{"_id":"5a1f217b4f1c1b76678be8eb","slug":"yogi-s-exercise-was-not-done-in-elections","type":"story","status":"publish","title_hn":"चुनाव में योगी की कवायद भी काम नहीं आई ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चुनाव में योगी की कवायद भी काम नहीं आई
बरेली।
Updated Thu, 30 Nov 2017 02:37 AM IST
विज्ञापन
मतदान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा को मेयर का चुनाव जिताने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मेहनत भी काम नहीं आई। 19 घंटे बरेली में रुककर भाजपा को एकजुटता का पाठ पढ़ाने के बाद भी मतदान के दिन पार्टी दिग्गज चुनाव जिताने की रणनीति से अलग ही दिखे। लोकसभा और विधानसभा की तरह बूथों पर भी कार्यकर्ता नजर नहीं आए। मतदान केंद्रों पर जो एजेंट थे, उनमें भी कोई जोश नहीं दिखा।
मतदान से चार दिन पहले बरेली आकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने जनसभा के अलावा मेयर चुनाव की रणनीति को दम देने के लिए टी और डिनर पार्टी की थी। उसमें शहर के प्रबुद्ध वर्ग और उद्यमियों को बुलाकर कम से कम 10 लोगों को मतदान के दिन फोन कर वोट डलवाने को कहा था। मर न तो संगठन ऐसा करता दिखा, न डिनर पार्टी में आने वाले प्रबुद्धजन। सीएम के जाने के बाद दो दिन वार्डों में गली-गली और घर-घर भाजपा का महासंपर्क अभियान चलना था। सामंजस्य न होने से यह अभियान भी ठीक से नहीं चल पाया। रोड शो भी ज्यादा भीड़ न होने से प्रतीकात्मक बनकर रह गया। मतदान के दिन भाजपा के एक पदाधिकारी के बूथों पर जाने के बजाय घर में रहकर सोते रहने की बात शहर में चर्चा का विषय रही। मेयर प्रत्याशी उमेश गौतम की गाड़ी में महानगर अध्यक्ष उमेश कठेरिया, डॉ. सीपीएस चौहान और गुलशन आनंद ही नजर आए। जो टिकट के और दावेदार थे, उनमें डॉ. राघवेंद्र शर्मा, डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी, अनुपम कपूर, संजीव अग्रवाल आदि भी मतदान के दौरान कहीं नजर नहीं आए। एक दिग्गज के गांव में ही भाजपा को अपेक्षानुरूप वोट नहीं मिले। यहां आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी को उम्मीद से ज्यादा वोट पड़ गए। भाजपा समर्थक मतदाताओं की पर्चियां उनके घर पहुंच जाती थीं। इस बार यह काम भी नहीं हो पाया। मतदाताओं के पास जो पर्चियां थीं, उनका पोलिंग बूथ की सूची से मिलान नहीं होने से 15 से 20 हजार वोटों का अंतर पड़ा। बड़ी संख्या में यह मतदाता वोट डालने से वंचित रह गए। पुलिस बूथों पर भाजपाइयों से अभद्रता करती रही। सत्ता में होने के बाद भी कोई ऐसा भाजपा नेता नहीं दिखा जो उनसे आपत्ति करता। मतदान के दिन ऐसा लग रहा था कि भाजपा कार्यकर्ता अपनी सरकार में नहीं, विपक्षी सरकार में रहकर चुनाव लड़ रहे हों।
विज्ञापन
मतदान से चार दिन पहले बरेली आकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने जनसभा के अलावा मेयर चुनाव की रणनीति को दम देने के लिए टी और डिनर पार्टी की थी। उसमें शहर के प्रबुद्ध वर्ग और उद्यमियों को बुलाकर कम से कम 10 लोगों को मतदान के दिन फोन कर वोट डलवाने को कहा था। मर न तो संगठन ऐसा करता दिखा, न डिनर पार्टी में आने वाले प्रबुद्धजन। सीएम के जाने के बाद दो दिन वार्डों में गली-गली और घर-घर भाजपा का महासंपर्क अभियान चलना था। सामंजस्य न होने से यह अभियान भी ठीक से नहीं चल पाया। रोड शो भी ज्यादा भीड़ न होने से प्रतीकात्मक बनकर रह गया। मतदान के दिन भाजपा के एक पदाधिकारी के बूथों पर जाने के बजाय घर में रहकर सोते रहने की बात शहर में चर्चा का विषय रही। मेयर प्रत्याशी उमेश गौतम की गाड़ी में महानगर अध्यक्ष उमेश कठेरिया, डॉ. सीपीएस चौहान और गुलशन आनंद ही नजर आए। जो टिकट के और दावेदार थे, उनमें डॉ. राघवेंद्र शर्मा, डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी, अनुपम कपूर, संजीव अग्रवाल आदि भी मतदान के दौरान कहीं नजर नहीं आए। एक दिग्गज के गांव में ही भाजपा को अपेक्षानुरूप वोट नहीं मिले। यहां आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी को उम्मीद से ज्यादा वोट पड़ गए। भाजपा समर्थक मतदाताओं की पर्चियां उनके घर पहुंच जाती थीं। इस बार यह काम भी नहीं हो पाया। मतदाताओं के पास जो पर्चियां थीं, उनका पोलिंग बूथ की सूची से मिलान नहीं होने से 15 से 20 हजार वोटों का अंतर पड़ा। बड़ी संख्या में यह मतदाता वोट डालने से वंचित रह गए। पुलिस बूथों पर भाजपाइयों से अभद्रता करती रही। सत्ता में होने के बाद भी कोई ऐसा भाजपा नेता नहीं दिखा जो उनसे आपत्ति करता। मतदान के दिन ऐसा लग रहा था कि भाजपा कार्यकर्ता अपनी सरकार में नहीं, विपक्षी सरकार में रहकर चुनाव लड़ रहे हों।
विज्ञापन