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Bareilly News: बरेली के परिवहन कार्यालय से जुड़े वाहन माफिया गिरोह के तार, कई लोग रडार पर

Thu, 01 Jun 2023 05:28 PM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Thu, 01 Jun 2023 05:28 PM IST
सार

जांच में पता लगा है कि बरेली आरटीओ कार्यालय के कर्मचारी, कुछ फाइनेंस कंपनियों के लोग भी इन शातिरों के मददगार हैं। टीम इन्हें ट्रेस कर कुछ और गिरफ्तारी करने के प्रयास में है।

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vehicle mafia gang link to Bareilly transport office
सीबीगंज थाने में आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली में लखनऊ एसटीएफ ने सीबीगंज थाने से छह ऐसे शातिरों को जेल भेजा है, जो कई प्रांतों से वाहनों को फर्जी एनओसी पर लाकर उनके चेसिस व इंजन नंबर बदलकर कई बार बेच रहे थे। पूछताछ और इनके मोबाइल फोन की जांच में पता लगा है कि बरेली आरटीओ कार्यालय के कर्मचारी, कुछ फाइनेंस कंपनियों के लोग भी इन शातिरों के मददगार हैं। टीम इन्हें ट्रेस कर कुछ और गिरफ्तारी करने के प्रयास में है।

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एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक एक वक्त में उत्तराखंड में गुड्डू वारसी चर्चित वाहन चोर था। इस बार पकड़े गए नदीम आदि उसी के गुर्गे हैं। नदीम आरटीओ दफ्तर के परिचित स्टाफ से मिलकर कटी या दुर्घटनाग्रस्त गाड़ियों का ब्योरा लेता था। बाकी लोग अरुणाचल प्रदेश या अन्य स्थानों से पुराने ट्रकों आदि को फाइनेंस पर खरीदकर फर्जी एनओसी पर लाते थे।
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इस वाहन की मुश्किल से एक या दो किस्त जमा करते थे। फिर उसकी चोरी दिखाकर एफआईआर के सहारे किस्तों से छुटकारा पा लेते थे। साथ ही बीमा कंपनी से अलग क्लेम लेते थे। मामला यहीं खत्म नहीं होता था। इसके बाद संबंधित वाहन का चेसिस और इंजन नंबर बदलकर कटी या दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी का नंबर लगाया जाता था।

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इसके बाद फिर उसी वाहन का बीमा कराकर और चोरी दिखाकर क्लेम ले लिया जाता था। एक ही ट्रक या कार में कई बार नंबर बदलकर और गिरोह के सदस्य को उसका मालिक बनाकर वसूली का यह खेल चलता रहा। सूत्रों के मुताबिक फाइनेंस कंपनियों के सर्वेयर और आरटीओ के कर्मी व दलाल भी इसमें शामिल थे।

चैटिंग व बातचीत का रिकॉर्ड मिला

एक आरोपी के मोबाइल फोन से आरटीओ दफ्तर के किसी मनोज नाम के शख्स से चैटिंग व बातचीत का रिकॉर्ड भी मिला है। एसटीएफ इंस्पेक्टर दिलीप तिवारी और उनके सहयोगी अशोक गुप्ता काफी समय से इस गिरोह के पीछे लगे थे, जिसमें अब सफलता मिली है।

धंधेबाजों ने हर फन के माहिर शख्स को अपने साथ जोड़ रखा था। जेल भेजा गया मुरादाबाद के जारई गेट निवासी शमी बर्तनों पर नक्काशी का उम्दा कारीगर है। उसे गिरोह ने चेसिस व इंजन नंबर बदलने के लिए साथ रखा था। वह ग्राइंडर से चेसिस नंबर हटाकर दूसरा लगाता था। वहीं इंजन नंबर की पत्ती भी कायदे से हटा दी जाती थी। वसीम और आफताब फाइनेंस कंपनी के दलाल बताए जा रहे हैं।

एसटीएफ लखनऊ के एएसपी अमित कुमार नागर ने बताया कि एसटीएफ काफी समय से इस गिरोह की तलाश में थी। आरोपियों से पूछताछ, सीडीआर व अन्य माध्यमों से काफी जानकारी मिली है। बरेली के परिवहन कार्यालय समेत कई प्रदेशों और शहरों के कई दफ्तरों तक गिरोह का नेटवर्क है, जिसे ध्वस्त किया जाएगा।

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