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किसानों ने सरकार के समर्थन में उठाए हाथ तो आश्वस्त हुए योगी आदित्यनाथ
सार
राम के नाम से शुरुआत फिर किसानों से बात
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सीएम के किसान सम्मेलन में शामिल किसान और अन्य।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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विस्तार
सीएम ने अपने संबोधन में राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370, भूमाफिया पर कार्रवाई और किसान सम्मान निधि का उल्लेख कर किसानों से मांगी सरकार के कामों पर राय
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बोले- भाजपा के एजेंडे में शामिल एक-एक वादे को पीएम मोदी ने किया पूरा, कृषि कानून से भी खुशहाल होंगे किसान
बरेली। किसान सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिर्फ कृषि कानूनों पर बात नहीं की। शुरुआत में ही उन्होंने एक-एक कर अयोध्या में राम मंदिर, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370, किसान कल्याण निधि और भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई जैसी उपलब्धियों का जिक्र किया और फिर किसानों से सीधा संवाद करते हुए पूछा कि सरकार के इन कामों से वे संतुष्ट हैं या नहीं। जवाब में आगे से पीछे तक पंडाल में मौजूद किसानों ने हाथ उठाए तो वह आश्वस्त दिखे। इसके बाद उन्होंने जमकर विरोधी दलों पर निशाना साधा।
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किसान सम्मेलन के मंच पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन की शुरुआत जय श्रीराम का उद्घोष कर किसानों से अभिवादन करने के साथ की। बोले, किसान किसी से भी राम-राम कहकर ही अभिवादन करते हैं। राम का नाम उनके जीवन में शुरू से अंत तक जुड़ा रहता है। इन्हीं जनभावनाओं का ख्याल रखते हुए पीएम मोदी ने राम मंदिर के बरसों पुराने मुद्दे का हल कराया और अयोध्या में मंदिर के निर्माण का भी शुभारंभ करा दिया। उन्होंने किसानों से पूछा कि राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए था या नहीं। जवाब में पूरा पंडाल फिर जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। इसके बाद सीएम योगी ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने पर भी किसानों की राय मांगी। कहा, भाजपा ने देश के आजाद होने के वक्त से ही चले आ रहे इस काले कानून को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई, यह सही किया या गलत। किसानों इसके जवाब में भी बुलंद आवाज में ‘हां’ कहते हुए हाथ खड़े कर दिए।
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मुख्यमंत्री ने जमीनें कब्जाने वाले भूमाफिया पर की जा रही कार्रवाई पर भी किसानों की राय मांगी। इसके बाद उन्होंने कहा कि सरकार ने जब किसान सम्मान निधि को अपने एजेंडे में शामिल किया तब भी विपक्ष ने किसानों को गुमराह करते हुए कहा था कि उन्हें सम्मान निधि नहीं मिलेगी। वह किसानों से पूछना चाहते हैं कि किसान सम्मान निधि उनके खातों में आई या नहीं। किसानों ने इस पर भी समर्थन में हाथ उठाए। धान क्रय केंद्र पर भी किसानों ने सहमति जताई। इसके बाद योगी ने कहा कि जब पीएम मोदी और प्रदेश सरकार की ओर से सारे काम अच्छे किए हैं तो किसानों के खिलाफ उसका रुख कैसे हो सकता है। उन्होंने पूछा कि क्या कृषि कानून किसानों के खिलाफ हैं तो जवाब ना में मिला।
इसके बाद सीएम ने किसानों से विपक्ष की बातों से गुमराह न होने की अपील करते हुए कहा कि वे सरकार के उनकी बेहतरी के लिए किए जा रहे प्रयासों में सहयोग करें। किसानों ने इस बार भी हाथ उठाकर जय श्री राम का उद्घोष कर उनका समर्थन किया।
पूर्व पीएम राजीव गांधी का नाम लेकर कांग्रेस पर कसा तंज
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर तंज कसते हुए पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी के उस कथन का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि केंद्र से भेजे गए एक रुपये में से निचले स्तर पर 15 पैसे ही पहुंच पाते हैं। उन्होंने कहा कि आज वह दावे से कह सकते है कि कें द्र से भेजा गया एक रुपया पूरे का पूरा निचले स्तर तक पहुंच रहा है। कारण यह है कि अब लाभार्थी के खाते में डीबीटी के जरिए सीधे पैसा भेजा जा रहा है।
ये लोग मौजूद रहे मंच पर
केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, राज्यमंत्री बलदेव औलख, महेश गुप्ता, सांसद धर्मेंद्र कश्यप, संघमित्र मौर्य, अरुण सागर, महापौर उमेश गौतम, प्रदेश सह संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष रजनीकांत माहेश्वरी, विधायक व राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल, विधायक धर्मपाल सिंह, प्रो. श्याम बिहारी लाल, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. डीसी वर्मा, छत्रपाल गंगवार, केसर सिंह, बहोरन लाल मौर्य, एमएलसी डॉ. जयपाल व्यस्त, डॉ. हरी सिंह ढिल्लो, जिलाध्यक्ष पवन शर्मा। इनके अलावा आईटी सेल के पदाधिकारियों के अलावा सुरेश राठौर, पवन अरोरा, अतुल कपूर, विशाल मेहरोत्रा, मीडिया प्रभारी अंकित माहेश्वरी, बंटी ठाकुर आदि नेताओं को पंडाल में जगह मिली।
मोबाइल फोन गायब हुआ तो उड़ीं वित्त मंत्री की हवाइयां
किसानों को संबोधित करने के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना का मोबाइल फोन डायस पर ही छूट गया था। सम्मेलन खत्म होने के बाद जब मंच पर मौजूद सभी नेता मुख्यमंत्री के साथ बैठक के लिए उनके पीछे चले तब खन्ना को एहसास हुआ कि उनकी जेब में उनका मोबाइल नहीं है। उन्होंने एक पुलिस अफसर को इस बारे में बताया तो वह मोबाइल तलाश करने मंच पर पहुंचा। जहां वित्त मंत्री बैठे थे, वहां खोजबीन की गई लेकिन उनका मोबाइल नहीं मिला। बाद में खन्ना खुद मोबाइल तलाश करने पहुंचे। मोबाइल डायस पर रखा मिला तो उनके चेहरे पर राहत के भाव आए।
पैर छूकर लिया आशीर्वाद
केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने मंच पर बैठे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। जिलाध्यक्ष पवन शर्मा भी इनमें शािमल थे।
योगी को सौंपा चांदी से बना राम दरबार
किसानों से संवाद करने आए सीएम योगी के मंच पर स्वागत करने के लिए उन्हें चांदी से बना राम दरबार उपहार में दिया गया। बदायूं की सांसद संघप्रिय मौर्य ने उन्हें हल देकर अभिवादन किया। मुख्यमंत्री मंच पर ही हल ऊपर उठाकर किसानों को दिखाया।
कड़ाके की सर्दी में भी पहुंचे किसान तो खिले भाजपा नेताओं के चेहरे
कड़ाके की ठंड होने के बावजूद सम्मेलन में दो घंटे पहले से ही किसानों के काफिले पहुंचने शुरू हो गए थे। सम्मेलन शुरू होने तक पूरा पंडाल किसानों से खचाखच भर गया तो भाजपा नेताओं के चेहरे खिल गए। इससे पहले आयोजक आशंकित कि मौसम कहीं इस कार्यक्रम में अड़चन न बन जाए। सम्मेलन शुरू होने तक मुख्यमंत्री आवास से भी लगातार कार्यक्रम स्थल पर भीड़ के बारे में लगातार जानकारी मांगी जाती रही। बाहर से जो किसान पहुंचे, उनके वाहन बाहर ही काफी दूर खड़े करा दिए गए। काफी दूर पैदल चलकर वे पंडाल तक पहुंचे। इसमें दिव्यांग भी मौजूद थे। मुस्लिम किसान भी देखे गए।
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बोले- भाजपा के एजेंडे में शामिल एक-एक वादे को पीएम मोदी ने किया पूरा, कृषि कानून से भी खुशहाल होंगे किसान बरेली। किसान सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिर्फ कृषि कानूनों पर बात नहीं की। शुरुआत में ही उन्होंने एक-एक कर अयोध्या में राम मंदिर, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370, किसान कल्याण निधि और भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई जैसी उपलब्धियों का जिक्र किया और फिर किसानों से सीधा संवाद करते हुए पूछा कि सरकार के इन कामों से वे संतुष्ट हैं या नहीं। जवाब में आगे से पीछे तक पंडाल में मौजूद किसानों ने हाथ उठाए तो वह आश्वस्त दिखे। इसके बाद उन्होंने जमकर विरोधी दलों पर निशाना साधा।
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किसान सम्मेलन के मंच पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन की शुरुआत जय श्रीराम का उद्घोष कर किसानों से अभिवादन करने के साथ की। बोले, किसान किसी से भी राम-राम कहकर ही अभिवादन करते हैं। राम का नाम उनके जीवन में शुरू से अंत तक जुड़ा रहता है। इन्हीं जनभावनाओं का ख्याल रखते हुए पीएम मोदी ने राम मंदिर के बरसों पुराने मुद्दे का हल कराया और अयोध्या में मंदिर के निर्माण का भी शुभारंभ करा दिया। उन्होंने किसानों से पूछा कि राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए था या नहीं। जवाब में पूरा पंडाल फिर जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। इसके बाद सीएम योगी ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने पर भी किसानों की राय मांगी। कहा, भाजपा ने देश के आजाद होने के वक्त से ही चले आ रहे इस काले कानून को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई, यह सही किया या गलत। किसानों इसके जवाब में भी बुलंद आवाज में ‘हां’ कहते हुए हाथ खड़े कर दिए।
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मुख्यमंत्री ने जमीनें कब्जाने वाले भूमाफिया पर की जा रही कार्रवाई पर भी किसानों की राय मांगी। इसके बाद उन्होंने कहा कि सरकार ने जब किसान सम्मान निधि को अपने एजेंडे में शामिल किया तब भी विपक्ष ने किसानों को गुमराह करते हुए कहा था कि उन्हें सम्मान निधि नहीं मिलेगी। वह किसानों से पूछना चाहते हैं कि किसान सम्मान निधि उनके खातों में आई या नहीं। किसानों ने इस पर भी समर्थन में हाथ उठाए। धान क्रय केंद्र पर भी किसानों ने सहमति जताई। इसके बाद योगी ने कहा कि जब पीएम मोदी और प्रदेश सरकार की ओर से सारे काम अच्छे किए हैं तो किसानों के खिलाफ उसका रुख कैसे हो सकता है। उन्होंने पूछा कि क्या कृषि कानून किसानों के खिलाफ हैं तो जवाब ना में मिला।
इसके बाद सीएम ने किसानों से विपक्ष की बातों से गुमराह न होने की अपील करते हुए कहा कि वे सरकार के उनकी बेहतरी के लिए किए जा रहे प्रयासों में सहयोग करें। किसानों ने इस बार भी हाथ उठाकर जय श्री राम का उद्घोष कर उनका समर्थन किया।