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महिलाओं को राह दिखा रही है बरेली की बेटी

Thu, 29 Jan 2015 01:04 AM IST
बरेली
बरेली Updated Thu, 29 Jan 2015 01:04 AM IST
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बरेली की एक बेटी आजकल अमेरिका में नाम कमा रही है। वो बहुत खुश है कि वह कुछ ऐसा कर रही है जिससे दूसरों को जीने की ताकत मिलती है।  आईआईएम अहमदाबाद की छात्रा रही त्विषा आनंद मोहन वहां सेवन कप आफ टी संस्था में डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं जो परेशान हाल लोगों को काउंसिलिंग की सुविधा देती है।  घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं की मदद करना त्विषा को बहुत अच्छा लग रहा है। वह भारतीयों के एनजीओ मैत्री से भी जुड़ी है जो घरेलू हिंसा से पीड़ितों की मदद करता है।  उनका कहना है कि भारत में ही नहीं, बल्कि अमेरिका तक में बहुत सी महिलाएं घरेलू हिंसा से पीड़ित हैं।
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बरेली कॉलेज के विधि विभाग के  डीन डॉ. दीपक आनंद और बॉटनी की डॉ. अनुपम आनंद की बेटी त्विषा आनंद मोहन ने सेंट मारिया गोरेटी कॉलेज से 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद रांची से बीटेक किया। इसके बाद दो साल तक विप्रो में नौकरी की। नौकरी के बाद आईआईएम अहमदाबाद में ऑर्गेनाइजर बिहेवियर में पांच साल का एफपीएम फेलो (एमबीए और रिसर्च) के लिए चयनित हो गईं। इसी दौरान 2010 में उनकी शादी हो गई। 2012 में उन्होंने आईआईएम से पढ़ाई पूरी की। उनके पति अंकित ने अमेरिका से ही मास्टर कोर्स करने के बाद वहीं पर पीएचडी की और  गूगल में बतौर कम्प्यूटर इंजीनियर नौकरी कर रहे हैं।  त्विषा आनंद अपने पति अंकित के साथ अमेरिका के सेंट फ्रांसिस्को में ही रह रही हैं। उनकी कंपनी सेवेन कप्स ऑफ टी 139 देश के लोगों से जुड़ी हुई है। यह कंपनी मानसिक तौर पर परेशान, अस्वस्थ, अवसादग्रस्त लोगों से ऑनलाइन कनेक्ट कर उनकी मदद करने को आतुर लोगों से उन्हें जोड़ती है। अमेरिका में रहने के दौरान उन्होंने देखा कि वहां पर भी बहुत सी महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हो रही हैं। इसके बाद उन्होंने डोमेस्टिक वायलेंस इन एडवोकेसी का कोर्स किया। अपनी नौकरी के साथ ही त्विषा अमेरिका के ‘मैत्री’ एनजीओ के साथ घरेलू हिंसा की शिकार विदेशों में बसी भारतीय महिलाओं को सलाह दे रही हैं। उनका कहना है कि भेदभाव और लैंगिक हिंसा सिर्फ गरीब और कम पढ़े लिखे लोग ही नहीं करते,  ज्यादा संख्या पढ़े- लिखे और धनाढ्य वर्ग की है।  इसके लिए जरूरी है कि हमारी बेटियां स्वावलंबी और स्वतंत्र हों, ताकि वे अकेले रहकर भी ऐसे भेदभाव के खिलाफ लड़ सकें। त्विषा की मां डॉ. अनुपम आनंद ने कहा, मेरा हमेशा से मन था कि हमारी पहली संतान बेटी ही हो। त्विषा को पाकर  लगा कि मेरी इच्छा पूरी हो गई है।
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