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जेई- एईएस से जंग को मैदान में पैरा मेडिकल
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जेई-एईएस से जंग को मैदान में पैरा मेडिकल
डॉक्टर, नर्स, एएनएम व मोबाइल टीम को दिया जा रहा प्रशिक्षण
जेई-एईएस के बीमारों की निगरानी को मोबाइल एप लांच
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। जेई-एईएस से जंग के लिए अति संवेदनशील पूर्वांचल में शासन ने इस बार नई कवायद शुरू की है। डॉक्टरों की कमी को देखते हुए इस बार मैदान में नर्स, एएनएम व मोबाइल पैरा मेडिकल टीम को उतारा जाएगा। इसके लिए 20 दिन का प्रशिक्षण देकर इन्हें ट्रेंड किया जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद इसी टीम को इंसेफेलाइटिस सेंटर, पीआईसीयू व अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात किया जाएगा।
जेई- एईएस के लिए संवेदनशील अपने जिले में शासन की कड़ी नजर है। यूं तो अभी इंसेफेलाइटिस का संवेदनशील समय दूर है, मगर इस बार इससे लड़ने की तैयारी अभी से शुरू हो गई है। 17 मई को शहर के एक होटल सभागार में एक संस्था ने निजी डॉक्टरों की कार्यशाला आयोजित कर उनसे सहयोग मांगा। इसी संस्था ने एक मोबाइल एप लांच किया है जो मरीजों की निगरानी करेगा। कार्यशाला में निजी डॉक्टरों से भी इसमें सहयोग लिया जाएगा। इसके अलावा चिकित्सकों की कमी को देखते हुए शासन ने नयी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पैरा मेडिकल स्टाफ को ट्रेंड कर उन्हें ऐसे मरीजों के इलाज के लिए दी जाने वाली आवश्यक दवाओं के साथ मैैदान में उतारा जाएगा। इसके लिए बीस मई से 10 जून तक एएनएम सेंटर में ट्रेनिंग दी जा रही है। विशेषज्ञ डॉक्टर पैरा मेडिकल्स को मरीजों की पहचान, लक्षण व जांच रिपोर्ट के आधार पर दवाओं के डोज को भी इनके माध्यम से दिए जाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। पीएचसी व सीएचसी पर आयुष व एलोपैथ चिकित्सकों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। किसी भी कीमत पर ऐसे मरीजों को तत्काल ट्रीटमेंट दिए जाने पर तंत्र सक्रिय हो चुका है।
सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि यूं तो जेई पर टीकाकरण के चलते पूरी तरह नियंत्रण हो चुका है। छिटपुट ही मामले संज्ञान में आ रहे हैं, मगर एईएस के मरीज बहुतायत पाए जा रहे हैं। चूंकि अभी इसका टीका बन नहीं सका है। ऐसे में इसे लेकर पूरी सतर्कता बरती जाएगी। इस बीमारी से जंग की तैयारी स्वास्थ्य विभाग कर चुका है। प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह क्रम लगातार जारी रहेगा।
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डॉक्टर, नर्स, एएनएम व मोबाइल टीम को दिया जा रहा प्रशिक्षण
जेई-एईएस के बीमारों की निगरानी को मोबाइल एप लांच
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। जेई-एईएस से जंग के लिए अति संवेदनशील पूर्वांचल में शासन ने इस बार नई कवायद शुरू की है। डॉक्टरों की कमी को देखते हुए इस बार मैदान में नर्स, एएनएम व मोबाइल पैरा मेडिकल टीम को उतारा जाएगा। इसके लिए 20 दिन का प्रशिक्षण देकर इन्हें ट्रेंड किया जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद इसी टीम को इंसेफेलाइटिस सेंटर, पीआईसीयू व अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात किया जाएगा।
जेई- एईएस के लिए संवेदनशील अपने जिले में शासन की कड़ी नजर है। यूं तो अभी इंसेफेलाइटिस का संवेदनशील समय दूर है, मगर इस बार इससे लड़ने की तैयारी अभी से शुरू हो गई है। 17 मई को शहर के एक होटल सभागार में एक संस्था ने निजी डॉक्टरों की कार्यशाला आयोजित कर उनसे सहयोग मांगा। इसी संस्था ने एक मोबाइल एप लांच किया है जो मरीजों की निगरानी करेगा। कार्यशाला में निजी डॉक्टरों से भी इसमें सहयोग लिया जाएगा। इसके अलावा चिकित्सकों की कमी को देखते हुए शासन ने नयी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पैरा मेडिकल स्टाफ को ट्रेंड कर उन्हें ऐसे मरीजों के इलाज के लिए दी जाने वाली आवश्यक दवाओं के साथ मैैदान में उतारा जाएगा। इसके लिए बीस मई से 10 जून तक एएनएम सेंटर में ट्रेनिंग दी जा रही है। विशेषज्ञ डॉक्टर पैरा मेडिकल्स को मरीजों की पहचान, लक्षण व जांच रिपोर्ट के आधार पर दवाओं के डोज को भी इनके माध्यम से दिए जाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। पीएचसी व सीएचसी पर आयुष व एलोपैथ चिकित्सकों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। किसी भी कीमत पर ऐसे मरीजों को तत्काल ट्रीटमेंट दिए जाने पर तंत्र सक्रिय हो चुका है।
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सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि यूं तो जेई पर टीकाकरण के चलते पूरी तरह नियंत्रण हो चुका है। छिटपुट ही मामले संज्ञान में आ रहे हैं, मगर एईएस के मरीज बहुतायत पाए जा रहे हैं। चूंकि अभी इसका टीका बन नहीं सका है। ऐसे में इसे लेकर पूरी सतर्कता बरती जाएगी। इस बीमारी से जंग की तैयारी स्वास्थ्य विभाग कर चुका है। प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह क्रम लगातार जारी रहेगा।
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