{"_id":"5c895264bdec22144e5c2204","slug":"191552503396-basti-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो वर्ष से फार्मासिस्ट चला रहे पीएचसी बेलघाट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो वर्ष से फार्मासिस्ट चला रहे पीएचसी बेलघाट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दो साल से फार्मासिस्ट चला रहे पीएचसी बेलघाट
कर्मियों और संसाधनों की कमी से भटक रहे मरीज
प्रसव के लिए जाना पड़ता है महिला अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
गौर। पीएचसी बेलघाट पर स्वास्थ्य सेवाएं कागजी हैं। यहां मिलने वाली सुविधाओं से मरीज वंचित हैं। अस्पताल पर पिछले दो वर्षों से डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में फार्मासिस्ट के भरोसे व्यवस्था चल रही है। कर्मियों और संसाधनों की कमी से व्यवस्था जूझ रही है। दूर-दराज इलाकों से इलाज के लिए यहां तक आने वाले मरीजों को बैरंग लौटना मजबूरी है।
बुधवार को 12 बजे पीएचसी पर अमर उजाला की टीम पहुंची तो अस्पताल के बाहर कुछ कर्मी बैठे मिले। फार्मासिस्ट राजेश सिंह और वार्ड ब्वॉय गुरदयाल श्रीवास्तव मौजूद थे। फार्मासिस्ट ने बताया कि सुबह से अभी तक कुल आठ मरीजों का रजिस्ट्रेशन कर दवा दी गई है। मरीज प्रमोद लाल श्रीवास्तव, अखिलेश, ओमप्रकाश, केशव राम, शांति, बबलू आदि ने बताया कि डॉक्टर न होने से अस्पताल में मरीजों की संख्या बहुत कम हो गई है। दो वर्ष से डॉक्टर न होने से क्षेत्र के मरीज मजबूर होकर जिला अस्पताल जा रहे हैं। वैसे तो नियतन यहां दो चिकित्सक एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी की है, लेकिन यहां डॉक्टर हैं ही नहीं। अस्पताल तक जाने के लिए सड़क की व्यवस्था नहीं है। पिछले कई वर्षों से रंगाई-पुताई न होने से अस्पताल जर्जर हो गया है। हैंडपंप भी खराब है, जिससे कर्मचारियों व मरीजों को पानी के लिए गांव में जाना पड़ता है। महिलाओं ने बताया कि प्रसव पीड़िताओं को सबसे अधिक झेलना पड़ता है। ऐसे में बीस किमी दूर जिला मुख्यालय तक लोगों को दौड़ लगानी पड़ती है। अस्पताल परिसर में मरीजों को बैठने के लिए बेंच तक नहीं है। परिसर के बगल के एक कमरे में राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल भी संचालित हो रहा है। यहां पर डॉ. राजेश कुमार वर्मा, फार्मासिस्ट सुरेंद्र प्रताप पांडेय और स्वीपर मुन्नीलाल तैनात हैं। फार्मासिस्ट सुरेंद्र प्रताप पांडेय ने बताया कि डॉक्टर फील्ड में ड्यूटी में गए हैं जबकि 14 मरीजों का रजिस्ट्रेशन कर दवा दी गई है। एसीएमओ डॉ. फकरे यार हुसैन ने बताया कि चिकित्सक की तैनाती के लिए बात चल रही है। बहुत जल्द वहां किसी डॉक्टर की तैनाती कर दी जाएगी। रही बात अन्य सुविधाओं की तो इसके लिए सीएचसी अधीक्षक गौर निर्देशित किया गया है।
यहां बिचौलिए संचालित करते हैं डिजिटल एक्सरे सेंटर
प्रभारी एसआईसी का लिखित निर्देश रद्दी की टोकरी में
रुपये मांगने की शिकायत करने वाले मरीज को बैरंग लौटाया
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। यूं तो जिला अस्पताल में दलालों का वर्चस्व है, मगर डिजिटल एक्सरे में इन बिचौलियों की इतनी पहुंच है कि बिना उनकी सहमति यहां पत्ता तक नहीं हिलता। भीड़ भी यहां खूब होती है, मगर सेटिंग वाले मरीजों का तत्काल एक्सरे होता है यदि आम मरीज पहुंच जाए तो एक दिन में उसका एक्सरे संभव नहीं होगा। यही नहीं यहां तैनात कर्मियों का रसूख इतना है कि वे एसआईसी अथवा प्रभारी एसआईसी का भी निर्देश ठेंगे पर रखते हैं।
विज्ञापन
अमर उजाला की टीम ने बुधवार को डिजिटल एक्सरे केंद्र का निरीक्षण किया। यहां सुबह से लाइन में लगे पुरानी बस्ती क्षेत्र के राजकुमार, गांधी नगर के अनूप, राहुल पटेल व मोती लाल सहित एक दर्जन लोगों ने बताया कि वे सुबह से बिना खाए-पीए यहीं बैठे हैं, मगर उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। यहां पूरे तंत्र का संचालन बाहरी व्यक्ति करते हैं। दबी जुबान आरोप लगाया कि यही बाहरी लोग तत्काल एक्सरे कराकर रिपोर्ट देने के लिए धन की मांग कर रहे थे, मगर इतने रुपये होते तो यहां क्यों आते। यहां सुबह से लाइन लगाए अनुज ने कहा कि ऑटो चलाकर किसी तरह परिवार पालते हैं, मगर यहां एक्सरे कराने आए तो दिन भर कट गया। अब यहां रुपये भी मांगे जा रहे हैं, मगर कहां से दें। अनुज के अनुसार इसकी जानकारी जब उसने प्रभारी एसआईसी डॉ. राम प्रकाश को दी तो वहां से एक पर्ची भेेजी गई मगर संबंधित कर्मियों ने यह कहते हुए भगा दिया कि एसआईसी क्या मुख्यमंत्री का भी निर्देश पत्र लाओ तब भी एक्सरे आज नहीं होगा। इस संबंध में एसआईसी डॉ. ओपी सिंह ने कहा कि वहां मनमानेपन की बात संज्ञान में आई है। इसकी जांच करा कर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यहां बिचौलिए सक्रिय हैं। यह भी शिकायत आई है।
विज्ञापन
कर्मियों और संसाधनों की कमी से भटक रहे मरीज
प्रसव के लिए जाना पड़ता है महिला अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
गौर। पीएचसी बेलघाट पर स्वास्थ्य सेवाएं कागजी हैं। यहां मिलने वाली सुविधाओं से मरीज वंचित हैं। अस्पताल पर पिछले दो वर्षों से डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में फार्मासिस्ट के भरोसे व्यवस्था चल रही है। कर्मियों और संसाधनों की कमी से व्यवस्था जूझ रही है। दूर-दराज इलाकों से इलाज के लिए यहां तक आने वाले मरीजों को बैरंग लौटना मजबूरी है।
बुधवार को 12 बजे पीएचसी पर अमर उजाला की टीम पहुंची तो अस्पताल के बाहर कुछ कर्मी बैठे मिले। फार्मासिस्ट राजेश सिंह और वार्ड ब्वॉय गुरदयाल श्रीवास्तव मौजूद थे। फार्मासिस्ट ने बताया कि सुबह से अभी तक कुल आठ मरीजों का रजिस्ट्रेशन कर दवा दी गई है। मरीज प्रमोद लाल श्रीवास्तव, अखिलेश, ओमप्रकाश, केशव राम, शांति, बबलू आदि ने बताया कि डॉक्टर न होने से अस्पताल में मरीजों की संख्या बहुत कम हो गई है। दो वर्ष से डॉक्टर न होने से क्षेत्र के मरीज मजबूर होकर जिला अस्पताल जा रहे हैं। वैसे तो नियतन यहां दो चिकित्सक एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी की है, लेकिन यहां डॉक्टर हैं ही नहीं। अस्पताल तक जाने के लिए सड़क की व्यवस्था नहीं है। पिछले कई वर्षों से रंगाई-पुताई न होने से अस्पताल जर्जर हो गया है। हैंडपंप भी खराब है, जिससे कर्मचारियों व मरीजों को पानी के लिए गांव में जाना पड़ता है। महिलाओं ने बताया कि प्रसव पीड़िताओं को सबसे अधिक झेलना पड़ता है। ऐसे में बीस किमी दूर जिला मुख्यालय तक लोगों को दौड़ लगानी पड़ती है। अस्पताल परिसर में मरीजों को बैठने के लिए बेंच तक नहीं है। परिसर के बगल के एक कमरे में राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल भी संचालित हो रहा है। यहां पर डॉ. राजेश कुमार वर्मा, फार्मासिस्ट सुरेंद्र प्रताप पांडेय और स्वीपर मुन्नीलाल तैनात हैं। फार्मासिस्ट सुरेंद्र प्रताप पांडेय ने बताया कि डॉक्टर फील्ड में ड्यूटी में गए हैं जबकि 14 मरीजों का रजिस्ट्रेशन कर दवा दी गई है। एसीएमओ डॉ. फकरे यार हुसैन ने बताया कि चिकित्सक की तैनाती के लिए बात चल रही है। बहुत जल्द वहां किसी डॉक्टर की तैनाती कर दी जाएगी। रही बात अन्य सुविधाओं की तो इसके लिए सीएचसी अधीक्षक गौर निर्देशित किया गया है।
विज्ञापन
यहां बिचौलिए संचालित करते हैं डिजिटल एक्सरे सेंटर
प्रभारी एसआईसी का लिखित निर्देश रद्दी की टोकरी में
रुपये मांगने की शिकायत करने वाले मरीज को बैरंग लौटाया
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। यूं तो जिला अस्पताल में दलालों का वर्चस्व है, मगर डिजिटल एक्सरे में इन बिचौलियों की इतनी पहुंच है कि बिना उनकी सहमति यहां पत्ता तक नहीं हिलता। भीड़ भी यहां खूब होती है, मगर सेटिंग वाले मरीजों का तत्काल एक्सरे होता है यदि आम मरीज पहुंच जाए तो एक दिन में उसका एक्सरे संभव नहीं होगा। यही नहीं यहां तैनात कर्मियों का रसूख इतना है कि वे एसआईसी अथवा प्रभारी एसआईसी का भी निर्देश ठेंगे पर रखते हैं।
विज्ञापन
अमर उजाला की टीम ने बुधवार को डिजिटल एक्सरे केंद्र का निरीक्षण किया। यहां सुबह से लाइन में लगे पुरानी बस्ती क्षेत्र के राजकुमार, गांधी नगर के अनूप, राहुल पटेल व मोती लाल सहित एक दर्जन लोगों ने बताया कि वे सुबह से बिना खाए-पीए यहीं बैठे हैं, मगर उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। यहां पूरे तंत्र का संचालन बाहरी व्यक्ति करते हैं। दबी जुबान आरोप लगाया कि यही बाहरी लोग तत्काल एक्सरे कराकर रिपोर्ट देने के लिए धन की मांग कर रहे थे, मगर इतने रुपये होते तो यहां क्यों आते। यहां सुबह से लाइन लगाए अनुज ने कहा कि ऑटो चलाकर किसी तरह परिवार पालते हैं, मगर यहां एक्सरे कराने आए तो दिन भर कट गया। अब यहां रुपये भी मांगे जा रहे हैं, मगर कहां से दें। अनुज के अनुसार इसकी जानकारी जब उसने प्रभारी एसआईसी डॉ. राम प्रकाश को दी तो वहां से एक पर्ची भेेजी गई मगर संबंधित कर्मियों ने यह कहते हुए भगा दिया कि एसआईसी क्या मुख्यमंत्री का भी निर्देश पत्र लाओ तब भी एक्सरे आज नहीं होगा। इस संबंध में एसआईसी डॉ. ओपी सिंह ने कहा कि वहां मनमानेपन की बात संज्ञान में आई है। इसकी जांच करा कर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यहां बिचौलिए सक्रिय हैं। यह भी शिकायत आई है।