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आत्महत्या के लिए उकसाने पर सजा
Basti
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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बस्ती। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अष्टम आईडी दुबे की अदालत में पत्नी को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के आरोपी इंजीनियर पति का दोष सिद्ध हो गया। न्यायालय ने उसे चार वर्ष की सश्रम कैद और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार बिहार के समस्तीपुर जिले के मोहनपुर निवासी रामविलास की पुत्री रेनू की शादी घटना से 20 साल पूर्व मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर थाने के महुबल निवासी मुकेश ठाकुर पुत्र स्व. जनक ठाकुर के साथ हुई थी। उसका दामाद बस्ती शुगर मिल्स में टरबाइन इंजीनियर पद पर कार्यरत था और खीरीघाट मोहल्ले में किराए के मकान में रहता था। शादी के बाद से एक लाख रुपये नकद, सोने की चेन आदि की मांग को लेकर वे रेनू को प्रताड़ित करते थे। उनके साथ मुकेश की बहन सुनीता भी रहती थी। सुनीता रेनू पर आरोप लगाती रहती थी कि उसका अवैध संबंध मेरे पति के साथ है। जिससे रेनू दुखी रहती थी। 30 अप्रैल 2010 को लड़की ने फोन कर जानकारी दी कि उसके पति व ननद आदि ने मिलकर उसे बुरी तरह पीटा है और जहर खाने के लिए उकसा रहे हैं। इसके दूसरे ही दिन किसी ने फोन पर उसके हत्या हो जाने की सूचना दी। लाश जलाने की कोशिश की जा रही थी कि वह बस्ती पहुंच गया। उसकी मौजूदगी में कमरे का दरवाजा खोला गया तो एक पत्र मिला जिसमें लड़की ने आपबीती लिखी थी। रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज कर पति मुकेश, देवंती, उमा ठाकुर व श्याम के विरुद्ध विवेचना शुरू हुई। वादी सहित सात अन्य गवाहाें का बयान दर्ज हुआ। राज्य की ओर से एडीजीसी क्रिमिनल राजेंद्र प्रसाद यादव व नित्यानंद यादव ने पैरवी की। गवाहों के बयान व सबूत के आधार पर न्यायाधीश ने मृतका रेनू के पति मुकेश को आत्महत्या के लिए उकसाने के जुर्म में सजा सुनाई।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार बिहार के समस्तीपुर जिले के मोहनपुर निवासी रामविलास की पुत्री रेनू की शादी घटना से 20 साल पूर्व मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर थाने के महुबल निवासी मुकेश ठाकुर पुत्र स्व. जनक ठाकुर के साथ हुई थी। उसका दामाद बस्ती शुगर मिल्स में टरबाइन इंजीनियर पद पर कार्यरत था और खीरीघाट मोहल्ले में किराए के मकान में रहता था। शादी के बाद से एक लाख रुपये नकद, सोने की चेन आदि की मांग को लेकर वे रेनू को प्रताड़ित करते थे। उनके साथ मुकेश की बहन सुनीता भी रहती थी। सुनीता रेनू पर आरोप लगाती रहती थी कि उसका अवैध संबंध मेरे पति के साथ है। जिससे रेनू दुखी रहती थी। 30 अप्रैल 2010 को लड़की ने फोन कर जानकारी दी कि उसके पति व ननद आदि ने मिलकर उसे बुरी तरह पीटा है और जहर खाने के लिए उकसा रहे हैं। इसके दूसरे ही दिन किसी ने फोन पर उसके हत्या हो जाने की सूचना दी। लाश जलाने की कोशिश की जा रही थी कि वह बस्ती पहुंच गया। उसकी मौजूदगी में कमरे का दरवाजा खोला गया तो एक पत्र मिला जिसमें लड़की ने आपबीती लिखी थी। रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज कर पति मुकेश, देवंती, उमा ठाकुर व श्याम के विरुद्ध विवेचना शुरू हुई। वादी सहित सात अन्य गवाहाें का बयान दर्ज हुआ। राज्य की ओर से एडीजीसी क्रिमिनल राजेंद्र प्रसाद यादव व नित्यानंद यादव ने पैरवी की। गवाहों के बयान व सबूत के आधार पर न्यायाधीश ने मृतका रेनू के पति मुकेश को आत्महत्या के लिए उकसाने के जुर्म में सजा सुनाई।
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