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ढूंढते रह जाएंगे यात्री छाजन व छायादार वृक्ष कहहह
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ढूंढते रह जाएंगे यात्री छाजन और छायादार वृक्ष
15 वर्ष पूर्व विधायक निधि से हुआ था निर्माण
टीनशेड और फाइबर की कुर्सियां हैं गायब
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। बड़े शहरों की तर्ज पर यात्रियों के लिए जिले में कई जगह यात्री छाजन लगवाए गए थे, शुरुआती दिनों में इसकी उपयोगिता भी काफी रही, लेकिन समय बीतने के साथ-साथ ये यात्री छाजन बदहाल होते गए, आज कुछ बचा है तो सिर्फ इनके अवशेष। यही नहीं सड़कों के चौड़ीकरण में छायादार वृक्षों की भी कुर्बानी ले ली गई। ऐसे में यदि आप यात्री छाजन व छायादार वृक्ष ढूंढ रहे हैं, तो ढूंढते ही रह जाएंगे।
जिले में वर्ष 2004-5 में तत्कालीन नगर पालिकाध्यक्ष स्नेहलता पाल ने अस्पताल चौराहा, रोडवेज के निकट, महिला अस्पताल के बगल, कटरा पानी टंकी के समीप, कचहरी चौराहे पर राहगीरों के लिए यात्री छाजन बनवाया था, और इनका निर्माण विधायक निधि से हुआ था। इसमें फाइबर की कुर्सियां, धूप व पानी से बचाव के लिए टीनशेड लगवाया गया था। जो आज उपेक्षा का दंश झेल रहा हैं। इनमें मौजूद फाइबर की कुर्सियों पर जहां चोरों ने हाथ साफ कर दिया हैं, वही,ं देख-रेख के अभाव में टीनशेड व फर्श भी टूट गई है। कुछ छाजन तो ऐसे हैं जहां लोगों ने अपनी दुकानें सजा ली हैं। लेकिन जिम्मेदारों की नजर इसपर नहीं पड़ रही है। शहर के पंकज सूर्यवंशी कहते हैं कि गर्मी का मौसम आ रहा है, धूप भी तेज होगी, लेकिन शहर में न तो छायादार वृक्ष हैं, और न ही यात्री छाजन में सुविधा। राजेश मिश्रा कहते हैं कि आज के 20 वर्ष पूर्व सड़कों के किनारे छायादार वृक्षों की भरमार थी, मौसम भी सुहाना लगता था। लेकिन आधुनिकता के युग में इन वृक्षों को काट दिया गया। विशाल ने कहा कि यात्री छाजन होने से यात्रियों को बहुत राहत मिलती थी, तेज धूप व बारिश में यह छाजन बहुत उपयोगी साबित होता था, लेकिन आज यदि सिर छुपाना हो तो, होटलों की शरण लेनी पड़ती है।
नगर पालिकाध्यक्ष की सुनिए
यात्री छाजन को लेकर नगर पालिकाध्यक्ष रूपम मिश्र ने कहा कि सर्वे कराकर इन छाजनों को दुरुस्त कराया जाएगा, साथ ही गर्मी के मौसम को देखते हुए प्याऊ आदि की व्यवस्था भी की जाएगी।
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15 वर्ष पूर्व विधायक निधि से हुआ था निर्माण
टीनशेड और फाइबर की कुर्सियां हैं गायब
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। बड़े शहरों की तर्ज पर यात्रियों के लिए जिले में कई जगह यात्री छाजन लगवाए गए थे, शुरुआती दिनों में इसकी उपयोगिता भी काफी रही, लेकिन समय बीतने के साथ-साथ ये यात्री छाजन बदहाल होते गए, आज कुछ बचा है तो सिर्फ इनके अवशेष। यही नहीं सड़कों के चौड़ीकरण में छायादार वृक्षों की भी कुर्बानी ले ली गई। ऐसे में यदि आप यात्री छाजन व छायादार वृक्ष ढूंढ रहे हैं, तो ढूंढते ही रह जाएंगे।
जिले में वर्ष 2004-5 में तत्कालीन नगर पालिकाध्यक्ष स्नेहलता पाल ने अस्पताल चौराहा, रोडवेज के निकट, महिला अस्पताल के बगल, कटरा पानी टंकी के समीप, कचहरी चौराहे पर राहगीरों के लिए यात्री छाजन बनवाया था, और इनका निर्माण विधायक निधि से हुआ था। इसमें फाइबर की कुर्सियां, धूप व पानी से बचाव के लिए टीनशेड लगवाया गया था। जो आज उपेक्षा का दंश झेल रहा हैं। इनमें मौजूद फाइबर की कुर्सियों पर जहां चोरों ने हाथ साफ कर दिया हैं, वही,ं देख-रेख के अभाव में टीनशेड व फर्श भी टूट गई है। कुछ छाजन तो ऐसे हैं जहां लोगों ने अपनी दुकानें सजा ली हैं। लेकिन जिम्मेदारों की नजर इसपर नहीं पड़ रही है। शहर के पंकज सूर्यवंशी कहते हैं कि गर्मी का मौसम आ रहा है, धूप भी तेज होगी, लेकिन शहर में न तो छायादार वृक्ष हैं, और न ही यात्री छाजन में सुविधा। राजेश मिश्रा कहते हैं कि आज के 20 वर्ष पूर्व सड़कों के किनारे छायादार वृक्षों की भरमार थी, मौसम भी सुहाना लगता था। लेकिन आधुनिकता के युग में इन वृक्षों को काट दिया गया। विशाल ने कहा कि यात्री छाजन होने से यात्रियों को बहुत राहत मिलती थी, तेज धूप व बारिश में यह छाजन बहुत उपयोगी साबित होता था, लेकिन आज यदि सिर छुपाना हो तो, होटलों की शरण लेनी पड़ती है।
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नगर पालिकाध्यक्ष की सुनिए
यात्री छाजन को लेकर नगर पालिकाध्यक्ष रूपम मिश्र ने कहा कि सर्वे कराकर इन छाजनों को दुरुस्त कराया जाएगा, साथ ही गर्मी के मौसम को देखते हुए प्याऊ आदि की व्यवस्था भी की जाएगी।
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