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अंतिम पड़ाव हनुमानबाग चकोही पहुंचा जत्था
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अंतिम पड़ाव हनुमानबाग चकोही पहुंचा जत्था
84 कोसी परिक्रमा के दूसरे पड़ाव स्थल पर श्रद्धालुओं ने डाला डेरा
अमर उजाला ब्यूरो
दुबौलिया। जिले के अंतिम पड़ाव हनुमान बाग चकोही परिक्रमा स्थल पर रविवार को सुबह से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। खराब रास्ते व तेज धूप के बीच नंगे पांव श्रद्धालु गाजे बाजे के साथ जय श्रीराम व जय अयोध्या धाम का जयघोष करते हुए परिक्रमा स्थल पर पहुंचे।
राम रेखा नदी के तट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया। चौरासी कोसी परिक्रमा के द्वितीय पड़ाव पर श्रद्धालु सुबह 11 बजे पहुंच गए। परिक्रमा की अगुवाई कर रहे संत गया दास ने बताया कि रविवार को रात्रि विश्राम कर सोमवार की सुबह श्रद्धालुओं का जत्था नदी पार कर शेरवा घाट स्थित शृंगी ऋषि के आश्रम पहुंचेगा। बताया कि 84 कोस परिक्रमा का महत्व पुराणों में वर्णित है। मान्यता है कि अयोध्या धाम में संतों व स्थानीय लोगों द्वारा तीन परिक्रमा की जाती है। जिसमें चौरासी कोसी परिक्रमा विशेष है। 14 कोस और पंच कोसी परिक्रमा अयोध्या धाम में होती है। यही एक मात्र ऐसी परिक्रमा है, जिसमें श्रद्धालु अयोध्या, बस्ती व फिर अयोध्या और उसके बाद बाराबंकी के दरियाबाद , टिकैतनगर होते हुए गोंडा जनपद में प्रवेश करते हैं। उसके बाद नवाबगंज होते हुए फिर से अयोध्या धाम पहुंचकर यात्रा का समापन होता है। जिले में इस यात्रा का करीब पचास किमी हिस्सा पड़ता है। बताया कि ऐसी मान्यता है कि परिक्रमा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं क़ो चौरासी लाख योनियों में जन्म लेने से मुक्ति मिल जाती है। परिक्रमा में द्वितीय पड़ाव स्थल हनुमानबाग चकोही में आधा दर्जन साधुओं ने तेज धूप में पंच अग्नि जला कर मंत्रों का जाप किया। इस दौरान मेले का भी आयोजन हुआ।
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श्रद्धालुओं ने मोक्षेश्वर नाथ में किया जलाभिषेक
लालगंज। उद्दालक मुनि के तपो भूमि पर चल रहे मेले के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने कुआनो मनवर के संगम तट पर प्राचीन शिव मंदिर बाबा मोक्षेश्वर नाथ में जलाभिषेक कर पूजन-अर्चना किया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। 80 वर्षीय बारीघाट गांव निवासी अयोध्या प्रसाद मौर्य ने बताया कि शिव मंदिर में सच्चे मन पूजा अर्चना करने से मनोकामना पूरी होती है। इस दौरान मेला परिसर में लगी दुकानों पर लोगों ने जरूरत के सामानों की खरीदारी की। मेले में बच्चों ने झूला आदि का आनंद लिया, जबकि महिलाओं ने सौंदर्य प्रसाधन के अलावा घर गृहस्थी के सामानों की खरीदारी की। मेला ग्राम सुरक्षा समिति ने श्रद्धालुओं के लिए शीतल पेय की व्यवस्था की।
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84 कोसी परिक्रमा के दूसरे पड़ाव स्थल पर श्रद्धालुओं ने डाला डेरा
अमर उजाला ब्यूरो
दुबौलिया। जिले के अंतिम पड़ाव हनुमान बाग चकोही परिक्रमा स्थल पर रविवार को सुबह से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। खराब रास्ते व तेज धूप के बीच नंगे पांव श्रद्धालु गाजे बाजे के साथ जय श्रीराम व जय अयोध्या धाम का जयघोष करते हुए परिक्रमा स्थल पर पहुंचे।
राम रेखा नदी के तट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया। चौरासी कोसी परिक्रमा के द्वितीय पड़ाव पर श्रद्धालु सुबह 11 बजे पहुंच गए। परिक्रमा की अगुवाई कर रहे संत गया दास ने बताया कि रविवार को रात्रि विश्राम कर सोमवार की सुबह श्रद्धालुओं का जत्था नदी पार कर शेरवा घाट स्थित शृंगी ऋषि के आश्रम पहुंचेगा। बताया कि 84 कोस परिक्रमा का महत्व पुराणों में वर्णित है। मान्यता है कि अयोध्या धाम में संतों व स्थानीय लोगों द्वारा तीन परिक्रमा की जाती है। जिसमें चौरासी कोसी परिक्रमा विशेष है। 14 कोस और पंच कोसी परिक्रमा अयोध्या धाम में होती है। यही एक मात्र ऐसी परिक्रमा है, जिसमें श्रद्धालु अयोध्या, बस्ती व फिर अयोध्या और उसके बाद बाराबंकी के दरियाबाद , टिकैतनगर होते हुए गोंडा जनपद में प्रवेश करते हैं। उसके बाद नवाबगंज होते हुए फिर से अयोध्या धाम पहुंचकर यात्रा का समापन होता है। जिले में इस यात्रा का करीब पचास किमी हिस्सा पड़ता है। बताया कि ऐसी मान्यता है कि परिक्रमा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं क़ो चौरासी लाख योनियों में जन्म लेने से मुक्ति मिल जाती है। परिक्रमा में द्वितीय पड़ाव स्थल हनुमानबाग चकोही में आधा दर्जन साधुओं ने तेज धूप में पंच अग्नि जला कर मंत्रों का जाप किया। इस दौरान मेले का भी आयोजन हुआ।
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श्रद्धालुओं ने मोक्षेश्वर नाथ में किया जलाभिषेक
लालगंज। उद्दालक मुनि के तपो भूमि पर चल रहे मेले के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने कुआनो मनवर के संगम तट पर प्राचीन शिव मंदिर बाबा मोक्षेश्वर नाथ में जलाभिषेक कर पूजन-अर्चना किया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। 80 वर्षीय बारीघाट गांव निवासी अयोध्या प्रसाद मौर्य ने बताया कि शिव मंदिर में सच्चे मन पूजा अर्चना करने से मनोकामना पूरी होती है। इस दौरान मेला परिसर में लगी दुकानों पर लोगों ने जरूरत के सामानों की खरीदारी की। मेले में बच्चों ने झूला आदि का आनंद लिया, जबकि महिलाओं ने सौंदर्य प्रसाधन के अलावा घर गृहस्थी के सामानों की खरीदारी की। मेला ग्राम सुरक्षा समिति ने श्रद्धालुओं के लिए शीतल पेय की व्यवस्था की।
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