।
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खबर के अनुसार, कांशीराम शहरी आवास योजना डारीडीहा की लीलावती पत्नी हीरालाल क ा पुत्र राजन ईसाई धर्म प्रचारक अनुराग फास्टर के साथ रहता था। ये लोग ईसाई धर्म का प्रचार प्रसार करते थे। राजन को बदले में हर महीने तीन हजार रुपये मिलते थे। उनकी टीम में ओमप्रकाश, प्रेम, गोलू, स्वाती गौड़, सोनी गौड़, अंकित पांडेय भी थे। ये लोग गांव-गांव जाकर गीत-संगीत के माध्यम से लोगों को प्रभु यीशु के बारे में बताते थे। लीलावती ने कोर्ट में अर्जी देकर कहा कि उसे 21 जुलाई 2013 को अनुराग फास्टर ने फोन पर बताया कि उनके बेटे को काफी चोटें आई हैं और वह जिला अस्पताल में भर्ती है। कुछ घंटे के बाद राजन की मौत हो गई। लीलावती ने बताया कि उसे उसके बेटे की मौत की वाजिब वजह नहीं बताई गई। इतना ही नहीं, इमरजेंसी के डॉक्टर की मिलीभगत से राजन की लाश को दफना दिया गया। उसे बीमे का लालच दिया गया और एक सादे कागज पर दस्तखत करा लिए गए। बाद में कोतवाली में दुर्घटना का मुकदमा पंजीकृत करा दिया गया। लीलावती ने कहा कि इमरजेंसी के तत्कालीन प्रभारी ने या फिर टीम के किसी सदस्य ने पोस्टमार्टम कराने की बात नहीं कही। कोर्ट में अर्जी के बाद इस मामले में जज ने सुनवाई शुरू की। तथ्यों के आधार पर मामले को गंभीर मानते हुए सीजेएम अशोक कुमार ने क ोतवाली पुलिस को सभी के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना का आदेश दिया है।
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