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Basti News: इलाज करने वाले पर 25 हजार का जुर्माना, गलत रिपोर्ट देने वाले की डिग्री की जांच

Mon, 22 Jun 2026 01:09 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jun 2026 01:09 AM IST
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25,000 fine imposed on the treating doctor; degree of the person who issued the incorrect report to be investigated.
बस्ती। बीमार बच्चे के इलाज में लापरवाही पर जांच टीम ने दक्षिण दरवाजा स्थित अस्पताल पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है है। वहीं खुद को हृदय रोग विशेषज्ञ बताने वाले स्टेशन रोड के डॉक्टर की डिग्री की जांच कराए जाने की बात कही है। इस डॉक्टर ने नवजात के दिल में सुराख होने की रिपोर्ट दी थी जो लखनऊ के राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान में हुई जांच में झूठी साबित हुई।
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मामला दिसंबर 2025 का है। पुरानी बस्ती क्षेत्र के गिदही खुर्द निवासी मो. इमरान ने अपने नवजात बेटे को तबीयत बिगड़ने पर दक्षिण दरवाजा स्थित अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां डॉक्टर के बजाय एक स्टाफ ने बीएचटी पर बच्चे को स्वस्थ लिख दिया। बाद में जब डॉक्टर ने जांच की तो बच्चे की स्थिति ठीक नहीं थी। डॉक्टर ने दवाएं दीं और नवजात के दिल में सुराख होने की बात कहते हुए रेफर कर दिया। खुद को हृदय रोग विशेषज्ञ बताने वाले स्टेशन रोड के एक डॉक्टर ने बच्चे के दिल में सुराख होने की रिपोर्ट दी थी।
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इसके बाद मो. इमरान बच्चे को इलाज के लिए लखनऊ ले गए। वहां जांच में पता चला कि बच्चे के दिल में सुराख नहीं है। राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ में जांच में दिल में सुराख की रिपोर्ट गलत पाई गई। मो. इमरान ने दक्षिण दरवाजा स्थित हॉस्पिटल के खिलाफ इलाज में लापरवाही और धनउगाही का आरोप लगाते हुए डीएम के यहां शिकायत की। डीएम के निर्देश पर जिला अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल शर्मा व डिप्टी सीएमओ डॉ. एसबी सिंह की टीम ने जांच की तो पता चला कि नवजात का इलाज कर रहे चिकित्सक ने उसके दिल में सुराख का अंदेशा जताते हुए स्टेशन रोड स्थित हृदय रोग विशेषज्ञ के यहां जांच के लिए भेजा था। हृदय रोग विशेषज्ञ ने 2डी ईको जांच कर दिल में सुराख की रिपोर्ट दी थी। आरएमएल हॉस्पिटल लखनऊ में हुई जांच में ऐसा कुछ नहीं मिला।
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सीआरओ और सीएमओ ने भी की जांच
डिप्टी सीएमओ एसबी सिंह ने बताया कि मो. इमरान ने मामले की मजिस्टि्रयल जांच कराने की मांग की थी। इसके बाद
सीआरओ कीर्ति प्रकाश भारती और सीएमओ ने जांच की। अधिकारियों ने अपनी जांच रिपोर्ट में इलाज करने वाले चिकित्सक को दोषमुक्त करते हुए प्रशासनिक आधार पर अस्पताल की ओर से बरती गई लापरवाही पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। साथ ही कड़ी चेतावनी भी जारी की है। वहीं, खुद को हृदयरोग विशेषज्ञ बताने वाले चिकित्सक की डिग्री को जांच टीम ने संदिग्ध बताते हुए उसकी जांच कराए जाने के निर्देश दिए हैं। इस चिकित्सक ने नवजात की 2डी जांच कर दिल में सुराख होने की रिपोर्ट दी थी।

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इन अस्पतालों पर कार्रवाई नहीं
मुंडेरवा स्थित अस्पताल में महिला की मौत मामले में अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। एक माह बीत जाने के बाद भी जांच टीम किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। हालांकि, अस्पताल सील है। दो कर्मी जेल जा चुके हैं, वहीं नामजद संचालक फरार हैं। चिकित्सक भी बयान के लिए नहीं आए। जिगिना अस्पताल का भी आईपीडी-ओपीडी सील किए गए हैं, लेकिन अन्य कोई कार्रवाई नहीं हुई। मालवीय रोड, पचेड़िया, गड़गोड़िया और कटरा स्थित अस्पताल में मरीज की मौत पर कोई कार्रवाई नहीं हो हुई। इसके अलावा बरदहिया में क्लीनिक पर ऑपरेशन के बाद महिला की मौत हो गई, अभी तक न जांच हुई न कार्रवाई।


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कोट
दक्षिण दरवाजा स्थित अस्पताल की जांच पूरी हो चुकी है। जांच में पता चला है कि दवाएं आवश्यकता के अनुसार ही दी गई थीं, इसलिए डॉक्टरों को दोषमुक्त मुक्त किया गया है। प्रशासनिक आधार पर अस्पताल में कुछ खामियां मिलीं, जिस पर जुर्माना लगाया गया है। गलत रिपोर्ट देने वाले डॉक्टर की डिग्री की जांच कराई जाएगी।
- डॉ. राजीव निगम, सीएमओ।
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