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कॉमन सेंस बिना नहीं बना सकते स्मार्ट सिटी
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sat, 01 Oct 2016 01:15 AM IST
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एजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग विभाग की ओर से एडवांस इन कम्यूनिकेशन कम्यूटिंग एंड ऑटोमेशन विषय पर आयोजित दो दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस में मुख्य अतिथि मल्टीमीडिया विश्वविद्यालय मलेशिया के निदेशक लाऊ श्योंग हो ने कहा कि सही मायने में स्मार्ट सिटी कॉमन सेंस के बिना नहीं बन सकती। चाइना, कोरिया आदि विकसित देशों में स्मार्ट सिटी के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर देने से नहीं बन जाती, उसके लिए कामन सेंस भी होना चाहिए। लाऊ श्योंग ने भारत में हेल्थकेयर पर फोकस करने का सुझाव दिया। कहा कि भारत सरकार को देश में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने को प्राथमिकता में रखना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि निविलिया विश्वविद्यालय साइंस एंड टेकभनोलॉजी में प्रोफेसर डॉ. एसएन नागाड़ा ने कहा कि भविष्य में सेंसर नेटवर्क पर दुनिया निर्भर करेगी। मसलन हाइवे पर चलने वाले वाहनों को सारे स्थानों की लोकेशन सेंसर से हासिल हो सकेगी। एनआईटी कुरुक्षेत्र में कम्यूटर साइंस के हेड प्रोफेसर आशुतोष कुमार ने सामान्य जनजीवन में कम्यूटर तकनीकी के इस्तेमाल पर जोर दिया। अध्यक्षता करते हुए रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुशाहिद हुसैन ने कहा कि भविष्य नैनो टेकभनोलॉजी का है। डॉ. अनूप गिरधर ने साइबर सुरक्षा के उपायों और सोशल मीडिया के इस्तेमाल के बारे में बताया। कांफ्रेंस में चार तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। इनमें 27 शोधपत्र पढ़े गए। संचालन डॉ. विनय रिषीवाल ने किया। डीन प्रो. एके गुप्ता ने आभार जताया। शनिवार को भी यह दो दिवसीय कांफ्रेंस जारी रहेगी।
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विशिष्ट अतिथि निविलिया विश्वविद्यालय साइंस एंड टेकभनोलॉजी में प्रोफेसर डॉ. एसएन नागाड़ा ने कहा कि भविष्य में सेंसर नेटवर्क पर दुनिया निर्भर करेगी। मसलन हाइवे पर चलने वाले वाहनों को सारे स्थानों की लोकेशन सेंसर से हासिल हो सकेगी। एनआईटी कुरुक्षेत्र में कम्यूटर साइंस के हेड प्रोफेसर आशुतोष कुमार ने सामान्य जनजीवन में कम्यूटर तकनीकी के इस्तेमाल पर जोर दिया। अध्यक्षता करते हुए रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुशाहिद हुसैन ने कहा कि भविष्य नैनो टेकभनोलॉजी का है। डॉ. अनूप गिरधर ने साइबर सुरक्षा के उपायों और सोशल मीडिया के इस्तेमाल के बारे में बताया। कांफ्रेंस में चार तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। इनमें 27 शोधपत्र पढ़े गए। संचालन डॉ. विनय रिषीवाल ने किया। डीन प्रो. एके गुप्ता ने आभार जताया। शनिवार को भी यह दो दिवसीय कांफ्रेंस जारी रहेगी।
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