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दुष्कर्म के आरोपी को 10 वर्ष का सश्रम कारावास
Updated Thu, 07 Jun 2018 11:58 PM IST
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बस्ती। विशेष सत्र न्यायाधीश एससी/एसटी अनिल कुमार ने किशोरी से दुष्कर्म के मामले में दोषी करार देते हुए आरोपी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 20 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है, जिसे न अदा करने पर अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
सहायक शासकीय अधिवक्ता वंदना चौधरी ने न्यायालय के समक्ष घटना का विवरण रखा। बताया कि धनघटा थाना क्षेत्र में एक गांव की पीड़िता के पिता ने आठ अगस्त 1992 को रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोप लगाया कि वह मगहर कताई मिल में काम करता है। उसकी पत्नी गांव की ही एक महिला के साथ खेत में निराई करने गई थी। बेटा भी स्कूल गया था। नाबलिग बेटी घर में अकेली थी। छह अगस्त 1992 को 12 बजे दिन में पुरुषोत्तम नाई अकेला पाकर लड़की के साथ जबरन दुष्कर्म किया। घर वालों के आने पर गंभीर हालत में छोड़कर भाग गया। पीड़िता ने घर वालों को आपबीती बताई। जिसके बाद पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट के आधार पर दलित उत्पीड़न व रेप के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल हुआ। आरोप तय होने के बाद अभियोजन की तरफ से वादी एवं पीड़िता सहित आठ गवाहों के बयान हुए। बचाव पक्ष ने झूठा फंसाए जाने की बात कही गई। गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और सबूतों के आधार पर जज ने आरोपी पुरुषोत्तम नाई को दोषी मानते हुए 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं दलित उत्पीड़न के मामले में दोष मुक्त कर दिया।
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