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जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में वेंटिलेटर युक्त 30 बेड तैयार
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जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में वेंटिलेटर युक्त 30 बेड तैयार
ओमिक्रॉन पर सतर्कता, विषम परिस्थितियों में वेंटिलेटर प्रयोग की दी गई जानकारी
मानीटर जांचेगा ऑक्सीजन लेवल व हार्टबीट व ब्लड प्रेशर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। साउथ अफ्रीका के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के प्रति स्वास्थ्य महकमे ने सतर्कता बढ़ा दी है। इस बार बच्चों के कोरोना से प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में तीस वेंटिलेटर युक्त बेड तैयार किए गए हैं। इन सभी पर जनरेटर प्लांट से सीधे आक्सीजन की आपूर्ति होगी, जबकि यहां वेंटिलेटर के अलावा अन्य संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं। एसआईसी डॉ. आलोक वर्मा ने सोमवार को संचालन की तैयारियों की जायजा लिया।
ओमिक्रॉन परिप्रेक्ष्य में सरकार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग मुस्तैद हो गया है। तीसरी लहर की आशंका के बीच कोरोना की चुनौती से निपटने की तैयारियां की जा रही हैं। एक ओर जहां जिले के विभिन्न स्थानों पर स्थापित लेवल वन के कोरोना अस्पतालों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं वहीं जिला चिकित्सालय के चिल्ड्रेन वार्ड को और सुसज्जित किया गया है। यहां पूर्व में 15 वेंटिलेटर युक्त बेड को दोगुना करते हुए तीस बेड तैयार कर लिए गए हैं। पहले यहां सिलिंडर से आक्सीजन की आपूर्ति की जा रही थी। अब वेंटिलेटर युक्त बेड पर आक्सीजन की आपूर्ति सीधे प्लांट से होगी। इसके लिए पाइप लाइन भी बिछा दी गई है। विषम परिस्थितियों में इसका प्रयोग होने में कोई बाधा न आए, इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने वेंटिलेटर आपूर्ति कर्ता कंपनी के इंजीनियरों से इसको संचालित कर जांच करा ली है। इसके अलावा वार्ड में मानीटर भी लगाए गए हैं, जो बीमार बच्चों का आक्सीजन लेवल, हार्ट बीट व ब्लड प्रेशर का स्तर बताता रहेगा। वार्ड के संचालन के लिए चिकित्सकों व स्टाफ को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. आलोक कुमार वर्मा ने कहा कि तीसरी लहर में बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव की आशंका को देखते हुए शासन के निर्देश पर यहां तीस वेंटिलेटर युक्त बेड के अलावा चिल्ड्रेन वार्ड को अत्याधुनिक संसाधनों से सुसज्जित किया जा रहा है।
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एक हजार एलपीएम की क्षमता का है आक्सीजन प्लांट
प्रभारी एसआईसी डॉ. राम प्रकाश ने बताया कि जिला अस्पताल में एक हजार एलपीएम यानी लीटर प्रति मिनट क्षमता वाला आक्सीजन प्लांट स्थापित है। इसका प्रयोग किया जा रहा है। कई वार्डों में प्लांट से ही आक्सीजन की आपूर्ति है। आपात काल के लिए सिलिंडर भी मौजूद है।
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ओमिक्रॉन पर सतर्कता, विषम परिस्थितियों में वेंटिलेटर प्रयोग की दी गई जानकारी
मानीटर जांचेगा ऑक्सीजन लेवल व हार्टबीट व ब्लड प्रेशर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। साउथ अफ्रीका के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के प्रति स्वास्थ्य महकमे ने सतर्कता बढ़ा दी है। इस बार बच्चों के कोरोना से प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में तीस वेंटिलेटर युक्त बेड तैयार किए गए हैं। इन सभी पर जनरेटर प्लांट से सीधे आक्सीजन की आपूर्ति होगी, जबकि यहां वेंटिलेटर के अलावा अन्य संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं। एसआईसी डॉ. आलोक वर्मा ने सोमवार को संचालन की तैयारियों की जायजा लिया।
ओमिक्रॉन परिप्रेक्ष्य में सरकार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग मुस्तैद हो गया है। तीसरी लहर की आशंका के बीच कोरोना की चुनौती से निपटने की तैयारियां की जा रही हैं। एक ओर जहां जिले के विभिन्न स्थानों पर स्थापित लेवल वन के कोरोना अस्पतालों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं वहीं जिला चिकित्सालय के चिल्ड्रेन वार्ड को और सुसज्जित किया गया है। यहां पूर्व में 15 वेंटिलेटर युक्त बेड को दोगुना करते हुए तीस बेड तैयार कर लिए गए हैं। पहले यहां सिलिंडर से आक्सीजन की आपूर्ति की जा रही थी। अब वेंटिलेटर युक्त बेड पर आक्सीजन की आपूर्ति सीधे प्लांट से होगी। इसके लिए पाइप लाइन भी बिछा दी गई है। विषम परिस्थितियों में इसका प्रयोग होने में कोई बाधा न आए, इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने वेंटिलेटर आपूर्ति कर्ता कंपनी के इंजीनियरों से इसको संचालित कर जांच करा ली है। इसके अलावा वार्ड में मानीटर भी लगाए गए हैं, जो बीमार बच्चों का आक्सीजन लेवल, हार्ट बीट व ब्लड प्रेशर का स्तर बताता रहेगा। वार्ड के संचालन के लिए चिकित्सकों व स्टाफ को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
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जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. आलोक कुमार वर्मा ने कहा कि तीसरी लहर में बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव की आशंका को देखते हुए शासन के निर्देश पर यहां तीस वेंटिलेटर युक्त बेड के अलावा चिल्ड्रेन वार्ड को अत्याधुनिक संसाधनों से सुसज्जित किया जा रहा है।
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एक हजार एलपीएम की क्षमता का है आक्सीजन प्लांट
प्रभारी एसआईसी डॉ. राम प्रकाश ने बताया कि जिला अस्पताल में एक हजार एलपीएम यानी लीटर प्रति मिनट क्षमता वाला आक्सीजन प्लांट स्थापित है। इसका प्रयोग किया जा रहा है। कई वार्डों में प्लांट से ही आक्सीजन की आपूर्ति है। आपात काल के लिए सिलिंडर भी मौजूद है।