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जायद में धान की फसल प्रतिबंधित होगी

Sat, 29 Oct 2016 01:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली Updated Sat, 29 Oct 2016 01:08 AM IST
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Zayed will be restricted in the paddy
फसल - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) प्रदीप भटनागर ने किसानों को जायद में धान की फसल न बोने की हिदायत देते हुए कहा कि यह भूजल के लिए बेहद घातक है। उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश में भी जायद में धान की पैदावार को प्रतिबंधित करने पर विचार कर रहे हैं। जल्द ही इसका शासनादेश जारी हो जाएगा। इसके बाद प्रदेश में कोई भी किसान जायद में धान नहीं बो पाएगा।
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एपीसी शुक्रवार को यहां इज्जतनगर स्थित आईवीआरआई के सभागार में आयोजित बरेली और मुरादाबाद मंडल की संयुक्त रबी उत्पादकता गोष्ठी में मुख्य अतिथि थे। गोष्ठी के दौरान किसानों की मांग पर विचार करते हुए उन्होंने कहा कि अगले खरीफ से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की अनिवार्यता को खत्म करने पर निर्णय लिया जाएगा। चूंकि पूर्वी उत्तर प्रदेश मे सूखे की स्थिति रहती है इसलिए वहां के लिए यह नीति नहीं बनाई जाएगी। किसानों ने उनसे कहा कि गन्ने की फसल प्रभावित होने की संभावना कम होती है इसलिए इसमें बीमा अनिवार्य होने से उनको बेवजह बीमा शुल्क देना पड़ता है। यह स्वैच्छिक होना चाहिए। एसपीसी ने कहा कि मत्स्य पालन के तालाबों में पानी के लिए सोलर वाटर पंप स्थापित करने की योजना लागू की जाएगी। खेत तालाब योजना में जो किसान खेतों पर तालाब बनाएंगे उन्हें प्राथमिकता पर सोलर वाटर पंप दिए जाएंगे। गोष्ठी में प्रमुख सचिव कृषि रजनीश गुप्ता, प्रमुख सचिव उद्यान महेश कुमार गुप्ता, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास दीपक त्रिवेदी, प्रमुख सचिव दुग्ध, पशुपालन, मत्स्य डॉ. सुधीर एम बोबडे ने किसानों को विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। बरेली मंडल केे कमिश्नर प्रमांशु, मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर एल वेंकटेश्वर लू, पीसीएफ के प्रबंध निदेशक कर्ण सिंह चौहान, विशेष सचिव सिंचाई राजीव रौतेला, डीएम बरेली पंकज यादव, डीएम बदायूं पवन कुमार, डीएम शाहजहांपुर रामगणेश, डीएम पीलीभीत मासूम अली सरवर, डीएम मुरादाबाद जुहेर बिन सगीर, डीएम रामपुर अमित किशोर, डीएम संभल भूपेंद्र चौधरी, डीएम अमरोहा वेदप्रकाश ने भी विचार रखे। सीडीओ बरेली शिवसहाय अवस्थी ने सबका आभार जताया।
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जानवरों को आवारा छोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
एपीसी ने मवेशियों को आवारा खुला छोड़ने वालों पर धारा 144 के तहत कार्रवाई करने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिए। किसानों की ओर से उठाई गई बंदरों से फसल नुकसान के समाधान की मांग पर उन्होंने कहा कि आगरा में वाइल्ड लाइफ एफओएस संस्था बंदरों को पकड़कर उनका बधियाकरण कर रही है। इसके बाद उनको वहीं छोड़ दिया जाता है, जहां से उनको पकड़ा जाता है। इस संस्था की मदद से बाकी जनपदों के डीएम भी ऐसा प्रयोग अपने जिले में कर सकते हैं। अलबत्ता उन्होंने नीलगायों की समस्या का फिलहाल कोई स्थाई समाधान न होने की बात कही। बोले- नीलगायों की समस्या सिर्फ यूपी में नहीं पूरे भारत में है। आंध्रप्रदेश में भी नीलगाय मुसीबत बने हुए हैं। 
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शुगर की बीमारी बढ़ रही चीनी की मांग कम होगी
एपीसी ने किसानों को गन्ने के बजाय सब्जी, फल और औषधीय पौधों की खेती ज्यादा से ज्यादा करने पर जोर दिया। कहा कि शुगर की बीमारी बढ़ने से चीनी की खपत लगातार घटती जा रही है इसलिए किसानों को वैकल्पिक खेती के विकल्प चुनने चाहिए।
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