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टीकाकरण का जायजा लेने पहुंचे एडी पशुपालन
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टीकाकरण का जायजा लेने पहुंचे एडी पशुपालन
30 अप्रैल तक शत-प्रतिशत टीकाकरण के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
बनकटी। एडी पशुपालन डॉ. आरएन नायक ने पशु टीकाकरण का स्थलीय जायजा लिया। गांवों में वे पशुपालकों से मिले। उनसे खुरपका, मुंहपका टीकाकरण के संबंध में जानकारी ली। बनकटी स्थित पशु चिकित्सा कार्यालय में एडी ने अभिलेखों पर भी एक नजर डाली। उन्होंने टीका के कोल्ड चेन, उपस्थिति पंजिका व अन्य कार्यों का अभिलेखीय सत्यापन किया। टीम को 30 अप्रैल तक सभी गांवों में शत प्रतिशत टीकाकरण के निर्देश दिए हैं।
पशुओं में खुरपका व मुंहपका से बचाव के लिए जिले भर में टीकाकरण अभियान चल रहा है। इसका निरीक्षण करने अपर निदेशक पहुंचे। वे नौना, बंजरिया, सिंघोरवा गांव में पहुंच पशुपालकों से मिले। एडी ने निरीक्षण के दौरान डॉ. प्रशांत कुमार, पशुधन प्रसार अधिकारी सुशील कुमार शुक्ला, विश्राम पाल, साधुशरण को निर्देशित किया कि वे पशुपालकों को इस बात को विशेष तौर पर समझाएं कि टीकाकरण से पशु को कोई हानि नहीं होती है। कुछ पशुपालक गर्भस्थ पशुओं का टीकाकरण कराने में कतराते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि पशु को नुकसान हो सकता है। ऐसा नहीं है। चार माह से कम के बच्चे तथा आठ माह से अधिक के गर्भस्थ पशु को छोड़कर हर पशु को टीका लगाया जा सकता है।
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30 अप्रैल तक शत-प्रतिशत टीकाकरण के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
बनकटी। एडी पशुपालन डॉ. आरएन नायक ने पशु टीकाकरण का स्थलीय जायजा लिया। गांवों में वे पशुपालकों से मिले। उनसे खुरपका, मुंहपका टीकाकरण के संबंध में जानकारी ली। बनकटी स्थित पशु चिकित्सा कार्यालय में एडी ने अभिलेखों पर भी एक नजर डाली। उन्होंने टीका के कोल्ड चेन, उपस्थिति पंजिका व अन्य कार्यों का अभिलेखीय सत्यापन किया। टीम को 30 अप्रैल तक सभी गांवों में शत प्रतिशत टीकाकरण के निर्देश दिए हैं।
पशुओं में खुरपका व मुंहपका से बचाव के लिए जिले भर में टीकाकरण अभियान चल रहा है। इसका निरीक्षण करने अपर निदेशक पहुंचे। वे नौना, बंजरिया, सिंघोरवा गांव में पहुंच पशुपालकों से मिले। एडी ने निरीक्षण के दौरान डॉ. प्रशांत कुमार, पशुधन प्रसार अधिकारी सुशील कुमार शुक्ला, विश्राम पाल, साधुशरण को निर्देशित किया कि वे पशुपालकों को इस बात को विशेष तौर पर समझाएं कि टीकाकरण से पशु को कोई हानि नहीं होती है। कुछ पशुपालक गर्भस्थ पशुओं का टीकाकरण कराने में कतराते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि पशु को नुकसान हो सकता है। ऐसा नहीं है। चार माह से कम के बच्चे तथा आठ माह से अधिक के गर्भस्थ पशु को छोड़कर हर पशु को टीका लगाया जा सकता है।
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