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मांगों को लेकर आंदोलन पर अड़े संविदा श्रमिक
Updated Sun, 17 Sep 2017 11:23 PM IST
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मांगों को लेकर आंदोलन पर अड़े संविदा श्रमिक
बस्ती।
बकाया मानदेय का भुगतान सहित विभिन्न मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार कर रहे विद्युत संविदा श्रमिकों का आंदोलन रविवार को चौथे दिन भी जारी रहा। अधीक्षण अभियंता कार्यालय परिसर में विद्युत संविदा मजदूर संगठन के बैनर तले जुटे संविदा श्रमिकों ने विभागीय अफसरों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
आरोप लगाया कि अधिकारियों के इशारे पर अनुभवहीन ठेकेदारों को निविदा दी गई है, जब तब इनका निविदा समाप्त नहीं होगा तब तक कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। धरने पर बैठे श्रमिकों को संबोधित करते हुए प्रिंस पांडेय ने कहा कि अधिकारियों की मिलीभगत से मोटी रकम लेकर निविदा दी गई है जो अनुचित है। संगठन ने निर्णय लिया है कि जब तक इसे निरस्त नहीं किया जाएगा तब तक धरना-प्रदर्शन व कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। आंदोलन के दौरान संगठन के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने भगवान विश्वकर्मा जयंती भी धूमधाम से मनाई।
संगठन के जोनल अध्यक्ष राम ललित चौधरी बताया कि सोमवार को संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष आरएस राय अधीक्षक अभियंता कार्यालय पर पहुंचेंगे। उनके स्वागत के लिए धरना स्थल पर पहुंचने का उन्होंने आह्वान किया। धरने में देवेंद्र पांडेेय, सूर्य प्रकाश, रामजनम चौधरी, विजय चौधरी, वीरेंद्र नाथ पांडेय, अशोक सिंह, संजय कुमार, राजेंद्र चौधरी गाजन, शिव प्रसाद, अशोक चौधरी, भगौती प्रसाद, संतदेव, बलिराम चौधरी, मल्लू, दिनेश दूबे, रविनंदन श्रीवास्तव, गंगा प्रसाद, सतेंद्र नाथ श्रीवास्तव, अवधेश कुमार, राजकुमार, अंकित यादव, संतदेव, हरिश्चंद्र, परमात्मा आदि मौजूद रहे।
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वंचितों ने प्रधान के खिलाफ खोला मोर्चा
महसो।
सरकार का फोकस गांव के विकास पर है। इसके लिए तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं। मगर शहर से मात्र दस किमी दूरी पर स्थित सदर ब्लॉक के ग्राम मुड़कट्टी का मंगता पुरवा इससे दूर है। जमराव ग्राम सभा के ग्राम मुड़कट्टी के इस पुरवा के विकास को लेकर रविवार को यहां के ग्रामीण महिला और पुरुषों ने प्रधान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए गांव में एकत्र हुए और विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी।
मुड़कट़्टी के उक्त पुरवा पर करीब पंद्रह आवास हैं। इसमें 45 लोग निवास करते हैं। वर्षों से गांव में रह रहे ये परिवार मजदूरी कर पेट पालते हैं। गांव में जाने के लिए एक अदद खड़ंजा तक नहीं है। ऐसे में यहां के निवासी खेतों की पगडंडी से घर तक की यात्रा करते हैं। यही हाल शौचालय का भी है। सरकार और प्रशासनिक तंत्र जहां खुले में शौच मुक्त की खूब चर्चा कर रहा है। वहीं, इस पुरवा को एक भी शौचालय नसीब नहीं है। नतीजतन, खुले में शौच जाना इनकी मजबूरी है। यही स्थिति आवास, पेयजल और बिजली का भी है। गांव में झोपड़ी डालकर यह सभी परिवार रहते हैं। पानी के लिए यह चांपाकल का इस्तेमाल करते हैं। जबकि इनकी रात अंधेरे में गुजरती है। इन सभी मुद्दों को लेकर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पुरवा के अमरनाथ, राम प्रवेश, अम्बिका, अमरजीत, प्रमोद, चन्द्रिका प्रसाद, चंद्रभान, रेनू, अरविन्द ने प्रधान पर आरोप लगाया कि प्रधान केवल अपने चहेतों को ही सरकारी सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। पुरवा के लोग जब भी समस्या पर कुछ बोलते हैं तो वे चुप्पी साध जाते हैं। गांव में सफाई कर्मी कई महीनों से नहीं आया। इसके नाते यहां गंदगी का अंबार है। बच्चे अक्सर बीमार पड़ रहे हैं। अभी सप्ताह भर पूर्व यहां बुखार से आठ लोग बीमार थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में पहुंच कर इलाज आदि किया। गांव में एक मात्र इंडिया मार्क टू हैंडपंप है जो दूषित जल उगल रहा है, लेकिन मजबूरी में हम लोग यही पानी पीने को विवश हैं। प्रधान धनपत्ता के पति राम प्रसाद ने कहा कि ग्रामीणों की मांग जायज है। मेरे कार्यकाल में एक भी शौचालय नहीं मिला है। रही बिजली की बात तो ग्रामीणों को छूट पर कनेक्शन दिया जा रहा था, मगर इस पुरवा के लोगों ने कनेक्शन नहीं लिया। आवास के सवाल पर बोले पिछले कार्यकाल में यहां आवास आया था, मगर इन्हें क्यों नहीं मिला? यह हम नहीं बता सकते। फिलहाल, गांव के विकास को लेकर लगातार प्रयासरत हूं।
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बस्ती।
बकाया मानदेय का भुगतान सहित विभिन्न मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार कर रहे विद्युत संविदा श्रमिकों का आंदोलन रविवार को चौथे दिन भी जारी रहा। अधीक्षण अभियंता कार्यालय परिसर में विद्युत संविदा मजदूर संगठन के बैनर तले जुटे संविदा श्रमिकों ने विभागीय अफसरों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
आरोप लगाया कि अधिकारियों के इशारे पर अनुभवहीन ठेकेदारों को निविदा दी गई है, जब तब इनका निविदा समाप्त नहीं होगा तब तक कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। धरने पर बैठे श्रमिकों को संबोधित करते हुए प्रिंस पांडेय ने कहा कि अधिकारियों की मिलीभगत से मोटी रकम लेकर निविदा दी गई है जो अनुचित है। संगठन ने निर्णय लिया है कि जब तक इसे निरस्त नहीं किया जाएगा तब तक धरना-प्रदर्शन व कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। आंदोलन के दौरान संगठन के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने भगवान विश्वकर्मा जयंती भी धूमधाम से मनाई।
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संगठन के जोनल अध्यक्ष राम ललित चौधरी बताया कि सोमवार को संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष आरएस राय अधीक्षक अभियंता कार्यालय पर पहुंचेंगे। उनके स्वागत के लिए धरना स्थल पर पहुंचने का उन्होंने आह्वान किया। धरने में देवेंद्र पांडेेय, सूर्य प्रकाश, रामजनम चौधरी, विजय चौधरी, वीरेंद्र नाथ पांडेय, अशोक सिंह, संजय कुमार, राजेंद्र चौधरी गाजन, शिव प्रसाद, अशोक चौधरी, भगौती प्रसाद, संतदेव, बलिराम चौधरी, मल्लू, दिनेश दूबे, रविनंदन श्रीवास्तव, गंगा प्रसाद, सतेंद्र नाथ श्रीवास्तव, अवधेश कुमार, राजकुमार, अंकित यादव, संतदेव, हरिश्चंद्र, परमात्मा आदि मौजूद रहे।
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वंचितों ने प्रधान के खिलाफ खोला मोर्चा
महसो।
सरकार का फोकस गांव के विकास पर है। इसके लिए तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं। मगर शहर से मात्र दस किमी दूरी पर स्थित सदर ब्लॉक के ग्राम मुड़कट्टी का मंगता पुरवा इससे दूर है। जमराव ग्राम सभा के ग्राम मुड़कट्टी के इस पुरवा के विकास को लेकर रविवार को यहां के ग्रामीण महिला और पुरुषों ने प्रधान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए गांव में एकत्र हुए और विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी।
मुड़कट़्टी के उक्त पुरवा पर करीब पंद्रह आवास हैं। इसमें 45 लोग निवास करते हैं। वर्षों से गांव में रह रहे ये परिवार मजदूरी कर पेट पालते हैं। गांव में जाने के लिए एक अदद खड़ंजा तक नहीं है। ऐसे में यहां के निवासी खेतों की पगडंडी से घर तक की यात्रा करते हैं। यही हाल शौचालय का भी है। सरकार और प्रशासनिक तंत्र जहां खुले में शौच मुक्त की खूब चर्चा कर रहा है। वहीं, इस पुरवा को एक भी शौचालय नसीब नहीं है। नतीजतन, खुले में शौच जाना इनकी मजबूरी है। यही स्थिति आवास, पेयजल और बिजली का भी है। गांव में झोपड़ी डालकर यह सभी परिवार रहते हैं। पानी के लिए यह चांपाकल का इस्तेमाल करते हैं। जबकि इनकी रात अंधेरे में गुजरती है। इन सभी मुद्दों को लेकर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पुरवा के अमरनाथ, राम प्रवेश, अम्बिका, अमरजीत, प्रमोद, चन्द्रिका प्रसाद, चंद्रभान, रेनू, अरविन्द ने प्रधान पर आरोप लगाया कि प्रधान केवल अपने चहेतों को ही सरकारी सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। पुरवा के लोग जब भी समस्या पर कुछ बोलते हैं तो वे चुप्पी साध जाते हैं। गांव में सफाई कर्मी कई महीनों से नहीं आया। इसके नाते यहां गंदगी का अंबार है। बच्चे अक्सर बीमार पड़ रहे हैं। अभी सप्ताह भर पूर्व यहां बुखार से आठ लोग बीमार थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में पहुंच कर इलाज आदि किया। गांव में एक मात्र इंडिया मार्क टू हैंडपंप है जो दूषित जल उगल रहा है, लेकिन मजबूरी में हम लोग यही पानी पीने को विवश हैं। प्रधान धनपत्ता के पति राम प्रसाद ने कहा कि ग्रामीणों की मांग जायज है। मेरे कार्यकाल में एक भी शौचालय नहीं मिला है। रही बिजली की बात तो ग्रामीणों को छूट पर कनेक्शन दिया जा रहा था, मगर इस पुरवा के लोगों ने कनेक्शन नहीं लिया। आवास के सवाल पर बोले पिछले कार्यकाल में यहां आवास आया था, मगर इन्हें क्यों नहीं मिला? यह हम नहीं बता सकते। फिलहाल, गांव के विकास को लेकर लगातार प्रयासरत हूं।