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बिना कार्य कराए 40 हजार का भुगतान
Basti
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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बस्ती। शीत कालीन भ्रमण कार्यक्रम के तहत हर्रैया के एसडीएम सोमदत्त मौर्य ने सोमवार को परिवारपुर गांव में चौपाल लगाई। इस दौरान बिना निर्माण कराए 40 हजार रुपये का भुगतान कर देने का मामला पकड़ में आया। वर्षों से वरासत के लंबित मामले सामने आए। दोषी ग्राम पंचायत अधिकारी को निलंबित करने की सिफारिश की। एक लेखपाल को निलंबित भी किया। ढाई लाख के बकाएदार को पकड़कर बंद कर दिया। दो अनुसूचित जाति के गरीबों को जीवकोपार्जन के लिए कृषि योग्य भूमि आवंटन किया।
चौपाल में ग्रामीणों ने सेक्रेटरी ध्रुवचंद्र चौधरी की जमकर शिकायत की। कहा कि गांव में कभी नहीं आते, कब आते हैं गांव वालों को पता नहीं चलता। जब एसडीएम ने सेक्रेटरी से अभिलेख मांगा तो नहीं दिखा पाए। गांव में जब खड़ंजा देखा तो पता चला कि दो ऐसे खड़ंजा हैं, जिसपर बिना कार्य कराए ही 40 हजार रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसके लिए पंचायत सेक्रेटरी को जिम्मेदार ठहराया गया। 10 शौचालय ऐसे मिले जो निर्माण होने के बाद क्रियाशील नहीं कराए गए। इसके लिए भी सेक्रेटरी को ही दोषी माना गया। तीन आवास का निर्माण कराने का काई प्रयास नहीं किया गया। वरासत के 12 ऐसे मामले मिले, जिसपर दो साल में भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। लेखपाल धर्ममूर्ति को इसके लिए जिम्मदार मानते हुए निलंबित करने की घोषणा की। तहसील के 2.50 लाख के बड़े बकाएदार रामचंद्र को पकड़कर बंद कर दिया। एसडीएम ने बताया कि गांव में एक बीघा जमीन आवंटन के लिए मिला। इस पर एससी वर्ग के बच्चू लाल पुत्र नोहर और रमई पुत्र परदेशी के नाम का प्रस्ताव गांव वालों ने पारित किया। गांव के चार तालाबों में से एक पर कब्जा मिला, जिसका सर्वे कराने का निर्देश दिया गया। एसडीएम ने बताया कि दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की रिपोर्ट डीएम और सीडीओ को भेजी जा रही है।
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चौपाल में ग्रामीणों ने सेक्रेटरी ध्रुवचंद्र चौधरी की जमकर शिकायत की। कहा कि गांव में कभी नहीं आते, कब आते हैं गांव वालों को पता नहीं चलता। जब एसडीएम ने सेक्रेटरी से अभिलेख मांगा तो नहीं दिखा पाए। गांव में जब खड़ंजा देखा तो पता चला कि दो ऐसे खड़ंजा हैं, जिसपर बिना कार्य कराए ही 40 हजार रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसके लिए पंचायत सेक्रेटरी को जिम्मेदार ठहराया गया। 10 शौचालय ऐसे मिले जो निर्माण होने के बाद क्रियाशील नहीं कराए गए। इसके लिए भी सेक्रेटरी को ही दोषी माना गया। तीन आवास का निर्माण कराने का काई प्रयास नहीं किया गया। वरासत के 12 ऐसे मामले मिले, जिसपर दो साल में भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। लेखपाल धर्ममूर्ति को इसके लिए जिम्मदार मानते हुए निलंबित करने की घोषणा की। तहसील के 2.50 लाख के बड़े बकाएदार रामचंद्र को पकड़कर बंद कर दिया। एसडीएम ने बताया कि गांव में एक बीघा जमीन आवंटन के लिए मिला। इस पर एससी वर्ग के बच्चू लाल पुत्र नोहर और रमई पुत्र परदेशी के नाम का प्रस्ताव गांव वालों ने पारित किया। गांव के चार तालाबों में से एक पर कब्जा मिला, जिसका सर्वे कराने का निर्देश दिया गया। एसडीएम ने बताया कि दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की रिपोर्ट डीएम और सीडीओ को भेजी जा रही है।
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