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तीन मिनी पीआईसीयू की सौगत पर डॉक्टर ही नहीं
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तीन मिनी पीआईसीयू की सौगत पर डॉक्टर ही नहीं
गौर, हर्रैया व कुदरहा में स्थापित है नवजात सघन चिकित्सा कक्ष
अमर उजाला ब्यूरो
गौर। सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए ग्रामीणांचल के तीन स्वास्थ्य केंद्रों पर नौ माह पहले तीन मिनी पीआईसीयू (नवजात सघन चिकित्सा कक्ष) की सौगात मिली, मगर आज तक डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो पाई। नतीजतन, डॉक्टर के अभाव में लाखों के उपकरण बेकार साबित हो रहे हैं।
जुलाई 2018 में शासन की ओर से जिले के गौर, हर्रैया व कुदरहा सीएचसी पर नवजात शिशुओं के लिए मिनी पीआईसीयू का निर्माण कराया गया। जहां लाखों के उपकरण लगाए गए, लेकिन नौ माह बीत जाने के बाद भी अभी तक शिशुओं की देखभाल के लिए डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो पाई है। इससे स्वास्थ्य केंद्रों पर स्थापित मिनी पीआईसीयू ग्रामीणों के लिए बेकार साबित हो रहा है। क्षेत्र के ग्रामीण सत्येंद्र सिंह, शेषराम वर्मा, राजेंद्र यादव, नवाब किशन कसौधन ने बताया कि मिनी पीआईसीयू की सौगात मिलने पर लोगों में उम्मीद जगी थी, मगर अब वह बेकार साबित हो रहा है। इन लोगों ने बताया कि कक्ष स्थापित होने के बाद भवन में बेड से लेकर सारे सामान व मशीनें तो लगाए गईं, लेकिन डॉक्टर की तैनाती न होने से नवजात सघन चिकित्सा कक्ष का ताला तक नहीं खुल पाया। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह सुविधा खोखली साबित हो रहा है। सीएमओ डॉ जेएलएम कुशवाहा ने बताया कि कुछ माह पहले गौर में एक डॉक्टर को तैनात किया गया, लेकिन इस समय वह भी ट्रांसफर कराकर चले गए हैं। कुछ डॉक्टर ट्रेनिंग पूरा करके आने वाले हैं। शीघ्र उनकी तैनाती कर दी जाएगी, जिससे लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
फोटो
निर्माण के बाद से ही नहीं खुला एएनएम सेंटर का ताला
महिलाओं पर भारी पड़ रही विभागीय उदासीनता
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। गांवों में स्थापित जच्चा-बच्चा केंद्र बदहाल हो हैं। विभागीय जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते अधिकतर स्वास्थ्य केन्द्रों की दशा दयनीय है। इनमें शामिल ब्लॉक क्षेत्र के सुकरौली ग्राम पंचायत में स्थापित एएनएम सेंटर भी है। इसकी स्थापना एक दशक पूर्व हुई थी। तीन कमरों के साथ ही बरामदा, प्रसाधन, हैंडपम्प व बाउंड्रीवाल बनाकर गेट भी लगा दिया गया था पर निर्माण के बाद न तो यहां एएनएम की तैनाती हुई और न ही इस केंद्र का ताला खुला।
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मौजूदा हालत में भवन की दीवारें दरक रही हैं और चारो ओर घनी झाड़ियां उग गयीं हैं। भवन खंडहर से अधिक कुछ नजर नहीं आता है। दरवाजे व खिड़कियां टूटकर गायब हो चुकी हैं तो हैंडपम्प पर भी गायब है। कमोवेश ऐसे ही हालात क्षेत्र के अन्य एएनएम केन्द्रों के हैं जहां भवन तो हैं पर वहां स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध न होने से भवन के साथ ही उपकरण भी जर्जर हो चुके हैं। वर्तमान स्थित यह है कि धात्री व गर्भवती महिलाओं को दूर स्थित सीएचसी अथवा गैर जनपद स्थित अस्पताल की शरण में जाना पड़ रहा है। हालांकि, कई बार अधिकारियों के निरीक्षण में बदहाल पड़े केंद्रों की पोल खुल चुकी है पर इसे लेकर उनकी सेहत पर कोई असर नहीं है। यहां के शिवपूजन पांडेय, संतोष कुमार, गणेश पांडेय, अरविन्द वर्मा, अक्षय कुमार, अतुल कुमार का कहना है कि अगर एएनएम सेंटर सही ढंग से संचालित होते तो महिलाओं को एम्बुलेंस की आवश्यकता न पड़ती। सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि एएनएम सेंटरों को सक्रिय कर उनका प्रयोग प्राथमिक उपचार व टीकाकरण आदि के लिए किया जाएगा। सभी केंद्रों को व्यवस्थित किया जाएगा।
जेई की सूचना पर गांव में पहुंची स्वास्थ्य टीम
जाने हालात, दिए जेई व एईएस से बचाव के टिप्स
अमर उजाला ब्यूरो
दुबौलिया। क्षेत्र के खुशहालगंज ग्राम पंचायत के यादव टोला में जेई (जापानी इंसेफेलाइटिस) की सूचना पर शनिवार को स्वास्थ्य टीम ने गांव का भ्रमण किया। इस दौरान ग्रामीणों को सफाई और बुखार आदि के बारे में विधिवत टिप्स दिए। बचाव के उपाय सुझाए।
शनिवार की दोपहर सीएचसी प्रभारी डॉ. राम मणि शुक्ल के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची। हर घर पर पहुंच कर टीम ने ग्रामीणों को बुखार से बचाव की जानकारी दी। सुझाया कि अपने आस पास गंदगी एकत्र न होने दें, पानी उबाल कर पीएं, बगैर डॉक्टरी सलाह के दवाएं कत्तई प्रयोग न करे। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को जिला अस्पताल में बुखार के कारण खुशहालगंज निवासी आशाराम के तेरह वर्षीय पुत्र राधेश्याम को भर्ती कराया था। यहां जब उसके खून की जांच हुई तो उसमें जेई के लक्षण पाए गए। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम हरकत में आ गई। गांव में कैंप लगाकर लोगों को दवा आदि वितरित किया गया। डॉ. राममणि शुक्ल ने बताया कि कुछेक ग्रामीणों को दवा दी गई है। इसके अलावा गांव में फॉगिंग भी कराई जा रही है।
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गौर, हर्रैया व कुदरहा में स्थापित है नवजात सघन चिकित्सा कक्ष
अमर उजाला ब्यूरो
गौर। सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए ग्रामीणांचल के तीन स्वास्थ्य केंद्रों पर नौ माह पहले तीन मिनी पीआईसीयू (नवजात सघन चिकित्सा कक्ष) की सौगात मिली, मगर आज तक डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो पाई। नतीजतन, डॉक्टर के अभाव में लाखों के उपकरण बेकार साबित हो रहे हैं।
जुलाई 2018 में शासन की ओर से जिले के गौर, हर्रैया व कुदरहा सीएचसी पर नवजात शिशुओं के लिए मिनी पीआईसीयू का निर्माण कराया गया। जहां लाखों के उपकरण लगाए गए, लेकिन नौ माह बीत जाने के बाद भी अभी तक शिशुओं की देखभाल के लिए डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो पाई है। इससे स्वास्थ्य केंद्रों पर स्थापित मिनी पीआईसीयू ग्रामीणों के लिए बेकार साबित हो रहा है। क्षेत्र के ग्रामीण सत्येंद्र सिंह, शेषराम वर्मा, राजेंद्र यादव, नवाब किशन कसौधन ने बताया कि मिनी पीआईसीयू की सौगात मिलने पर लोगों में उम्मीद जगी थी, मगर अब वह बेकार साबित हो रहा है। इन लोगों ने बताया कि कक्ष स्थापित होने के बाद भवन में बेड से लेकर सारे सामान व मशीनें तो लगाए गईं, लेकिन डॉक्टर की तैनाती न होने से नवजात सघन चिकित्सा कक्ष का ताला तक नहीं खुल पाया। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह सुविधा खोखली साबित हो रहा है। सीएमओ डॉ जेएलएम कुशवाहा ने बताया कि कुछ माह पहले गौर में एक डॉक्टर को तैनात किया गया, लेकिन इस समय वह भी ट्रांसफर कराकर चले गए हैं। कुछ डॉक्टर ट्रेनिंग पूरा करके आने वाले हैं। शीघ्र उनकी तैनाती कर दी जाएगी, जिससे लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
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निर्माण के बाद से ही नहीं खुला एएनएम सेंटर का ताला
महिलाओं पर भारी पड़ रही विभागीय उदासीनता
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। गांवों में स्थापित जच्चा-बच्चा केंद्र बदहाल हो हैं। विभागीय जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते अधिकतर स्वास्थ्य केन्द्रों की दशा दयनीय है। इनमें शामिल ब्लॉक क्षेत्र के सुकरौली ग्राम पंचायत में स्थापित एएनएम सेंटर भी है। इसकी स्थापना एक दशक पूर्व हुई थी। तीन कमरों के साथ ही बरामदा, प्रसाधन, हैंडपम्प व बाउंड्रीवाल बनाकर गेट भी लगा दिया गया था पर निर्माण के बाद न तो यहां एएनएम की तैनाती हुई और न ही इस केंद्र का ताला खुला।
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मौजूदा हालत में भवन की दीवारें दरक रही हैं और चारो ओर घनी झाड़ियां उग गयीं हैं। भवन खंडहर से अधिक कुछ नजर नहीं आता है। दरवाजे व खिड़कियां टूटकर गायब हो चुकी हैं तो हैंडपम्प पर भी गायब है। कमोवेश ऐसे ही हालात क्षेत्र के अन्य एएनएम केन्द्रों के हैं जहां भवन तो हैं पर वहां स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध न होने से भवन के साथ ही उपकरण भी जर्जर हो चुके हैं। वर्तमान स्थित यह है कि धात्री व गर्भवती महिलाओं को दूर स्थित सीएचसी अथवा गैर जनपद स्थित अस्पताल की शरण में जाना पड़ रहा है। हालांकि, कई बार अधिकारियों के निरीक्षण में बदहाल पड़े केंद्रों की पोल खुल चुकी है पर इसे लेकर उनकी सेहत पर कोई असर नहीं है। यहां के शिवपूजन पांडेय, संतोष कुमार, गणेश पांडेय, अरविन्द वर्मा, अक्षय कुमार, अतुल कुमार का कहना है कि अगर एएनएम सेंटर सही ढंग से संचालित होते तो महिलाओं को एम्बुलेंस की आवश्यकता न पड़ती। सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि एएनएम सेंटरों को सक्रिय कर उनका प्रयोग प्राथमिक उपचार व टीकाकरण आदि के लिए किया जाएगा। सभी केंद्रों को व्यवस्थित किया जाएगा।
जेई की सूचना पर गांव में पहुंची स्वास्थ्य टीम
जाने हालात, दिए जेई व एईएस से बचाव के टिप्स
अमर उजाला ब्यूरो
दुबौलिया। क्षेत्र के खुशहालगंज ग्राम पंचायत के यादव टोला में जेई (जापानी इंसेफेलाइटिस) की सूचना पर शनिवार को स्वास्थ्य टीम ने गांव का भ्रमण किया। इस दौरान ग्रामीणों को सफाई और बुखार आदि के बारे में विधिवत टिप्स दिए। बचाव के उपाय सुझाए।
शनिवार की दोपहर सीएचसी प्रभारी डॉ. राम मणि शुक्ल के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची। हर घर पर पहुंच कर टीम ने ग्रामीणों को बुखार से बचाव की जानकारी दी। सुझाया कि अपने आस पास गंदगी एकत्र न होने दें, पानी उबाल कर पीएं, बगैर डॉक्टरी सलाह के दवाएं कत्तई प्रयोग न करे। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को जिला अस्पताल में बुखार के कारण खुशहालगंज निवासी आशाराम के तेरह वर्षीय पुत्र राधेश्याम को भर्ती कराया था। यहां जब उसके खून की जांच हुई तो उसमें जेई के लक्षण पाए गए। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम हरकत में आ गई। गांव में कैंप लगाकर लोगों को दवा आदि वितरित किया गया। डॉ. राममणि शुक्ल ने बताया कि कुछेक ग्रामीणों को दवा दी गई है। इसके अलावा गांव में फॉगिंग भी कराई जा रही है।