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बाल पोषाहार की सुरक्षा के नहीं किए इंतजाम
Basti
Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
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बस्ती। मासूमों में बंटने वाले पोषाहार की गुणवत्ता सुधर नहीं पा रही है। इससे बच्चों की सेहत बनने के बजाए बिगड़ने की आशंका है। अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्रों पर खुले में पोषाहार रखने के कारण इसकी गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
कुछ दिनों पूर्व पोषाहार को गुणवत्ता को लेकर राष्ट्रीय बालक संरक्षण आयोग ने निदेशालय को सख्त निर्देश जारी किए थे। इसे लेकर विभाग के डाइरेक्टर ने सभी डीपीओ को पोषाहार के रख-रखाव के लिए निर्देश दिए थे। मगर अब तक उसका पालन नहीं हो पाया है। आंगनबाड़ी केंद्राें से वितरित किए जाने वाले बाल पोषाहार की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके मानक, गुणवत्ता की जांच विभागीय और प्रमाणित विश्लेषण इकाइयों की ओर से कराई जाती है।
पोषाहार को सुरक्षित रखने के लिए लकड़ी के क्रेट के ऊपर साफ बोरी बिछाकर रखने, आंगनबाड़ी केंद्राें को मिले स्टील के कंटेनर का प्रयोग करने की और पोषाहार का वितरण करते समय स्वच्छता का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। इतना ही नहीं, किसी भी दशा में बाल पोषाहार को खुले में न रखने और तीन माह की सेल्फ लाइफ वाले पोषाहार को समय भीतर वितरित करने के समय समय पर निर्देश विभाग की ओर से जारी किए जाते हैं। लोगों का कहना है कि, इसके बावजूद महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी इस पर विशेष ध्यान नहीं देतीं। नतीजतन पोषाहार की गुणवत्ता प्रभावित हो जाती है और यह बच्चों के खाने लायक नहीं रह जाती है। यही कारण है कि समय समय पर इसे खुले बाजारों में पशु आहार के रूप में बेचे जाने की शिकायतें मिलती हैं।
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इस संबंध में डीपीओ गायत्री सिंह कहती हैं कि बाल पोषाहार को सुरक्षित रखने, उसे नमी और चूहों से बचाने के निर्देश दिए गए हैं। रही बात स्टील के कंटेनर की तो यह किसी-किसी केंद्र पर है। जहां है वहां इसमें पोषाहार रखा जाता है। जहां नहीं है, वहां लकड़ी के पटरे पर प्लास्टिक पन्नी बिछाकर रखने का निर्देश जारी किया गया है।
पोषाहार में मिलने वाले पौष्टिक आहार
गेहूं 34 प्रतिशत
चीनी 25 प्रतिशत
सोया पाउडर 13 प्रतिशत
चावल 12 प्रतिशत
मक्का 05 प्रतिशत
वनस्पति 05 प्रतिशत
विटामिन/मिनरल्स 01 प्रतिशत
अन्य 05 प्रतिशत
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कुछ दिनों पूर्व पोषाहार को गुणवत्ता को लेकर राष्ट्रीय बालक संरक्षण आयोग ने निदेशालय को सख्त निर्देश जारी किए थे। इसे लेकर विभाग के डाइरेक्टर ने सभी डीपीओ को पोषाहार के रख-रखाव के लिए निर्देश दिए थे। मगर अब तक उसका पालन नहीं हो पाया है। आंगनबाड़ी केंद्राें से वितरित किए जाने वाले बाल पोषाहार की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके मानक, गुणवत्ता की जांच विभागीय और प्रमाणित विश्लेषण इकाइयों की ओर से कराई जाती है।
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पोषाहार को सुरक्षित रखने के लिए लकड़ी के क्रेट के ऊपर साफ बोरी बिछाकर रखने, आंगनबाड़ी केंद्राें को मिले स्टील के कंटेनर का प्रयोग करने की और पोषाहार का वितरण करते समय स्वच्छता का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। इतना ही नहीं, किसी भी दशा में बाल पोषाहार को खुले में न रखने और तीन माह की सेल्फ लाइफ वाले पोषाहार को समय भीतर वितरित करने के समय समय पर निर्देश विभाग की ओर से जारी किए जाते हैं। लोगों का कहना है कि, इसके बावजूद महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी इस पर विशेष ध्यान नहीं देतीं। नतीजतन पोषाहार की गुणवत्ता प्रभावित हो जाती है और यह बच्चों के खाने लायक नहीं रह जाती है। यही कारण है कि समय समय पर इसे खुले बाजारों में पशु आहार के रूप में बेचे जाने की शिकायतें मिलती हैं।
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इस संबंध में डीपीओ गायत्री सिंह कहती हैं कि बाल पोषाहार को सुरक्षित रखने, उसे नमी और चूहों से बचाने के निर्देश दिए गए हैं। रही बात स्टील के कंटेनर की तो यह किसी-किसी केंद्र पर है। जहां है वहां इसमें पोषाहार रखा जाता है। जहां नहीं है, वहां लकड़ी के पटरे पर प्लास्टिक पन्नी बिछाकर रखने का निर्देश जारी किया गया है।
पोषाहार में मिलने वाले पौष्टिक आहार
गेहूं 34 प्रतिशत
चीनी 25 प्रतिशत
सोया पाउडर 13 प्रतिशत
चावल 12 प्रतिशत
मक्का 05 प्रतिशत
वनस्पति 05 प्रतिशत
विटामिन/मिनरल्स 01 प्रतिशत
अन्य 05 प्रतिशत