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पांच वर्ष से टेक्नीशियन तैनात, मशीन का पता नहीं
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पांच वर्ष से टेक्नीशियन तैनात, मशीन का पता नहीं
- रुधौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं का हाल
- मशीन के अभाव में बाहर एक्सरे कराने की बनी मजबूरी
अमर उजाला ब्यूरो
रुधौली। स्वास्थ्य केंद्रों पर सुविधाएं बढ़ाने के लिए भले ही अथक प्रयास किए जा रहे हो, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते आज भी मरीजों को भटकना पड़ रहा है। कागजों में स्वास्थ्य केंद्रों को उच्च स्वास्थ्य केंद्रों का दर्जा दे दिया गया है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं इतर है। हालात यह है कि एक्सरे जैसी छोटी सुविधाओं के लिए भी मरीज को बाहर जाना पड़ता है।
रुधौली स्वास्थ्य केंद्र को एक दशक पहले सीएचसी में तब्दील कर दिया गया। सुविधा के नाम पर पैरा मेडिकल की तैनाती के अलावा संसाधन नहीं दिए गए। स्थिति यह है कि एक्सरे टेक्नीशियन की तैनाती के पांच वर्ष बाद भी यहां एक्सरे की मशीन नहीं लग पाई।
शांतिनगर वार्ड के अमित यादव का कहना है कि जब एक्स-रे की बात आती है तो मरीजों व तीमारदारों को बाहर जाने या फिर जिला अस्पताल के लिए रेफर कराने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता है। बाइक एजेंसी के मालिक संदीप जायसवाल का कहना है कि अक्सर बाइक दुर्घटना में क्लेम के लिए आने वाले लोगों द्वारा यही कहते हुए पाया जाता है कि यहां एक्सरे मशीन न होने के कारण जिला अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां खर्च दोगुना हो जाता है।
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सीएचसी प्रभारी डॉ. अशोक कुमार चौधरी ने बताया कि एक्सरे मशीन की अनुपलब्धता को उच्चाधिकारियों के समक्ष लिखित तौर पर रखा गया है। मशीन मंगवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही एक्सरे मशीन रुधौली सीएचसी पर उपलब्ध हो जाएगी।
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वादा कर भूल गए विधायक
2017 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद क्षेत्रीय विधायक संजय प्रताप जायसवाल ने सीएचसी रुधौली पर मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी ली थी। इसी दौरान उन्हें एक्सरे मशीन न उपलब्ध होने की जानकारी दी गई थी, जिस पर क्षेत्रीय विधायक ने एक्सरे मशीन की लागत मूल्य के बारे में पूछ कर शीघ्र ही सीएचसी पर मशीन उपलब्ध कराने का वादा किया था लेकिन तब से सीएचसी मशीन आने की राह ही देख रही है।
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- रुधौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं का हाल
- मशीन के अभाव में बाहर एक्सरे कराने की बनी मजबूरी
अमर उजाला ब्यूरो
रुधौली। स्वास्थ्य केंद्रों पर सुविधाएं बढ़ाने के लिए भले ही अथक प्रयास किए जा रहे हो, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते आज भी मरीजों को भटकना पड़ रहा है। कागजों में स्वास्थ्य केंद्रों को उच्च स्वास्थ्य केंद्रों का दर्जा दे दिया गया है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं इतर है। हालात यह है कि एक्सरे जैसी छोटी सुविधाओं के लिए भी मरीज को बाहर जाना पड़ता है।
रुधौली स्वास्थ्य केंद्र को एक दशक पहले सीएचसी में तब्दील कर दिया गया। सुविधा के नाम पर पैरा मेडिकल की तैनाती के अलावा संसाधन नहीं दिए गए। स्थिति यह है कि एक्सरे टेक्नीशियन की तैनाती के पांच वर्ष बाद भी यहां एक्सरे की मशीन नहीं लग पाई।
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शांतिनगर वार्ड के अमित यादव का कहना है कि जब एक्स-रे की बात आती है तो मरीजों व तीमारदारों को बाहर जाने या फिर जिला अस्पताल के लिए रेफर कराने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता है। बाइक एजेंसी के मालिक संदीप जायसवाल का कहना है कि अक्सर बाइक दुर्घटना में क्लेम के लिए आने वाले लोगों द्वारा यही कहते हुए पाया जाता है कि यहां एक्सरे मशीन न होने के कारण जिला अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां खर्च दोगुना हो जाता है।
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सीएचसी प्रभारी डॉ. अशोक कुमार चौधरी ने बताया कि एक्सरे मशीन की अनुपलब्धता को उच्चाधिकारियों के समक्ष लिखित तौर पर रखा गया है। मशीन मंगवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही एक्सरे मशीन रुधौली सीएचसी पर उपलब्ध हो जाएगी।
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वादा कर भूल गए विधायक
2017 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद क्षेत्रीय विधायक संजय प्रताप जायसवाल ने सीएचसी रुधौली पर मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी ली थी। इसी दौरान उन्हें एक्सरे मशीन न उपलब्ध होने की जानकारी दी गई थी, जिस पर क्षेत्रीय विधायक ने एक्सरे मशीन की लागत मूल्य के बारे में पूछ कर शीघ्र ही सीएचसी पर मशीन उपलब्ध कराने का वादा किया था लेकिन तब से सीएचसी मशीन आने की राह ही देख रही है।