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14 सीएचसी-पीएचसी पर कहीं एक तो कहीं दो डॉक्टरों की नियुक्ति
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14 सीएचसी-पीएचसी : कहीं एक तो कहीं दो डॉक्टरों की नियुक्ति
बस्ती। डॉक्टरों की कमी की मार जिले के सरकारी अस्पताल झेल रहे हैैं। अस्पतालों में मानक के अनुसार डॉक्टर तैनात नहीं हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर इलाज के दावे पर सवाल उठने लगा हैं। हालांकि सीएमओ डॉ. चंद्रशेखर कहते हैं कि सभी अस्पतालों में मानक के अनुसार डॉक्टर न होने के बावजूद मरीजों को शत-प्रतिशत इलाज मिल रहा है।
जिले में कुल 14 सीएचसी व 39 अतिरिक्त पीएचसी हैं। नियमानुसार सीएचसी पर छह एमबीबीएस, जबकि पीएचसी पर दो और अतिरिक्त पीएचसी पर एक एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती होनी चाहिए, मगर सीएचसी पर दो या तीन तथा पीएचसी पर एक-एक डॉक्टर तैनात हैं। कई अस्पतालों में आयुष चिकित्सक भी हैं, जो पूरी व्यवस्था संचालित कर रहे हैं।
अस्पतालों में विशेषज्ञ तो दूर तमाम स्थानों पर एमबीबीएस डॉक्टरों की तैनाती ही नहीं है। कई अस्पतालों में डॉक्टर रात्रि निवास भी नहीं करते। हरदी सहित कई अस्पताल होम्योपैथिक चिकित्सक के हवाले हैं। यही हाल कप्तानगंज का भी है। हाईवे पर पड़ने वाले इन अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगा है।
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सीएमओ डॉ. चंद्रशेखर ने कहा कि यह सही है कि जिले में 165 के स्थान पर 109 डॉक्टर तैनात हैं। 56 डॉक्टरों की जरूरत अभी भी है, मगर जो व्यवस्था है, उसी में काम चलाया जा रहा है। हृदय रोग के डॉक्टर तो हैं ही नहीं। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है। स्वास्थ्य विभाग मरीजों के लिए तमाम योजनाएं संचालित कर रहा है, जिसके माध्यम से मरीजों व गर्भवती का इलाज हो रहा है।
दो दशक से यहां हृदयरोग विशेषज्ञ का इंतजार
जिले में करीब दो दशक पहले अस्पताल में डॉ. वीपी सिंह के रूप में हृदयरोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई थी। उनका स्थानांतरण लखनऊ हो गया और उसके बाद आज तक यह स्थान रिक्त है। हालांकि सीएमओ कहते हैं कि फिजीशियन से काम चलाया जा रहा है, मगर गंभीर मामलों में प्राथमिक उपचार कर मरीज को रेफर कर दिया जाता है।
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बस्ती। डॉक्टरों की कमी की मार जिले के सरकारी अस्पताल झेल रहे हैैं। अस्पतालों में मानक के अनुसार डॉक्टर तैनात नहीं हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर इलाज के दावे पर सवाल उठने लगा हैं। हालांकि सीएमओ डॉ. चंद्रशेखर कहते हैं कि सभी अस्पतालों में मानक के अनुसार डॉक्टर न होने के बावजूद मरीजों को शत-प्रतिशत इलाज मिल रहा है।
जिले में कुल 14 सीएचसी व 39 अतिरिक्त पीएचसी हैं। नियमानुसार सीएचसी पर छह एमबीबीएस, जबकि पीएचसी पर दो और अतिरिक्त पीएचसी पर एक एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती होनी चाहिए, मगर सीएचसी पर दो या तीन तथा पीएचसी पर एक-एक डॉक्टर तैनात हैं। कई अस्पतालों में आयुष चिकित्सक भी हैं, जो पूरी व्यवस्था संचालित कर रहे हैं।
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अस्पतालों में विशेषज्ञ तो दूर तमाम स्थानों पर एमबीबीएस डॉक्टरों की तैनाती ही नहीं है। कई अस्पतालों में डॉक्टर रात्रि निवास भी नहीं करते। हरदी सहित कई अस्पताल होम्योपैथिक चिकित्सक के हवाले हैं। यही हाल कप्तानगंज का भी है। हाईवे पर पड़ने वाले इन अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगा है।
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सीएमओ डॉ. चंद्रशेखर ने कहा कि यह सही है कि जिले में 165 के स्थान पर 109 डॉक्टर तैनात हैं। 56 डॉक्टरों की जरूरत अभी भी है, मगर जो व्यवस्था है, उसी में काम चलाया जा रहा है। हृदय रोग के डॉक्टर तो हैं ही नहीं। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है। स्वास्थ्य विभाग मरीजों के लिए तमाम योजनाएं संचालित कर रहा है, जिसके माध्यम से मरीजों व गर्भवती का इलाज हो रहा है।
दो दशक से यहां हृदयरोग विशेषज्ञ का इंतजार
जिले में करीब दो दशक पहले अस्पताल में डॉ. वीपी सिंह के रूप में हृदयरोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई थी। उनका स्थानांतरण लखनऊ हो गया और उसके बाद आज तक यह स्थान रिक्त है। हालांकि सीएमओ कहते हैं कि फिजीशियन से काम चलाया जा रहा है, मगर गंभीर मामलों में प्राथमिक उपचार कर मरीज को रेफर कर दिया जाता है।