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संगठित होकर कर लिया लाखों रुपये का बंदरबांट
Updated Fri, 18 Aug 2017 11:36 PM IST
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लाखों रुपये की बंदरबांट हुई
बस्ती।
कप्तानगंज की ग्राम पंचायत तिलकपुर में संगठित होकर बड़े पैमाने पर सरकारी धन की बंदरबांट करने का मामला सामने आया है। बिना कार्य कराए लाखों रुपये का गोलमाल करने की बात जांच में सामने आ गई।
इस पूरे मामले में पूर्व प्रधान अम्बिका सिंह, तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी ध्रुवचंद्र चौधरी और रोजगार सेवक फंस रहे हैं। घोटाले को छिपाने के लिए अभिलेखों को ही नष्ट कर दिया गया। तीन सदस्यीय टीम ने कार्रवाई करने के लिए सीडीओ को रिपोर्ट की है। सीडीओ अरविंद कुमार पांडेय ने बताया कि दोषियों से धन की वसूली और सरकारी धन के गबन के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
ग्राम पंचायत में कराए गए कार्यो की जांच के लिए सीडीओ ने उपायुक्त मनरेगा, सहायक आयुक्त सहकारिता और आरईडी के सहायक अभियंता की टीम गठित की। टीम ने जो दो दिन पहले रिपोर्ट दी उसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आया। टीम ने 12 बिंदुओं पर जांच की, और सभी शिकायतें सही पाई र्गइं। रिपोर्ट के मुताबिक इस ग्राम पंचायत में पूर्व प्रधान, तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी और रोजगार सेवक की ओर से संगठित होकर सरकारी धन के घोटाला करने की बात कही गई है। कहा कि बिना कार्य कराए लाखों रुपये की बंदरबांट कर ली गई। वित्तीय वर्ष 2014-15 और 2016-17 में एक भी कार्य मनरेगा से नहीं कराए गए। जांच रिपोर्ट में यह कहा गया है कि घोटाले को छिपाने के लिए सभी ने अभिलेखों को ही नष्ट कर दिया। मनमाने तरीके से पंचायत चुनाव के दौरान अनियमित रूप बैंक से धन निकालकर बंदरबाट की गई। रिपोर्ट में शौचालय के नाम पर भी गोलमाल करने का जिक्र किया गया। सबसे चौंकाने वाली बात प्रधान ने पत्नी और अन्य अपात्रों के नाम समाजवादी पेंशन योजना का लाभ दे दिया। अपात्रों के नाम पात्र गृहस्थी और अन्त्योदय योजना का राशन बनाने की भी बात सामने आई। ग्राम विकास अधिकारी पर दो नये सेक्रेटरियों को हलका का चार्ज न देने का भी आरोप जांच टीम ने लगाया है।
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बस्ती।
कप्तानगंज की ग्राम पंचायत तिलकपुर में संगठित होकर बड़े पैमाने पर सरकारी धन की बंदरबांट करने का मामला सामने आया है। बिना कार्य कराए लाखों रुपये का गोलमाल करने की बात जांच में सामने आ गई।
इस पूरे मामले में पूर्व प्रधान अम्बिका सिंह, तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी ध्रुवचंद्र चौधरी और रोजगार सेवक फंस रहे हैं। घोटाले को छिपाने के लिए अभिलेखों को ही नष्ट कर दिया गया। तीन सदस्यीय टीम ने कार्रवाई करने के लिए सीडीओ को रिपोर्ट की है। सीडीओ अरविंद कुमार पांडेय ने बताया कि दोषियों से धन की वसूली और सरकारी धन के गबन के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
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ग्राम पंचायत में कराए गए कार्यो की जांच के लिए सीडीओ ने उपायुक्त मनरेगा, सहायक आयुक्त सहकारिता और आरईडी के सहायक अभियंता की टीम गठित की। टीम ने जो दो दिन पहले रिपोर्ट दी उसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आया। टीम ने 12 बिंदुओं पर जांच की, और सभी शिकायतें सही पाई र्गइं। रिपोर्ट के मुताबिक इस ग्राम पंचायत में पूर्व प्रधान, तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी और रोजगार सेवक की ओर से संगठित होकर सरकारी धन के घोटाला करने की बात कही गई है। कहा कि बिना कार्य कराए लाखों रुपये की बंदरबांट कर ली गई। वित्तीय वर्ष 2014-15 और 2016-17 में एक भी कार्य मनरेगा से नहीं कराए गए। जांच रिपोर्ट में यह कहा गया है कि घोटाले को छिपाने के लिए सभी ने अभिलेखों को ही नष्ट कर दिया। मनमाने तरीके से पंचायत चुनाव के दौरान अनियमित रूप बैंक से धन निकालकर बंदरबाट की गई। रिपोर्ट में शौचालय के नाम पर भी गोलमाल करने का जिक्र किया गया। सबसे चौंकाने वाली बात प्रधान ने पत्नी और अन्य अपात्रों के नाम समाजवादी पेंशन योजना का लाभ दे दिया। अपात्रों के नाम पात्र गृहस्थी और अन्त्योदय योजना का राशन बनाने की भी बात सामने आई। ग्राम विकास अधिकारी पर दो नये सेक्रेटरियों को हलका का चार्ज न देने का भी आरोप जांच टीम ने लगाया है।
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